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भ्रष्टाचारी कैसे सुधरे..............(व्यंग)

Posted On: 15 Sep, 2010 Others में

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भ्रष्टाचार……………….
कई बार लोग ये कहते हुए पाए जाते हैं की ……….. यार उस पद पर तो बहुत है उपरी कमाई……… या कभी कहते हैं की उस विभाग में कुछ भी नहीं हो सकता है………… पर मुझे लगता है की ये भ्रष्टाचार भी एक कला है और एक भ्रष्ट आदमी एक कलाकार …………. जो जितना बड़ा भ्रष्ट वो उतना ही बड़ा कलाकार…………..

एक छोटी सी कहानी जो मैंने अपने ऑफिस के सीनियर अधिकारी से सुनी …….. वो आपके साथ बाटना चाहता हूँ………..

एक बार एक राजा के राज्य में एक भ्रष्ट आदमी था………….. उसके भ्रष्टचार की सुचना आये दिन राजा तक पहुचती ……….. पर राजा के सारे उपाय करने के बाद भी वो नहीं सुधरा…………

फिर एक दिन किसी ने राजा को सलाह दी की……………… क्यों न इसको किसी ऐसी जगह भेजा जाये जहाँ कोई भ्रष्टाचार का तरीका ही न हो……………. तब राजा ने भी सोचा की शायद अगर इसको कोई व्यर्थ का काम दे दिया जाये तो ये सुधर जाये……….

और राजा ने उसको बुलाया और कहा …………….. हम तेरी ईमानदारी से खुश हैं और तुझे समुद्र निरीक्षक नियुक्त करते हैं………….. कुछ समय से लहरों की संख्या में कमी हो गयी है……… तुझे चोर को पकड़ना हैं……………….. वहां तेरा काम लहरों की गिनती करना है…….. रोज कितनी लहरें आती है….. उनका हिसाब रखना है………………

जैसी आज्ञा कहकर वो भ्रष्ट आदमी चला गया ……………. फिर कुछ समय बाद फिर एक व्यक्ति उस आदमी की शिकायत लेकर आया और बोला की उसने वहां भी भ्रष्टाचार फैला दिया है………… राजा हैरान था की वहां कैसे……….

राजा खुद समुद्र तट पर गया और उसने खुद देखा…………….. वो आदमी जैसे ही कोई मछुवारा समुद्र में मछली पकड़ने जाता………….. वो झट उसको पकड़ लेता और कहता की तू ही लहरों की चोरी करता है ….. चल राजा के पास …….. वो मछुवारा जब ये कहता की मालिक हम तो केवल मछली पकड़ने जाते हैं तो वो आदमी ये कह कर की तुम्हारे कारण लहरों की गिनती कम हो गयी……….और उनसे रिश्वत ले लेता……………

राजा ये देख कर हतप्रभ हो गया………… और वो समझ गया की वो भ्रष्टचार उसके पद के कारण नहीं उसके मन के कारण था………………. और अब राजा के पास कोई उपाय न बचा था सिवाय इस के की उसको निकाल बहार किया जाये………..

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178 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Fanny के द्वारा
July 12, 2016

> Correcteurs : De quand date le passage des citations en italique et en connaissez-vous la raison qui persiste à m&©a;uoqÃrchspper, puisque les guillemets à eux seuls suffisent à indiquer qu’il s’agit d’une citation ?Merci.

manishgumedil के द्वारा
September 16, 2010

खूबसूरत प्रस्तुति……….. भ्रष्टाचार को एक अलग अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए बधाई स्वीकार करें………….

    Piyush Pant के द्वारा
    September 16, 2010

    मनीष जी …….. एक बार फिर आपकी प्रतिक्रिया का शुक्रिया………………

    Nevaeh के द्वारा
    July 12, 2016

    Mara… sono senza parole…Non pensavo di avere una così bella sorpresa questa ma&Qniat#8230;tui poi!!! Non sai come sono felice per te, per voi!Ti abbraccio forte e mando una calda carezza al tuo folletto (magari Memole!)tvbGio

rkpandey के द्वारा
September 15, 2010

पीयूष जी, नैतिक अवधारणाओं से अनुकूलन ना बिठा पाने की अक्षमता तमाम दुष्कृत्यों को वरण करवा देती है. भ्रष्टाचार के लिए समय-परिस्थिति दोषी ना होकर मानव लिप्सा दोषी है. हॉ, हम अपने गलत कृत्यों को आवरण प्रदान करने के लिए जरूर इस पर समय की मांग का हवाला देते हैं. यकीनन अच्छी पोस्ट.

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया………….. पाण्डेय जी………………

    Raynoch के द्वारा
    July 12, 2016

    ba salam man barname PdfGrabber v6.0.0.2 ro download kardam vali licence mikhad azehc-rackasmo ham baz kardam vaki nemishe-rasti bara filehai ke ramz darano che joor mishe baz kard-mersi

Neha के द्वारा
September 15, 2010

बहुत बढ़िया कहानी. अच्छी लगी..

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    सराहना के लिए हार्दिक शुक्रिया…………

rita singh 'sarjana' के द्वारा
September 15, 2010

पियूष जी ; आपके अधिकारी ने जो कहानी आपको सुनाया वो हम सभी से बाँटने के लिए शुक्रिया l भ्रष्ट्राचार पद में नहीं मनमे होता है राजा ने सोचा l आज हर ऑफिस की कहानी एक जैसी है l अपना ही जी.पि.ऍफ़ से रूपये निकालने जाओ तो १०० रुपया जब तक उनतक नहीं पहुचाते फाइल आगे ही नहीं बढता l लेकिन भ्रष्ट्राचार के लिए कही न कही हम भी इसके जिम्मेदार है l हम देंगे तो काम जल्दी हो जायेगा यह मनस्तिथि रहता है l परन्तु भ्रष्ट्राचार ख़त्म करने के लिए पहल तो हमें करने ही पढेंगे l अच्छी पोस्ट ,बधाई l

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    सही कहा आपने………… भ्रष्ट्राचार ख़त्म करने के लिए पहल तो हमें ही करनी होगी……. शुक्रिया…….

R K KHURANA के द्वारा
September 15, 2010

प्रिय पियूष जी, सही बात है आपकी ! लोग बहाने बना कर लोगो को लूट रहे है ! मैं उस समय चंडीगढ़ में था ! वहां सरकार की और से एक शेड बन रहा था ! लेकिन वो किसी कारण से बिना दरवाजे लगा ही अधुरा रह गया ! वहां पर दो-तीन मजदूर रहने लगे ! तभी एक सज्जन ने देखा की यह मजदूर यहाँ रह है तो वो उनके पास जाकर बोला तुम इस सरकारी “मकान” में बिना इज़ाज़त के रह रहे हो चलो थाने ! पुलिस का नाम सुन कर वे बेचारे घबरा गए ! फिर उसने उनसे १००/- देने के लिए कहा ! उन्होंने डर के मारे पैसे दे दिए ! फिर वो सज्जन बिना नागा उन लोगो से हर महीने आते और उनसे १००/- ले जाते ! यह बहुत पुरानी बात है उस समय १००/- बहुत होते थे ! राम कृष्ण खुराना

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    आदरणीय खुराना जी……… आपके द्वारा सहमति ने लेख की सार्थकता को प्रमाणित कर दिया…… हार्दिक शुक्रिया……….

Munis Dixit के द्वारा
September 15, 2010

सही कहा आप ने, जो जितना बड़ा भ्रष्ट वो उतना ही बड़ा कलाकार

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    और ये सारी रिश्वत उस कलाकार की कला का पुरस्कार…………. शुक्रिया………..

Ritambhara के द्वारा
September 15, 2010

पियूष जी ! प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद! एक बात मैं नही समझ पा रही हूँ की अपनी इमेज कैसे अपलोड करूँ ? कृपया बताने का कष्ट करे  

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………….

    Ritambhara के द्वारा
    September 15, 2010

    सहायता के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

Ramesh bajpai के द्वारा
September 15, 2010

पियूष जी भ्रस्टाचार का कोढ़ कुछ तो गढ़ेगा ही . और तब जब ये खून में मिल गया हो . मगर इसको निकलना तो होगा ही

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    सही कहा आपने और डर भी यही है की कही ये कोढ़ फ़ैल न जाये……….. पीढ़ियों तक ,,,,,,,,,, आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

R N Shahi के द्वारा
September 15, 2010

भ्रष्टाचार के लिए हर बहाना जायज है ,यही कह रही है आपकी ये मनोरंजक कहानी पीयूस जी . बधाई .

    Piyush Pant के द्वारा
    September 15, 2010

    आदरणीय शाही जी……. बिलकुल सही कहा आपने……………….. आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……


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