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ईमानदारी की तोहफा.......

Posted On: 19 Sep, 2010 Others में

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एक लकडहारे की ईमानदारी की एक कथा हम सबने बचपन में सुनी थी………

जिसमे एक लकडहारा था……. जो जंगल में रोज लकड़ी काटने जाता था……… और एक बार लकड़ी काटते हुए उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गयी……… वो वही बैठ कर भगवान् को याद करने लगा…………. तभी पानी के देवता ने भर आकर उसको दर्शन दिए और उसके रोने का कारन पूछा……………. और जब उसने बताया की उसकी कुल्हाड़ी पानी में गिर गयी है……..

तो देवता एक चांदी की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आये और लकडहारे से पूछा की क्या ये तुम्हारी है……. लकडहारा बोला नहीं ये मेरी नहीं है……… फिर वो देवता वापस पानी में गए…………….. और अबकी बारी सोने की कुल्हाड़ी ले कर आये और फिर पूछा की क्या ये कुल्हाड़ी तुम्हारी है………

honest_woodcutter

और लकडहारा फिर बोला की नहीं ये मेरी नहीं है………. और जब अंत में जल देवता लोहे की कुल्हाड़ी ले कर आये तो लकडहारा बोला की हाँ ये ही मेरी है………

अब देवता ने खुश होकर उसको तीनो कुल्हाड़ियाँ दे दीं………….. लकडहारा चला गया और उसने ये कहानी अपने घर वालों को सुनाई…………
यहाँ से नयी कहानी शुरू होती है……………

अब लकडहारे का लड़का और उसकी बीबी दोनों लकड़ी काटने गए………. बीबी पेड़ पर चढ़ कर पति की मदद कर रही थी…………. की अचानक पत्नी का पैर फिसल गया और वो नदी में गिर गयी……….. और लकडहारे का लड़का रोने लगा…….. रोते हुए उसे बहुत देर हो गयी .. पर वो घर जाने को तैयार नहीं था ………. बस रोये जा रहा था………

तभी जल देवता प्रकट हुए…………. और उन्होंने उस से रोने का कारन पूछा ………… तो उसने बताया की उसकी पत्नी पानी में गिर गयी है……… और अगर वो नहीं मिली तो वो भी पानी में कूद कर अपनी जान दे देगा………..

देवता को दया आ गयी और वो पानी में उतरे ………… और अब उनके साथ करीना कपूर थी….. और उन्होंने उस लकडहारे से पूछा की क्या ये तुम्हारी बीबी है………. लकडहारे ने उसको ध्यान से देखा और उछलते हुए बोला की हाँ ये ही है………

देवता क्रोध से भर गए और बोले ………. झूठे मैं अभी तुझे मृतुदंड देता हूँ……… क्या ये तेरी पत्नी है……… लकडहारा घबरा गया … ओर कुछ सँभालते हुए बोला………… नहीं भगवान् ये मेरी पत्नी नहीं है………
देवता :: तो फिर झूठ क्यों कहा…………
लकडहारा :: पिछली बार की आपकी कृपा के कारण………….
देवता :: साफ़ साफ़ कहो मैं कुछ समझा नहीं………..
लकडहारा :: भगवान् मेरे पिता जी की कुल्हाड़ी जब गिरी तो आपने पहले चांदी की फिर सोने की और फिर लोहे की कुल्हाड़ी दिखाई और पिताजी की ईमानदारी से खुश होकर उनको तीनो कुल्हाड़ी दे दी…….
और मैं नहीं चाहता था की आप करीना के बाद बिपाशा और फिर अंत में मेरी पत्नी को लाते और बाद में तीनो मुझे उपहार स्वरुप दे देते………
पर मैं इस कम आमदनी में इन तीनो को कैसे पाल सकता था इस लिए मैं पहले में ही मान गया…..

इसे केवल व्यंग समझ कर भूल जाएँ …………. किसी की भावनाओं को आहात करना मेरा उद्देश्य नहीं है……….



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187 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Lavonn के द्वारा
July 12, 2016

Anny Tôrres disse:Puzt, e o pior é que sou a melhor amiga dela, e só soube pelo msn, quando ela mesmo me con;tu&#8230oquase tive um troço…fikei com raiva, pois se ela tivesse ido embora, teria rompido o nosso acordo de envelhecermos juntas, viajando pelo país..ksks, bricadeiras a parte, sei que nada de ruim aconteceu com ela, pois ela é protegida de Deus, por ser a pessoa maravilhosa que é!!!Vida longa a essa pessoa do bem!!!.

Sanjeev Kumar के द्वारा
September 19, 2010

मजा आ गया भाई जी. बहुत अच्छे लिखे हो.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 19, 2010

    आपको अच्छा लगा तो… लेख सार्थक रहा……

Ramesh bajpai के द्वारा
September 19, 2010

पियूष जी इस बुढ़ापे में क्यों लालच दिखा रहे है .आप की चाची से कहुगा की लकड़ी काटने चलना है तो पहले गठिया का रोना रोएगी . फिर न चल पाने का दर्द ……….. बहुत ही सीख भरी रचना बधाई

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 19, 2010

    आदरणीय बाजपाई जी ……… बस एक बार कैसे भी चाची जी को ले तो जाएँ …….. बदले में फिर दो और नयी चाची लेते आना…… और चाची को समझा दीजियेगा की शायद देवता उनके कष्टों को (गठिया और जोड़ों के दर्द) को दूर कर दें…………. केवल मजाक है………. अन्यथा न लें………… प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया…………..

    Viki के द्वारा
    July 12, 2016

    Oser gostemning på bildene du viser. Personlig og vakkert:)Skal ikke så mye til alltid, forandring pleier som regel å fryde uai)Ntt:seydelng var det iallefall:)

chaatak के द्वारा
September 19, 2010

प्रिय पीयूष जी, दुआ कीजिये कि मेरी आमदनी खूब ज्यादा हो जाए फिर मैं भी एक दिन उसी नदी के किनारे वाले पेड़ पर लकड़ी काटने अपनी पत्नी के साथ जाऊं और फिर ………………………… मेरी अंतर्मन की चाहत तो आप समझ ही गए होंगे- (बुरा जो देखन मैं चला …………) अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 19, 2010

    चातक जी…… यकीन मानिये की हर किसी के लिए हमारी ये दुआ है की वो हमेशा खुश रहे……. चाहे वो ख़ुशी उसको कैसे भी मिले…….. कबीरा खड़ा बाज़ार में मांगे सबकी खैर ……… न कहू से दोस्ती न कहू से बैर………. इसको मूल मंत्र मान कर समभाव से लोगों से मिलना मेरी आदत है…….. और यकीनन मैं दुआ करूँगा की आप भाभी जी को लेकर जाएँ और हर बार सच बोल कर आप राजी ख़ुशी तीनो के साथ सुखमय जीवन बिताएं…….. और कभी मेरी किसी बात से बुरा लगे तो भाई समझ कर भूल जाएँ………. आपसी विचार विमर्श में दिमाग चलने चाहिए………… पर दिल दुखने नहीं चाहिए………. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार रहेगा…….. धन्यवाद………

daniel के द्वारा
September 19, 2010

गंभीर विषय को व्यंग के माध्यम से बड़ी ही सहजता पूर्वक प्रस्तुत किया है कितनी भी प्रशंसा की जाए कम ही है !

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 19, 2010

    डेनिएल जी ……….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया………

    Lily के द्वारा
    July 12, 2016

    hola, los pasos me han ayudado bastante no sabes cuanto, tambien lo pude eliminar de mi usb pero al mostrar las carpetas ocultas me encontre con dos archivos mas ke no pude eliminar de nombre kia.ogdzillllvbs dentro de la usb, ke en mi compu no aparecen, me podrias ayudar con eso? GRACIAS!!!

abodhbaalak के द्वारा
September 19, 2010

क्या बात है पियूष जी, लकडहारे की कहानी को बड़े ही नए अंदाज़ में आपने प्रस्तुत किया है, बहुत खूब,

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 19, 2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…………..

    Lorena के द्वारा
    July 12, 2016

    Dear Aunt Lib,We mourn with you the loss of your long time companion. I know it’s been such a long time since we#812&7;ve seen you all. We have many fond memories of visits with you. We think of you each time we use the silverware you gave us for our wedding.


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