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एक मुलाक़ात टाइगर से.

Posted On: 5 Oct, 2010 Others में

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आज कल एक मुद्दा बड़ी जोर से चल रहा है और वो है Save Tigers ……. टाइगर को बचने की मुहीम …… कई लोग व संगठन आंदोलित है ………. महेंद्र सिंह धोनी उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट के ब्रांड एम्बेसडर बने है…… पर लोग जानते नहीं की उसे बचाना क्यों है… कई लोगों के मन में प्रश्न है की क्यों बचाएं…. वो कभी भी आदमी को खा सकता है….. अपनी जान लेने वाले जीव को बचाना क्यों………..

ऐसा लोग समझते हैं क्योकि वो Tiger को समझते नहीं है…….. इस जीव की प्रवृति से लोग अनभिज्ञ हैं………. इस लेख के माध्यम से में लोगों को उस Tiger के असली स्वरुप से रूबरु करवाना चाहता हु………..

tiger

इस जानवर से मेरा परिचय मेरे जिज्ञासु स्वभाव के कारण हुआ……. हमारे जिले में जिम कार्बेट नेशनल पार्क है…….. इस का नाम प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट के नाम पर पड़ा ………. जब मैंने ये पढ़ा तो लगा………. ये तो विरोधाभास है………. एक शिकारी के नाम पर पार्क का नाम………. क्योँ……… फिर मैंने जिम कॉर्बेट के बारे में पढ़ा ………. उनकी किताबें .. जंगल लोर…….. मैन ईटर ऑफ़ कुमाऊ……….. मैन ईटर ऑफ़ रुद्रप्रयाग……… आदि को पढ़ा…….. तब जाना की Tigar का शिकार जिम कॉर्बेट ने कभी शौक के लिए नहीं किया…… उन्होंने इस जीव को तब मारा जब की ये पूरी तरह से नरभक्षी हो गया था………

वो वास्तव में इस जीव से बहुत प्रभावित थे….. जिम कॉर्बेट ने ही Tiger का सारे गुण धर्मों का पता लगाया……… उन्होंने बहुत करीब से इस जानवर को जाना………… किन परिस्थितियों में ये नर भक्षी होता है……. उन्होंने बताया…………… जो मैंने जाना वो कुछ यूँ है………..
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Tiger फुर्ती, चालाकी, जुझारूपन और आत्मबल का जीता जागता उदहारण है….. ये इंसान का शत्रु नहीं है……….. बल्कि कहा जाये तो ये जानवरों का भी शत्रु नहीं है…… इसकी एक खूबी इसे इंसान से भी कही आगे खड़ा कर देती है…. और वो है पेट भरा होने पर इसका जीवो का न मरना ……… इंसान हर अवस्था में संग्रह करने की सोचता है….. इसके लिए वो किसी को भी मार सकता है… किसी के भी साथ बेमानी कर सकता है………. पर ये जीव अगर पेट भरा है तो पास खड़े जीव को भी नहीं मारता………..

ये हमारे भीतर भ्रम है की ये इंसान को मरता है……….. लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है……. आज तक किसी भी जीव को इंसान का मांस पसंद नहीं आया है. आखिर कैसे इंसान का मांस स्वादिष्ट हो सकता है…. जो जीव शराब का सेवन करे…. जिसके फेफड़े बीडी सिगरेट के धुऐं से भरे हों……… जिसका खान पान विचित्र हो…….. उसके मांस में स्वाद कहा से आएगा…………जानवरों को मांस पसंद आता है अन्य जानवरों का जो हरी घास पर जिन्दा हैं. जिनके खाने में ना जाने कितने प्रकार की जड़ी बूटियां मिली होती हैं…….. उन जीवों का मांस जानवर खाना पसंद करते हैं.

Tiger अगर आदमखोर बनता है तो उसके कुछ कारण हैं! और वो कारण कई हैं जैसे……..
जब Tiger बुढ़ा हो जाता है. और शिकार करने को छोटे जीव जंगल में उपलब्ध नहीं होते हैं तो वो सबसे आसान शिकार आदमी को पकडता है….. क्योकि उसको मरने में ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ता है……. या
दूसरा कारन ये है की Tiger के पंजे या दांत टूट गए हों………. क्योकि तब वो शिकार को सही से नहीं पकड़ पता…..या उसके कही कोई चोट लग जाये जो उसको शिकार करने में बाधा बने…….. यानी अगर कोई भी शारीरिक अक्षमता उसमे आ जाये तो वो नरभक्षी हो सकता है……… फिर भी कई बार Tiger स्वस्थ होते हुए भी किसी इंसान को जो जंगल में हो को मार देता है……

अक्सर सुनाई देता है… की कोई महिला जंगल में घास काटने गयी और उसे बाघ ने मार दिया, इस के पीछे एक सीधा सा कारन ये है के जब कोई महिला या पुरुष चाहे वो घास काटने के लिए या शोच करने के लिए बैठा हो तो वो झुके होने के कारण चौपाये होने का आभास कराता है. और तब बाघ उस पर हमला कर देता है……….. अन्यथा वो इनसान से दूर रहना ही पसंद करता है…. क्योकि इंसान सभी जीवों के बीच अपने रहन सहन के कारण कौतुहल का विषय बना रहता है…….

क्योंकि सभी जीव आग से डरते हैं और इंसान का जीवन पूरी तरह आग (उजाले चाहे वो बिजली का हो या आग से की गयी रोशनी) से घिरा है. जंगलों में मुह में बीडी, सिगरेट दबाये मनुष्य को देख कर ये चकित हो जाते है की जो आदमी आग को मुह पर रख घूम रहा हो वो कितना खतरनाक होगा………….

ron-kimball-white-tiger-sitting

तो निश्चिंत हो कर आप इस जीव को बचने का प्रयास कर सकते हैं………… हम ही इस के लिए खतरा हैं ये हमारे लिए नहीं………… कई बार लोग कहते है की ये हमारे इलाकों में आने लगा है……… ऐसा नहीं है…….. हम ही इसके इलाकों में घुसपैठ कर रहे है……..

तो सब कुछ जान कर कहें SAVE TIGER ……….



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