परिवर्तन की ओर.......

बदलें खुद को....... और समाज को.......

117 Posts

24194 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1372 postid : 861

सिगरेट पीने से फायदा...........

Posted On: 21 Nov, 2010 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ये एक बहुत आम दृश्य है …….. की आप छोटे-छोटे 15 16 साल के लड़कों को मुंह मे सिगरेट दबाये………. धुवा उड़ते देख सकते हैं…….. मैं जानना चाहता था की आखिर ऐसा क्यों हैं…………… तो एक मित्र से जो की सिगरेट पीने का शौकीन था…….. से इस विषय पर बात हुई …. मैंने उसको पूछा की तू सिगरेट क्यों पीता है……. तो वो बोला की बस यूं ही….. तो मैंने उसको पूछा की तो छोड़ क्यों नहीं देता इस गंदी आदत को……….. तो वो बोला की यार ये बता इसमे बुराई क्या है…………

.

तो मैंने कहा की तू ही बता दे की अच्छाई क्या है……… तो वो बोला…. इअका बहुत फायदा है….. तो जो मैंने फायदा सुना वो आप भी सुनें ………….
.
यार ये तो मै इस लिए पीता हूँ की मुझे योगा अच्छा लगता हैं……….. ओर मैं राम देव जी का फैन हूँ………. तो मैंने कहा की वही बाबा जी तो इस के लिए मना करते हैं…….. तो ये छोड़ कर उनके योग क्यों नहीं करता ……….. तो वो बोला की पंत जी ये तो प्राणायाम की ही एक विधि है…… मैने कहा की प्राणायाम मे सिगरेट कहा से आ गयी………. तो वो बोला अच्छा बता की वो क्या कहते हैं …………. यही ना की सांस अंदर लो फिर सांस बाहर छोड़ो………..

.

तो मैं वो ही तो करता हूँ……….. साँस (सिगरेट का कश) पहले अंदर लेता हूँ………… फिर बाहर छोड़ता हूँ………. इस तरह एक तो लत मिट जाती है और दूजा काम योग भी हो जाता है……….. तो मैंने कहा जिसे तू सांस कह रहा है वो तो जहरीला धुवा है…….. तो वो बोला ओर जो तुम लेते हो वो कौनसा शुद्ध हवा है…………फिर वो थोडा गंभीर होते हुए बोला की यार मैं इसको छोड़ना तो चाहता हूँ पर ये छुट नहीं पाती……….

.

फिर मैंने उसको कहा की तू इसको छोडना चाहता है तो एक तरीका है………. एक कहानी है उसको नकल करके देख शायद तेरा काम हो जाए………….

.

ओर मैंने उसको ये कहानी सुनाई………….की

.

एक बार कुछ लोग एक जहाज से जा रहे थे……… ओर जहाज किसी वीरान जगह पर फंस गया……….. जहाज मे पड़ा राशन कुछ दिनों मे ही खत्म हो गया……. पर एक बड़ी अजीब घटना घटी….. वहाँ कुछ लोग ऐसे थे की जिनको खाने पीने का कोई मतलब नहीं उनको बैचनी थी तो सिगरेट की ……… जब उनको सिगरेट पीने को नहीं मिली तो वो लोग पाल से बंधी रस्सियाँ जला जला कर पीने लगे……… हालांकि कैप्टन ने बहुत समझाया की अगर पाल की रस्सियाँ जला दी गयी तो जहाज चलेगा कैसे………. पर लोगों ने कहा की अब जो होता है हो जाए पर हम बिना सिगरेट के नहीं रह सकते……..

.

आखिरकार किसी तरह सभी लोग वापस अपने मंजिल पर पहुच गए……. अब जब ये जहाज पहुँच गया तो इसके संबंध मे अखबारों मे भी काफी खबरें छपी………. अखबार पढ़ते हुए इक आदमी ने जब ये खबर पढ़ी तो उस समय वो सिगरेट पी गया ….. उसको ये बात बड़ी अजीब लगी की लोग गंदी गंदी रस्सियाँ जला कर पी गए इस सिगरेट की लत के चलते……… वो आदमी खुद चेन स्मोकर था……….. उसने सोचा अगर मैं भी वहाँ होता तो क्या मैं भी वो गंदी रस्सियाँ जला जला कर पीता………. एक पल के लिए उसको ये ख्याल आया….. ओर उसने आधी पी हुई अपनी सिगरेट ऐशट्रे पर रख दी…… ओर खुद से कहा की अब इस सिगरेट को
.
तभी उठाऊंगा…… जब मुझे लगे की अब मैं गंदी रस्सियाँ भी जला कर पी सकता हूँ……….
20 साल गुजर गए……… ओर वो सिगरेट वहीं पड़ी रही…. वो उसको उठाकर फेंकता भी नहीं था….. लोग पूछते की ऐसा क्यों …… तो वो कहता की अब मैं इसे उसी दिन उठाऊँगा जब की मुझे ये लगे की आदत बड़ी ओर मैं छोटा हो जाऊंगा………… पर वो आती नहीं है………… मैं महसूस करना चाहता हूँ की आखिर क्यो ओर किन परिस्थितियों मे उन लोगों को रस्सियाँ जला कर पीनी पड़ी…….

.

पर वो घड़ी आई ही नहीं…… फिर उसने कहा की मैंने कई बार सिगरेट को छोड़ा पर कभी भी नहीं छोड़ पाया……… दो तीन दिन तक तो छोड़ देता पर फिर शुरू हो जाता… पर इस बार छोड़ा भी नहीं………. ख्याल पीने का ही है फिर भी नहीं पी पा रहा हूँ…….. समझ नहीं आता की की इसका क्या कारण है……..

.

अब मित्र बोला की मेरी समझ मे आ गया की उसने क्यों छोड़ी सिगरेट ……..? मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ……क्योकि जिसने छोड़ी वो नही समझ सका ओर कोई ओर समझ गया……… कैसे…….? तो वो बोला । उसने पीने का इंतज़ार किया तो उसके दिमाग मे से सिगरेट की जगह रस्सी की याद बस गयी उसको लगा की वो रस्सी कैसे पिये…….?

.

तो मैंने पूछा की तो क्या तू भी छोड़ सकता है……. सिगरेट ऐसे है………… वो बोला हाँ क्यों नहीं…………. ले आज से ही………. ओर अब मैं भी तब ही सिगरेट पीने की बात करूंगा जब मुझे लगे की मैं गंदी रस्सी का धुवा पीना चाहता हूँ………… मैंने कहा चलो ये सही है कम से कम एक मित्र राह पर तो आया……… फिर शाम को वो मिला …….ओर बोला की यार पंत जी……. एक गंदी रस्सी का इंतजाम करना है…………….

………………….

ओर मैं समझ गया की उसका सारा ज्ञान सिगरेट ने खत्म कर दिया है………….

आप सभी से अनुरोध है की किसी भी आदत को अपने से बड़ा न होने दो …………. आदत कभी भी अच्छी या बुरी नहीं होती आदत सिर्फ आदत होती है……….ओर वो आदमी को छोटा कर देती है………….

…………………….

इस घटना का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है…….व सभी घटनाएँ काल्पनिक हैं…….

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (16 votes, average: 4.31 out of 5)
Loading ... Loading ...

568 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Babloo Borker के द्वारा
January 4, 2011

pyiush ji aap ki lekh kafi prabhavsali hai. is lekh ko padkar main to apni is gandi adat ko jarur quite karuna aur dusro ko bhi quite karne ki salah dunga.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 7, 2011

    आप अपने इरादे मे सफल हों……………….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….

brijesh pandey के द्वारा
December 17, 2010

parvane ki takdeer me likha hai jalna ai sama tughe bar bar chilman ka khyal kyu aata hai………………………………….nice article….but we are idiots,,,

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 4, 2011

    thanks for your comment……..

NK Thakur के द्वारा
December 8, 2010

इस घटना का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है ..सब कुछ काल्पनिक है /

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    December 26, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया..

ALOK SINGH के द्वारा
December 4, 2010

हमें वो राह सुझाते हैं हजरते रहवर ….जिन्हें उस राह पे चलते नहीं देखा

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    December 26, 2010

    आपको भी यही राय है की ऐसी राय किसी को देने से पहले खुद को इन आदतों से दूर कर लें…….. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

J. L. SINGH के द्वारा
December 1, 2010

मैंने कोशिश की है आपके लेख को अपने चेन स्मोकर मित्रों तक पहुंचाने की. देखें क्या फायदा नजर आता है.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    December 26, 2010

    आशा है की वो समझ जाएँ की कोई भी आदत इंसान से बड़ी नहीं होनी चाहिए…….. नहीं तो कमजोर आदत नहीं आदमी है…… आपका प्रयास सफल हो इसी उम्मीद के साथ ………

November 23, 2010

पियूष जी आप के लेख अधिकतर सामाजिक मुद्दों के ऊपर होते हैं ये बड़ी अच्छी बात है और इसके लिए आपको बधाई.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 23, 2010

    रतुड़ी जी………. हम इस समाज से बंधे हुए हैं……….. ओर इस समाज के प्रति हमारा कुछ दायित्व भी है…….. बस उसी की पूर्ति के लिए सामाजिक विषयों को उठाते रहते हैं…….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

rita singh 'sarjana' के द्वारा
November 23, 2010

पियूष जी , आपने बहुत ही अच्छा लेख लिखा है l सिगरेट की धुवा न केवल क्षतिकारक हैं बल्कि इस लत से सेहत ख़राब होता ही है और सामने वालो को भी क्षति पहुंचाते हैं l बधाई स्वीकार करे

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 23, 2010

    रीता जी…….. सबसे दुखद पहलू यही है की इसका अधिकतर नुकसान वो लोग उठा रहे हैं ……….. जो इसको छूटे ही नहीं……….. वो तो दूसरे की पी हुई सिगरेट के धुंवे को पी कर मर रहे हैं……………. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

priyasingh के द्वारा
November 23, 2010

मेरे आस पास तो कोई इस लत का आदि नही है पर आपने कहानी अछी सुनाई अब मन कर रहा है की कोई मिले सिगरेट पिने वाला तो मै भी लगे हाथ उसे कहानी सूना ही डालू……………………… अभी तक जो भी कोई मिलता था उसे नो स्मोकिंग फिल्म देखने की सलाह दे डालती थी और बाकायदा उस फिल्म का गूढ़ अर्थ भी समझाती थी …… अब आपकी कहानी सुनाऊँगी ………….धन्यवाद……………

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 23, 2010

    ये जान कर खुशी हुई की लोग स्मोकिंग करने वालों को सुधारने का जोखिम उठा रहे हैं…………. नहीं तो अधिकतर तो ये लोग ही भले लोगों को भी अपनी तरह स्मोकर बना देते हैं……….. आप अपने पुनीत प्रयास मे सफल हों………….. यही कामना है………… ओर आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 23, 2010

श्री पियूष जी, जब तक स्वयं ही दृढसंकल्पित नहीं होते कुछ भी नहीं हो सकता और तो और नशेड़ियों का तो कोई ईमान धरम होता ही नहीं..आप चाहे जितना समझाओ घूम फिर के वही करेंगे जिसमे उनको आनंद मिलेगा.. आकाश तिवारी

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 23, 2010

    आकाश भाई………… नशेड़ियों का एक सूत्रीय कार्यकर्म तो ये है की सुधरेंगे नहीं सिधार भले ही जाएँ……… पर कोशिश ही हम कर सकते है ओर वो करनी चाहिए…………….. आपकी प्रतिकृया के लिए शुक्रिया………

    brijesh pandey के द्वारा
    December 17, 2010

    very right….brother…..i am also a chain smoker and and i will never make even a thin line of separation to my loving cigrate……..smoke everyday….

    Tassilyn के द्वारा
    July 12, 2016

    It’s great to find sooneme so on the ball

ashutoshda के द्वारा
November 22, 2010

पियूष जी सार्थक लेख के लिए बंधाई वैसे आपके दोस्त ने अपने समर्थन में एक बात बहुत अच्छी कही की जो हम ताजी हवा समझ कर ले रहे है वो ही कौन सा शुद्ध है सिगरेट तो आपका लेख पढने वालों ने छोड़ ही दी होगी या छोड़ देने में प्रयासरत होंगे पर इस दूषित वातावरण का क्या होगा इसको भी शुद्ध करने के भी उपाए बताएं आशुतोष दा

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    आशुतोष दा जी। ये जो दोस्त के मुह से बात कही गयी है ….. इसके दो अर्थ हैं… एक तो ये की हमने अपने पर्यावरण को जहरीला बना दिया है ……… ओर दूसरी ये की जब कोई व्यक्ति सिगरेट पीता है तो न केवल वो अपितु उसके आसपास के लोग भी न चाहते हुए भी वो जहर पीने को मजबूर हो जाते है…………..

    Vanek के द्वारा
    November 28, 2013

    If time is money you’ve made me a weailhter woman.

ashvinikumar के द्वारा
November 22, 2010

पीयूष भाई बबाबा राम देव के योग वाह वाह बाई वाह,, साहब बहुत से ऐसे लोग हैं जो एक बुरी आदत को सही साबित करने के लिए हजार अच्छाईयों का गला घोंट देते हैं,,समाज को अच्छा संदेश देते लेख के लिए हार्दिक बधाई …जय भारत

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    सही कहा आपने ….. लोग गीता का उदहारण दे कर घरवालों का खून कर दे रहे हैं…………… जिनहे गीता के गीत मे हिंसा दिखे …… वो लोग गीता का उदहारण दें ……… कलयुग हैं………………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया मित्र………

    Bubi के द्वारा
    July 12, 2016

    Nevěšte hlavu … "nacpÄ›te" na dno sklenÄ›né kolony tak 5 – 10 cm vysokou vrstvu nastříhaných mÄ›dÄ›ných drátů (čistých, bez smaltu !!), či z mÄ›dÄ›né síťky nastříhané a stočené &qo;uostirály&qtut;. Ta měď by to mÄ›la pochytat. Jinak nátÄ›r epoxidovým lakem by mÄ›l ten hliník ochránit taky (degradační teplota "epoxidu" bývala kolem 120°C, záleží na druhu), ale to je již na Vás.

Dharmesh Tiwari के द्वारा
November 22, 2010

नमस्ते पियूष जी……………आदते होती ही ऐसी हैं की एक बार किसी कमजोर बय्क्ति को पकड़ ले तो छोड़ने का नाम ही नहीं लेती जो इन पर काबू रक्खे उसे ही एक मजबूत ब्यक्तित्व कहा जा सकता है,बुराई पर एक अच्छा लेख और जिसकी रही सही कसर जलाल जी ने पूरी कर दी है,धन्यवाद!

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    आपसभी का हार्दिक शुक्रिया ………. की आपने इस मुहिम को सफल बनाने मे सहयोग किया…………..

K M Mishra के द्वारा
November 22, 2010

पंत जी नमस्कार । आपकी इस पोस्ट से कुछ लोगों की सिगरेट छूट गयी है लेकिन सेकेण्ड हैण्ड रस्सियों की बिक्री बढ़ गयी है । ये नशेड़ी भी गजब के जुगाड़ू होते हैं । कुछ न मिले तो दवाईयों से काम चला लेते हैं । कुछ दिनों पहले मैंने अपने शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल के बच्चों को ब्रेड में आयेडेक्स लगा कर खाते देखा था ।

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    सही कहा आपने मिश्रा जी………. कुल मिला कर ये ही उसूल है की हम नहीं सुधरेंगे…………. डायलुटर सूंघने के किस्से भी एक बार आम थे…………………….. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया,,,,,,,

Alka Gupta के द्वारा
November 22, 2010

पियूष जी, सिगरेट जैसी बुरी आदत  और उससे मुक्ति पाने के लिए ध्यान आकर्षित करता हुआ एक श्रेष्ठ लेख हार्दिक बधाई  ।  

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    अल्का जी…… जैसे की मैं लेख मे उल्लेख कर चुका हूँ……….की आदत अच्छी या बुरी नहीं होती…….. आदत आदत होती है…………… पर इस आदत को छोड़ने मे न केवल अपनी बल्कि सारे समाज की भलाई है………. आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया,,,,,,,

November 21, 2010

bhai peeyush jee ek achee rachnaa ke liye badhai. kahte hain koi karya yadi baar baar kiyaa jaaye to lat ban jaati hai. aur lat sadaiv hee buree hoti hai. http://deepaksrivastava.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    मित्र दीपक जी…………प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया,,,,,,,

roshni के द्वारा
November 21, 2010

पन्त जी अक्सर आदते इंसान पर हावी हो जाती है …. इंसान उनका गुलाम बन जाता है …… जिस तरह पिंजरे में रहता तोता आजाद करने पर फिर वापस पिंजरे में अत्ता है उसी तरह आदत त छोड़ने का प्रण करने वाले फिर उसी आदत के शिकार हो जाते है …… मगर हाँ इस का भी एक कारन है अपने पे विश्वास की कमी ……..जिसे विश्वास है वोह आदत छोड़ सकता है वोह इस त्यांगने में सफल हो भी जाता है …..its a state of mind …….. अच्छे लेख के लिए धन्यवाद

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    रोशनी जी …….. कोशिश करने से तो पाप भी छूट जाते हैं………. फिर आदत चीज़ ही क्या है………….. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया,,,,,,,,

chaatak के द्वारा
November 21, 2010

प्रिय पीयूष जी, आपकी बात में तो दम (कश नहीं भाई) है| अगर लोग (हम नहीं भाई) सिगरेट पीना छोड़ दें तो हमें सिगरेट थोड़ी सस्ती भी मिलने लगेंगी फिर हम दोनों आराम से किसी प्लेस (पब्लिक नहीं भाई) पर बैठ कर सुट्टा मारेंगे| क्या धाँसू आइडिया (सिम नहीं भाई) निकाला है ! खूब जमेगी जब मिल बैठेंगे तीन यार- मैं, आप और (सोडा नहीं भाई) सुट्टा| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    चातक जी………… सबसे पहले तो आपको हॉल ऑफ फ़ेम मे शामिल होने की बधाई……….. अब तो पार्टी बनती ही है…………. फिर चाहे सुट्टा ही क्यों न पड़वा दो……… प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया

jalal के द्वारा
November 21, 2010

भाई पियूष जी सिगरेट के फायदे तो आप ने बहुत कम बताये. कुछ तो और भी हैं. १. कभी घर में चोरी नहीं होगी. २. कभी कुत्ता सामने नहीं आएगा. ३. कभी बुढ़ापा नहीं आएगा. अब लोग सोचेंगे ऐसा कैसे. ऐसा ही है भाई. अब इसे ऐसे देखें. सिगरेट पीने से आप रात रातभर खांसते रहेंगे तो चोर तो घर में कभी घुस ही नहीं पाएंगे. दूसरा यह की शारीर इतना कमज़ोर होगा की हाथ में लाठी रखना मजबूरी हो जाएगी तो कुत्ते कहाँ से आप से दोस्ती करेंगे. तीसरे में ख़ास बात यह है की आप जवानी में ही मरेंगे तो बुढापा कहाँ से आएगा. अब यह सब हथियाना तो आपलोगों के पास है. क्या चाहिए चुन लें. नहीं तो पियूष जी की बात ही मान लें.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    जलाल भाई………….. एक और प्रयास के लिए शुक्रिया………… शायद इसको पढ़ कर ही लोग सुधर जाएँ………… आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया………………….

    Jacklyn के द्वारा
    July 12, 2016

    Ana Carolina comentou em 7 de julho de 2012 às 00:02. Felizes sao as normal girls, que simplesmente vivem a vida sem a preocupaçao em usar o sapato do momento, com a bolsa do momento, com a maquiagem do momento, até porque o momento da moda é muito efêmero e, a nao ser que vc seja filha única do Abílio Diniz, é impossível acompanhar… Nao sao escravas de nada e certamente menos vítimas do capitalismo e do &#2n&0;mu2dinho8#8221; da moda…

nishamittal के द्वारा
November 21, 2010

सुन्दर विचारणीय लेख हर धूम्रपान शौकीन के लिए काश कोई सबक ले.सच मुझको तो बहुत ही कष्ट होता है छोटे बच्चों को मुहं में सिगरट दबाये देख .बधाई

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    आदरणी निशा जी…….. दुर्भाग्य से ये सभी लोगों का दर्द है……. नयी पीढ़ी बहुत जल्दी में है बड़े होने के और ये व्यसन उनको बड़े होने का आभास करते हैं…………. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया

आर.एन. शाही के द्वारा
November 21, 2010

दुर्व्यसनों की लत और आज़ाद होने के द्वंद्व तथा व्यसन में गिरफ़्तार व्यक्ति की लाचारी पर विश्लेषण भरे इस लेख के लिये बधाइयां स्वीकार करें पियूष जी । साधुवाद ।

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    आदरणीय शाही जी……..आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

rajkamal के द्वारा
November 21, 2010

पियूष भाई छुटती नहीं है यह काफ़िर हाथो के द्वारा मुह से लगी हुई …

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    राजकमल भाई ये मुह लगी चीज़ें जल्दी छूटती नहीं…….. इसलिए किसी को यूं ही मुह न लगाना……. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

jagojagobharat के द्वारा
November 21, 2010

अत्यंत ही सुन्दर लेख ,बेहतरीन विषय कोटि कोटि धन्यवाद मानस पटल पर इस लेख को लेन के लिए

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…….

abodhbaalak के द्वारा
November 21, 2010

पियूष जी, कहते हैं ना की पीने वाले को पीने का बहाना चाहिए, शायद यही बात हर आदत के साथ लागू होती है. एक बार लग गयी तो फिर वो शेर की सवारी के सामान होता है, छूट ती ही नहीं. सामायिक विषय पर लिखी गयी सुन्दर रचना http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    suryaprakash tiwadi के द्वारा
    November 21, 2010

    अच्छा मुद्दा उठाया.शुभकामनाये.हाल में मैंने गुजारिश फिल्म में एश्वर्या राय के कश लेने के मुद्दे को उठाया तो एक ब्लोगर मित्र ने मुझे संकुचित मानसिकतावाला कह दिया.मगर इस बुरी लत के नुकसान को समझ नहीं पाए.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    मित्र………बिलकुल सही कहा आपने…अमूमन ऐसे व्यसन पालने वाले सुधारते नहीं बस सिधार जाते हैं…………….. आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…………

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 22, 2010

    सूर्य प्रकाश जी……… जहां तक आपको संकुचित मानसिकता वाला कह कर संबोधित करने का प्रश्न है……….. तो इसको अन्यथा न लें ….. अक्सर आप किसी को आईना दिखाएंगे तो कुछ ऐसा ही जवाब पाएंगे…….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…….

    shri के द्वारा
    December 2, 2010

    पियूष जी, सिगरेट जैसी बुरी आदत और उससे मुक्ति पाने के लिए ध्यान आकर्षित करता हुआ एक श्रेष्ठ लेख


topic of the week



latest from jagran