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गाँधी ही नहीं शास्त्री जी भी याद किये जाएँ........

Posted On: 1 Oct, 2010 Others में

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एक अहिंसा का पुजारी…. और एक राष्ट्रप्रेम की सच्ची प्रतिमा…….. और दोनों का जन्मदिवस एक साथ …….. ये एक बड़ा सुखद संयोग है.. पर बड़े दुःख का विषय है की इस 2 अक्टूबर के पुरे महापर्व में आदरणीय लाल बहादुर शास्त्री जी कहीं खो से जाते हैं…….

एक छोटे से बच्चे से जब मैंने पूछा की कल क्या है वो बोला गाँधी जी का जन्मदिन तो मैंने उससे कहा की हां बिलकुल सही और कल ही लाल बहादुर शास्त्री जी का भी जन्म दिन है ……. तो उसने कहा वो तो ठीक है पर ये हैं कौन…….. तो मैंने उसको बताया की वो हमारे दुसरे प्रधानमंत्री थे…… तो उसने कहा पर हम प्रधानमंत्री का जन्म दिन थोड़ी मानते हैं………… और हमको तो टीचर ने बताया भी नहीं है…….

अब थोडा बुरा सा लगा….. गाँधी जी और शास्त्री जी की कोई तुलना नहीं है….. पर जितना देश के प्रति प्रेम गाँधी में था उतना ही शास्त्री जी में भी…….. पर जैसा की अक्सर होता है की एक बड़े पेड़ की छाया में छोटा पौंधा कहीं गम हो जाता है………. पर हमने तो एक विराट व्यक्तित्व को ही छुपा दिया……….

यदि शास्त्री जी 2 अक्टूबर की जगह अन्य किसी और दिन पैदा हुए होते तो शायद जय जवान और जय किसान का नारा देने वाले इस महापुरुष को हम किसी दिवस के रूप में मानते……. पर 2 अक्टूबर को हम इस महापुरुष को याद करना भी भूल जाते है……..

मीडिया भी कहीं गलती से जिक्र कर देता है की शास्त्री जी का जन्मदिवस भी है……. अन्यथा स्कूल कॉलेजों में तो शास्त्री जी के शायद चित्र भी न मिल पायें……..शास्त्री जी का केवल 19 महीने का प्रधानमंत्री काल सरगर्मियों से भरा, तेज गतिविधियों का काल था। इस काल के दौरान राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय अहमियत के कई सामाजिक तथा राजनैतिक मसलों ने सिर उठाया, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ एक बड़ा युद्ध भी शामिल है।

राजनीती में संत शब्द की कल्पना को साकार रूप देने वाले शास्त्री जी के जीवन की कई घटनाएँ प्रेरक प्रसंगों में सुनाई जाती है……… बेदाग़ छवि और देश के प्रति अपार प्रेम से भरे शास्त्री जी और गाँधी जी के जन्मदिवस की हार्दिक बधाई………………



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahul के द्वारा
February 5, 2011

पीयूषजी नमस्कार , मैं एक छात्र हूँ. मैंने आपके कुछ लेख पढ़े. बस इतना ही कहूँगा कि दिल से आपकी तारीफ करने को दिल छह रहा है. बहुत समय से इन्टरनेट में मैं ऐसा ही कुछ तलाश कर रहा था. लेकिन आज मैं आपसे कुछ और कहना चाहता हूँ. मैंने आपका एक लेख ‘स्वामी विवेकानंद कि प्रासंगिकता’ और ‘मेरा भारत महान था’ पढा.मैं चाहता हूँ कि आप अन्य पुरूषार्थों कि जीवनी पर ऐसे ही प्रेरणादायी लेख लिखें, जिससे हम नवयुवक प्रेरणा ले सकें. जैसे- अब्दुल कलाम, राजेंद्र प्रसाद, शास्त्रीजी, इंदिरा-गाँधी, भगतसिंह, राजगुरु………मदर टेरेसा, हॉकी के जादूगर ध्यांचाद, पुलेला गोपीचंद, भारतकुमार(अभिनेता मनोज कुमार), गुलशन कुमार, नरेन्द्र मोदी, वगैरह-वगैरह. आप इनकी जीवनी नहीं लिखें बल्कि, इनके बचपन या जीवन के कुछ खास अनछुए पहलुओं को उजागर करें. साथ ही कुछ टॉपिक मैं आपको देना चाहता हूँ…जैसे – सचिन तेंदुलकर बनाम ब्राडमैन, सत्य कि हमेशा जीत होती है- कितना सच. साथ ही इन मुद्दों पर कृपया सिक्के के दूसरे पहलु को उजागर करें– ओपरेशन ब्लूस्टार (अमृतसर), गोधरा-कांड, गुजरात- दंगे २००२, बाबरी-विध्वंस, अयोध्या में राममंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, विदोशों में जमा कला-धन……………………….मैंने ये सारे टॉपिक इसलिए सुझायें हैं क्योंकि मुझे लगा कि शायद ऐसा करके मैं आपके विचारों के दायरों को एक जगह समेटने में कुछ मदद कर सकूँ…….आपके जवाब कि प्रतीक्षा में ……एक नया प्रशंशक व आलोचक …

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 6, 2011

    राहुल जी……. ये बड़ा ही धर्मसंकट खड़ा कर दिया है आपने…… कोशिश कर सकता हूँ……… लिखने की पर इतने गंभीर विषयों पर लेखन एक जटिल कार्य है……… थोड़ी सी चुक अर्थ का अनर्थ कर सकती है……. फिलहाल तो नहीं पर अवकाश मिलने पर अवश्य लिखूंगा………… आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………………….

shaileshasthana के द्वारा
October 3, 2010

पंत जी ठीक लिखा आपने, शास्त्री जी को भी याद किया जाना चाहिए। आपने अपनी बात का उत्तर भी खुद ही दे दिया है। बड़ी लकीर के आगे छोटी लकीर की कीमत कम हो जाती है मगर देश को जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के गौरव शास्त्री जी को भी उसी शिद्दत के साथ याद किया जाना चाहिए।  बधाई।  

    October 29, 2010

    पर हमें इस बात का ख्याल रखना होगा की………. रहीम ने कहा है की रहिमन देख बड़ेन को लघु न दीजिये टारी………… प्रतिक्रिया के लिए बहुत शुक्रिया………..

div81 के द्वारा
October 2, 2010

पियूष जी अच्छे लेख के लिए बधाई स्वीकार करें , ऐसा ही एक प्रेरक प्रसंग है जो हम सभी ने बचपन में सुना था मगर आज बच्चो को ये सब बातें नहीं बताई जाती ये बहत ही दुखद है नाव गंगा के पार खड़ी थी। लगभग सभी यात्री बैठ चुके थे। नाव के बगल में ही एक युवक खड़ा था। नाविक उसे पहचानता था। इसलिए उस दिन भी नाविक ने उससे कहा- खड़े क्यों हो? नाव में आ जाओ। क्या रामनगर नहीं जाना है? युवक बोला- जाना तो है किंतु आज मैं तुम्हारी नाव से नहीं जा सकता। नाविक ने पूछा- क्यों भैया, आज क्या बात हो गई? युवक बोला- आज मेरे पास उतराई देने के लिए पैसे नहीं हैं। नाविक ने कहा- अरे, यह भी कोई बात हुई। आज नहीं तो कल दे देना, किंतु युवक ने सोचा कि मां बड़ी मुश्किल से मेरी पढ़ाई का खर्च जुटाती है। कल भी यदि रुपए की व्यवस्था न हुई तो कहां से दूंगा? उसने नाविक को इंकार कर दिया और अपनी कॉपी-किताबें लेकर छपाक से नदी में कूद गया। नाविक देखता ही रह गया। पूरी गंगा नदी पार कर युवक रामनगर पहुंचा। वहां तट पर कपड़े निचोड़कर भीगी अवस्था में ही घर पहुंचा। मां रामदुलारी बेटे को इस दशा में देख चिंतित हो उठी। कारण पूछने पर सारी बात बताकर युवक बोला- तुम्हीं बताओ मां, अपनी मजबूरी मल्लाह के सिर पर क्यों ढोना? वह बेचारा खुद गरीब आदमी है। बिना उतराई दिए उसकी नाव में बैठना उचित नहीं था। इसलिए गंगा पार करके आ गया। मां ने पुत्र को सीने से लगाते हुए कहा- बेटा! तू एक दिन जरूर बड़ा आदमी बनेगा। वह युवक लालबहादुर शास्त्री थे, जो भविष्य में देश के प्रधानमंत्री बने और मात्र अठारह माह में देश को प्रगति की राह दिखा दी। वस्तुत: ईमानदारी महान गुण है। जो व्यक्ति अपने विचार और आचरण में नैतिक सिद्धांतों के प्रति ईमानदार रहता है वही सही अर्थो में बड़ा बनता है।

    October 29, 2010

    इस प्रेरक प्रसंग को प्रस्तुत करने के लिए शुक्रिया……….. ऐसे न जाने कितने और प्रसंग हैं…….. जो शास्त्री जी को महानतम सिद्ध करते हैं…………..

seema के द्वारा
October 2, 2010

नमस्कार पीयूष जी , आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ , आपनें सत्य कहा हमें शास्त्री जी का जन्मदिन भी उतनी ही श्रधा और उत्साह से मनाना चाहिए जितना गांधी जी का | आपको भी गांधी जी और शास्त्री जी के जन्मदिन की बधाई | संयोग से आज हमारा भी जन्मदिन है —)

    October 29, 2010

    प्रथम बार आगमन पर आपका धन्यवाद ………. आशा है की आगे भी ये क्रम जारी रहे…….. जन्मदिन की हार्दिक बधाइयाँ………देरी के लिए क्षमा ………..

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
October 2, 2010

प्रिय पियूष जी ! आपको और समस्त देश्वशिव्यों को मेरी तरफ से २ महापुरुषों, महात्मा गाँधी, और लालबहादुर शास्त्री जी के जन्दिवास की हार्दिक बधाई ……

rita singh 'sarjana' के द्वारा
October 2, 2010

पियूष जी , आपने सही लिखा गांधीजी का जन्मदिन तो सबको याद रहता हैं l परन्तु पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शाश्त्री जी का जन्मदिवस तो कई-कईयों को पता भी नहीं रहता l जबकि वे देश के एकमात्र प्रधानमंत्री है जो बिना स्वार्थ के देश के लिए जिया है l दोनों महापुरुषों को उनके जन्मदिन पर मेरा भी आपको हार्दिक बधाई l

    October 29, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………..

    Kamren के द्वारा
    July 12, 2016

    Oh my gosh! I can’t get enough Trader Jo!e7821#;s&! I think there prices are pretty competitive too! Matter in fact I need to get moving and head there this morning!!

आर.एन. शाही के द्वारा
October 1, 2010

आपके सुन्दर विचार पर मुझे उस पुराने गाने की याद आ रही है, जिसका यहां उद्धरण ही सही प्रतिक्रिया होगी पियूष जी — आज है दो अक्टूबर का दिन, आज का दिन है बड़ा महान, आज के दिन दो फ़ूल खिले थे, जिनसे महका हिन्दुस्तान, एक का नारा अमन, एक का जय जवान-जय किसान ! !

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    आदरणीय शाही जी वास्तव में इन पंक्तियों में दो अक्टूबर का बड़ा खुबसूरत वर्णन है………. आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ………..

Dharmesh Tiwari के द्वारा
October 1, 2010

नमस्कार पियूष जी,आपने इस लेख के द्वारा बिलकुल एक अछि चीज पर प्रकाश डाला है मेरे तरफ से भी इन दोनों महा पुरुषों को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई और साथ ही इस जबरदस्त लेख को भी

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    धर्मेश तिवारी जी………. आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

s.p.singh के द्वारा
October 1, 2010

पियूष जी, आपका सवाल बिलकुल वाजिब है मैं यहां यह और जोड़ना चाहता हूँ —— शास्त्री जी का कार्यकाल तो बहुत ही थोडा था परन्तु उनकी वाणी में बहुत ओज था मैं यहां यह बताना चाहूँगा कि उनके कार्य काल में जब विश्व खाद्य संगठन के द्वारा यह कहा गया कि भारत में गेहुं कि पैदावार बहुत कम हो जायगी तथा अकाल जैसी स्तिथि हो जायगी उस समय शास्त्री जी ने एक आह्वान किया था भारतीय जानता से कि व सप्ताह में केवल एक बार सोमवार को केवल गेहूं से बने पदार्थ न खायं उसका इतना व्यापक असर हुआ था कि किसी भी होटल में भी गेहूं से बनी रोटी या अन्य वस्तु नहीं मिलती थी यह उनकी वाणी का ही ओज था जिसे सभी ने मन से स्वीकार किया था और इस विषय में इतिहास गवाह है कि गेहूं के विषय हम आत्म-निर्भर हो गए हैं | इसी प्रकार से उनकी वाणी का ही असर था कि १९६५ में हमारे सैनिकों ने पाकिस्तान को कैसा सबक सिखाया था | अत शास्त्री जी के जन्म दिन को व्यापक स्तर पर मानाने के लिए सरकार को व्यस्था करनी चाहिए ……………

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    S.P. Singh जी माफ़ी चाहूँगा मगर जिसे आप वाणी का ओज कह रहे हैं…………….. मैं उसको उनकी राजनैतिक ईमानदारी का प्रभाव कहूँगा……… वास्तव मैं उनकी कोई भी अपील तुरंत जनता द्वारा मान ली जाती थी…….. क्योकि लोग जानते थे की अगर वो ऐसा कह रहे है तो वो इसका खुद भी पूरी श्रद्धा से पालन कर रहे होंगे…….. ये उनकी राजनैतिक ईमानदारी ही थी की जिसने उन्हें गाँधी की तरह एक युगपुरुष की श्रेणी में खड़ा कर दिया……….. आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………….

rajkamal के द्वारा
October 1, 2010

पियूष भाई …. आप ने हर बार कोई ना कोई सार्थक मुद्दा उठा कर .. या फिर कोई सन्देश देकर अपनी अहम उपयोगिता दरशाई है … लगे रहो मुन्ना भाई …

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    आपको भी मेरी तरह इन मुद्दों की सार्थकता का बोध है ………….. ये जान कर ख़ुशी हुई….. आपकी उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया राजकमल भाई……….

    Ivalene के द्वारा
    July 12, 2016

    Also, I have to add something. Why do so many people play Kinect under fans? It’s like EVERY video I see someone hits a fan. Do all these people playing Kinect never go online and see videos of people hitting fans? Maybe Microsoft should do a segment just on Kinect fail videos as a safety feeturatte.

nishamittal के द्वारा
October 1, 2010

सत्य कहा पीयूष जी,शास्त्री जी वास्तविक रूप में संत थे,परन्तु हमारा दुर्भाग्य कि चंद जन ही उनको स्मरण करते हैं.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    चलिए आप और हम सब लोग कोशिश करें तो शायद धीरे धीरे सब को ये बातें याद आ जाएँ…..


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