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असफल होते विवाह कारण क्या हैं..............

Posted On: 30 Oct, 2010 Others में

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अभी कुछ देर पूर्व एक बहुत उत्कृष्ट लेख पढ़ा रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो. (इस पर क्लिक करके आप भी उसे पढ़ सकते हैं…….)………… जो काफी कुछ सोचने को मजबूर करता था…… समाज के भीतर हो रहे एक बदलाव की और जिसपर हमलोगों की नज़र होते हुए भी नहीं है…….. की आखिर क्या कारण हैं की हमारे समाज में विवाह (चाहे वो प्रेम विवाह हो अथवा परिवार के द्वारा करवाया गया.) के स्थायीत्व पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं?……….. को इस लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया गया………… इस लेख को पढ़ कर मैंने इस विषय पर प्रतिक्रिया देने से पूर्व बहुत सोचा……पर इतनी लम्बी प्रतिक्रिया बनी की उसको एक लेख में ही परिवर्तित कर दिया………… इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए सोचते हुए………..

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एक छोटी सी घटना मुझे याद आ गयी और उत्तर मुझे मिल गया……. कुछ समय पूर्व मेरे एक मित्र का विवाह तय हुआ………… उनकी और वो लड़की जिसके साथ उनका विवाह होना तय था के बीच मोबाईल पर बातचीत होती रहती……….. अक्सर हमारे वो मित्र हमारे पास आते और हमें कहते की यार आज तुम्हारी भाभी जी हमसे नाराज हैं………… क्युकी कल उनसे बात नहीं कर पाए………. फिर मैं कहता की भाई तेरा भविष्य मुझे अंधकारमय नजर आ रहा है…….. जब आगाज ये है तो बाद में क्या होगा……….

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और फिर जब ये लेख पढ़ा तो इस बात पर मैंने मनन किया………..की आखिर पूर्व में जनम जनम का साथ कही जाने वाली शादियाँ क्यों दिनों में ही ख़त्म होने लगी हैं…….. तो जो एक उत्तर निकला वो कुछ यूँ है… पर इस उत्तर को पढने से पूर्व ध्यान रखें की ये मेरा निजी उत्तर है………… आपका उत्तर कुछ अलग हो सकता है….. आपके अनुभव अलग हो सकते हैं……….. तो इस उत्तर को व्यक्तिगत उत्तर मान कर पढ़ा जाये……………….

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वास्तव में पूर्व में शादियाँ माता पिता की रजामंदी से होती थी………. और उनकी ही पसंद पर हुआ करती थी………. लड़का लड़की पहली बार मंडप पर ही एक दुसरे से मिलते थे……… फिर शादी के बाद कुछ साल वो एक दुसरे को समझने में लगा देते…….. और फिर उनको एक दुसरे की अच्छाइयाँ और बुराइयाँ पता चलती…………और वो उनके अनुरूप हो जाते………. फिर बाकि दोनों को बंधे रखने का काम बच्चे कर देते…………

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पर अब शादी तय होने के साथ से ही लड़के और लड़की के बीच बातचीत का जो सिलसिला शुरू होता है तो वो शादी के पहले ही एक दुसरे के बारे में सबकुछ स्पष्ट कर देता है……… आगे जानने के लिए कुछ बचता नहीं…………… कोई रोमांच नहीं रहता……… फिर दूर दूर रहकर बात करने के आदि जब साथ साथ रहने लगते हैं तो……….तो बड़ी जल्दी उनको एक दुसरे की छोटी सी बात बुरी लग जाती हैं……….. लड़का अब पहले की तरह मानाने की कोई कोशिश नहीं करता……… पर लड़की रूठ कर बैठी रहती हैं…………. ये सोच कर की वो पहले की तरह उसे मनायेगा………… और लड़का सोचता है की अब तो ये रोज का ही ड्रामा है……. कितना मनाएं………….

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प्रेम विवाह का हाल तो और बुरा है…….. अक्सर प्रेम विवाह से पूर्व लड़का और लड़की एक दुसरे से अपनी बातें छुपाते हैं………. लड़का कहता है की ये सुनकर वो बुरा न मान जाये की मैं सिगरेट पीता हूँ… या ये करता हूँ…….. या वो करता हूँ…. ऐसे कई चीज़े छुपता है….. और कारण पूछने पर कहता है की ….. मैं उसे खोना नहीं चाहता……..और वक्त आने पर उसको पता चल जायेगा……….. और न जाने क्या क्या……….. उन दिनों लड़का सारे काम छोड़ कर लड़की से मिलने जाता है………. और फिर जब शादी हो जाती है तो जिम्मेदारी के कारण जब लड़का कामकाज की और ज्यादा ध्यान देता है तो लड़की उसको अब पहले जैसा न होने का ताना देती है…………. की पहले तो सुबह 5 बजे ही आ जाते थे…… कोचिंग के सामने खड़े होने…….अब क्या हुआ……… पहले तीन तीन चक्कर मेरे घर के लगाते थे……….. अब घर में तीन घंटे नहीं बिताते………… और भी बहुत …….

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पुरानी शादियों की विशेषता यही रही…. की लड़के के लिए लड़की एक रहस्य ……….. और लड़की के लिए लड़का……….. दोनों भ्रम में की न जाने वो जिसके साथ उन्होंने पूरा जीवन बिताना है वो कैसा होगा…………. इंसान अक्सर ऐसे हालातों में बुरे से बुरे की कल्पना कर लेता है………. . ऐसे ही लड़की अपने पति के प्रति सभी कुछ सोच लेती है ….. की शायद ऐसा हो ………. या वैसा हो………..फिर जब उसको थोडा सा भी कुछ सही मिले तो वो खुश हो जाता है…..
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फिर विवाहोपरांत धीरे धीरे जब वो एक दुसरे को जानने लगते हैं तो उनके बीच प्रेमी प्रेमिका का भाव पैदा होता है……….. अब पत्नी रूठ जाती है…….. और पति मनाता है………… और पत्नी भी पति को शिकायत का कोई मौका नहीं देती………. वो पुरे परिवार को साथ लेकर चलती है…….. क्योकि वो जानती है की उसकी इस घर में उपस्तिथि परिवार के उन लोगो ने कारण ही है………..
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और परिवार को संतुष्ट देख कर लड़के का भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम भाव बढ़ता है……… तो मेरे ख्याल से विवाह से पूर्व लड़के और लड़की के बीच एक दुसरे को समझने का भाव इस मधुर सम्बन्ध को कमजोर कर रहा है…….. वो एक दुसरे को जाने का रोमांच पहले ही ख़तम हो जा रहा है………….. और आपस में पहले ही उनके बीच इतनी बातें होने लगी हैं की शादी के दुसरे ही दिन झगडा करने में भी उनको कोई संकोच नहीं होता……….
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बाकी ये मेरी निजी राय है………….. और उस क्षेत्र पर है जिसका मुझे कोई अनुभव नहीं है………… इस लिए इस पर ज्यादा ध्यान न दें………. इसके गलत होने की आशंका अधिक है…………. केवल सोचें की कही ये सच तो नहीं है………….

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 1, 2010

श्री पियूष जी, आपकी बातों से मै इकदम इत्तेफाक रखता हूँ और मै भी अपनी ज़िन्दगी में परिवार वालों के द्वारा की गयी शादी को ही महत्व देना चाहता हूँ…. आकाश तिवारी http://aakashtiwaary.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 2, 2010

    आकाश भाई …… आप जरूर अपनी ज़िन्दगी में परिवार वालों के द्वारा की गयी शादी को ही महत्व दे…. क्योकि उनसे बेहतर आपको कोई जनता ही नहीं तो उनसे बेहतर आपका कोई नहीं कर सकता ……. कई बार हम भी अपने बारे में उतना नहीं जानते जितना की हमारे परिवार वाले…… प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…………..

Ramesh bajpai के द्वारा
October 31, 2010

प्रिय पियूष जी आपको मेल नहीं कर पाया इस लिए खेद है . वजह आप समझ सकते है पोस्ट व दीपावली की शुभ कामनाये साथ ही दे रहा हु .

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 1, 2010

    आदरणीय बाजपाई जी ……. आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं………

Alka Gupta के द्वारा
October 30, 2010

  पियूष जी, जो भी विश्लेषण करकेआपने लिखा है मुझे बहुत कुछ सच्चाई ही प्रतीत हो रही है ।आज की परिस्थितियों के अनुसार विवाह के पश्चात  यथार्थता के धरातल  पर आते ही दोनों के अहम् टकराते है और स्थिति में बदलाव आने लगता है और फिर  तो……।इस  क्षेत्र में अनुभव न होने पर भी कुछ सीमा तक सत्यता बयां कर दी है।

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 1, 2010

    आपने भी भले ही कुछ सीमा तक पर इसमें सत्यता देखी …………. इसके लिए आपका आभार ………. आपकी मूल्यवान प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

आर.एन. शाही के द्वारा
October 30, 2010

पियूष जी अनुभव न रखते हुए भी आपके आकलन में आंशिक सच्चाई है । पूर्ण इसलिये नहीं कह सकता कि और भी सच्चाइयां हैं, जो आज की परिस्थितियों की कोख से पैदा हो रही हैं । बड़ी कठोर सच्चाइयां हैं, जिनमें से कुछ का तो जिक्र तक नहीं किया जा सकता । लेकिन आपके बताए मनोभाव भी प्रकारांतर से अहं के टकराव के दायरे में ही आते हैं, जो टूटन का सबसे बड़ा कारण है । साधुवाद ।

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 1, 2010

    आदरणीय शाही जी………. जैसा की आप समझे भी है और मैं ऊपर कह भी चूका हूँ की ये मेरा अनुभव निजी नहीं है………. क्योकि विवाह के सम्बन्ध में मैं अनुभव हीन हूँ……….. आपका विचार निसंदेह सच्चाई के निकट होगा……….. पर आपने इस विचार में आंशिक सच्चाई स्वीकारी तो लेख की सार्थकता बढ़ गयी……….. आपकी मूल्यवान प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

Manish Singh "गमेदिल" के द्वारा
October 30, 2010

पियूष जी बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है……………… जिस पर हम युवाओं को ना केवल मनन करना है बल्कि उस पर अमल करना होगा………. सटीक विश्लेषण ……………… http://manishgumedil.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 1, 2010

    मनीष जी ……… सही कहा आपनी इस विषय पर हम युवाओं को मनन करना ही होगा…… प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

abodhbaalak के द्वारा
October 30, 2010

पियूष जी, बहुत ही सटीक विषलेषण किया है आपने, और मै आपके इस लेख से पूरी तरह से सहमत हूँ , यही कारण है की आज भी अरंजेड मैरजे के मुकाबले में लव मैरजे में अधिक तलक नज़र आता है सराहनीय लेख के लिए बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 1, 2010

    मित्र सम विचार रखने के लिए शुक्रिया……………….

rita singh 'sarjana' के द्वारा
October 30, 2010

पियूष जी , आपने बहुत अच्छे ढंग से अपना विचार व्यक्त किया हैं l जो बिलकुल सही हैं l क्योंकि शादी के बाद कोई रहस्य बाकि नहीं बचा रहता जिसके कारण अक्सर विवाह असफल होते देखा गया हैं l मगर कई बाते ऐसी भी होती हैं जो व्यक्ति -व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता हैं l कई समझदार जोड़े भी हैं जो हालत अनुसार स्वयं को बदल कर बेहतर जिंदगी जी रहे हैं l पर इसकी तादात बहुत कम हैं l ऐसी बात नहीं कि परिवार द्वारा देखे गए सभी रिश्ते शत -प्रतिशत सही होते हैं l मेरी बचपन की सहेली की अरेंज मेरिज हुई थी ,परन्तु दोनों में अलगाव होने के कारण अलग हो गए हैं l पति-पत्नी में मनमुटाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं बच्चे जो चिंता का विषय है l

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 1, 2010

    सही कहा आपने की अहम कही पर भी आड़े आ सकता है,,,,,,,,,, इस लिए कई बार अरेंज मेरिज भी असफल हो जाती हैं…….. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….

    Darnesha के द्वारा
    July 12, 2016

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div81 के द्वारा
October 30, 2010

पियूष जी, अति किसी बी बात की बुरी होती है | आज कल जिस तरह से लड़का लड़की का मिलना फ़ोन पर बात करना है वो अति से कुछ ऊपर ही है | और जब संबंधो में नया रंग ही नहीं होगा तो बोरियत तो होगी और और रिश्तो में दरार आना स्वाभिक ही है | अच्छा लेख……….. बधाई

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 31, 2010

    वास्तव में सम्बन्ध में उब ही इनके समाप्त होने का कारण है…….. और पहले की अति बाद में कलह का कारण बन जाती है…………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………..

ashvinikumar के द्वारा
October 30, 2010

प्रिय मित्र बहुत अच्छी तरह से विश्लेष्ण किया है ,,लड़का लडकी दोनों एक दुसरे से अपनी कमियां छुपाते हैं फिर बाद में पछताते हैं और सम्बन्ध या तो टूट जाता है या दोनों किसी मजबूरी में एक ही छत के नीचे अजनबियों की तरह जिन्दगी गुजार देते हैं|

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 31, 2010

    सही कहा आपने……… वास्तव में जिन रिश्तों की बुनियाद झूट पर टिकी होती है वो ज्यादा लम्बे समय तक टिक नहीं पाते………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………..

s.p.singh के द्वारा
October 30, 2010

प्रिय पियूष जी, आपने निशा मित्तल जी के लेख के विषय में टिपण्णी स्वरूप जो पोस्ट दी है वास्तव आपके विचारों की मैं प्रसंसा करता हूँ इस विषय में मेरा भी शतप्रतिशत यही मत है | आज के सन्दर्भ में भी जो विवाह माता-पिता या पारिवारिक जानो द्वारा तय किये जाते हैं उनमे अलगाव या टूट की संभावना कम ही होती है कारण आपने स्पस्ट कर ही दिए है, धन्यवाद |

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 31, 2010

    सिंह साहब आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया………….


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