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प्रेम महापुरुषों की नजर मे.....

Posted On: 14 Feb, 2011 Others में

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कबीर दास के अनुसार ….

कबीरा ये घर प्रेम का खाला का घर नाहिं,
सीस उतारे भू धरे, तब पैठे घर माहिं।

प्रेम न बाडी उपजै, प्रेम न हाट बिकाय,
राजा परजा जे रुचे, सीस देइ ले जाय।

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रहीम दास जी के अनुसार …….

रहिमन प्रीत सराहिये मिले होत रंग दून।

ज्यों हरदी जरदी तजै, तजै सफेदी चून।।
.

प्रेम में अहं का त्याग ही सर्वश्रेष्ठ है, जैसे हल्दी और चूना मिलते हैं तो हल्दी अपना पीलापन छोड देती है और चूना अपनी सफेदी दोनों मिल कर प्रेम का एक नया चटक लाल रंग बनाते हैं।

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कबीर दास के अनुसार …. ‘सच्चा प्रेम कभी प्रति-प्रेम नहीं चाहता।’
.

किसी ज्ञानी ने ये भी कहा है……. प्यार अंधा होता है पर शादी आंखे खोल देती है……

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स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार ……
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सारा जगत प्रेम पाने को व्याकुल है…. बदले मे बिना कुछ पाने की इच्छा रखे ही प्रेम देना चाहिए…….. प्रेम कभी निष्फल नहीं होता…. कल हो या परसों या युगों बाद, पर सत्य की विजय अवश्य होगी…… प्रेम ही मैदान जीतेगा……..

प्रेम की सर्वसमर्थ शक्ति मे विश्वास करो…….. यदि तुम्हारे पास प्रेम है तो तुम सर्वशक्तिमान हो……. संसार को ऐसे लोग चाहिए जिनका जीवन निस्वार्थ ज्वलंत प्रेम स्वरूप हो…….

कोई इंसान भले ही सारे ग्रंथ पढ़ डाले …….. पर ये प्रेम न तो वाक्पटुता से, न तीव्र बुद्धि से ओर न शास्त्रों के अध्ययन से पाया जा सकता है….. प्रेम सदा पारस्परिक तथा परावर्तक होता है…… ओर इस के बिना आनन्द की अनुभूति नही की जा सकती……..

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मीर तकी मीर ने कहा है……..

‘जिस प्यार में प्यार करने की कोई हद नहीं होती और किसी तरह का पछतावा भी नहीं होता, वही उसका सच्चा रूप है।’
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फरीदुद्दीन अत्तार ने प्रेम के संबंध मे कहा है की ……….

प्रेम का एक कण भी सारे संसार से बढ़कर मूल्य रखता है।
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कंफ्यूशियस के अनुसार …..

‘प्यार आत्मा की खुराक है।’
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सम्राट अशोक के अनुसार……

सबसे उत्तम विजय प्रेम की है। जो सदैव के लिए विजेताओं का हृदय बाँध लेती है……..

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ग़ालिब ने कहा है…….

ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे…..
एक आग का दरिया है और डूब के जाना है……

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सिकंदर के अनुसार …….

‘प्यार एक भूत की तरह है, जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं, पर इसके दर्शन बहुत कम लोगों को हुए हैं।’
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जॉर्ज बनार्ड शॉ के अनुसार …..

‘जीवन में प्रेम का वही महत्व है जो फूल में खुशबू का होता है।’
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शेक्सपीयर ने कहा है की …..

‘प्रेम आँखों से नहीं ह्रदय से देखता है, इसीलिए प्रेम को अंधा कहा गया है।’
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अफलातून के अनुसार …….

‘प्रेम के स्पर्श से हर कोई कवि बन जाता है।’
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बेकन के अनुसार ……

‘प्यार समर्पण और जिम्मेदारी का दूसरा नाम है।’ ———
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अरस्तु ने कहा है की…….

‘जहाँ प्रेम है, वहीं जीवन का सही रूप है।’
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किसी महापुरुष  ने कहा है की…….

जिस तरह किसी बंधन का मूल को छोडना कठिन है ऐसे ही प्रेम को छोडना बहुत कठिन है ।

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जिगर मुरादबादी ने इस प्रेम पर कुछ यूं कहा है…….. की …….

मासूम मोहब्बत का बस इतना फ़साना है…

इक आग का दरिया है और डूब के जाना है॥
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खुसरो ने कहा है की….

खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वाकी धार,

जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार….
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किसी महापुरुष  ने कहा है की…….

बाह्य उपाधि के ज़रीये प्रेम नहीं होता …..
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किसी महापुरुष  ने कहा है की…….

प्रेम अकृत्रिम सुख है ….. इसे किसी भी कृत्रिम रूप से पैदा नहीं किया जा सकता है…….
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किसी महापुरुष  ने कहा है की…….

गुंगे मानव के आस्वाद की तरह प्रेम का स्वरुप अनिर्वचनीय है ।
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महात्मा गाँधी ने कहा है की…….

‘प्रेम कभी दावा नहीं करता, वह हमेशा देता है। प्रेम हमेशा कष्ट सहता है, न कभी झुंझलाता है और न ही कभी बदला लेता है।’
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सभी ब्लोगेर्स मित्रों को इस प्रतियोगिता के लिए ढेरों शुभकामनाएं …….. उम्मीद है एक बार फिर इस मंच पर व्यस्तता ख़त्म होगी और कुछ क्रन्तिकारी लेख लिखे जायेंगे.. और उनको पूरा सम्मान भी मिलेगा…….. एक बार फिर कुछ हास्य-विनोद का रंग चड़ेगा….. इस पूरी प्रतियोगिता पर राजकमल भाई कुछ मसालेदार व्यंग लिखेंगे…… कुछ लेखक गायब हो जाएंगे…. ओर कुछ जो इस प्रतियोगिता के कारण अपने विचार इस मंच पर नहीं रख पाये ……….. क्योकि यहाँ प्रेम के अतिरिक्त कोई लेख पाठकों को पसंद ही नहीं आ रहा था…… प्रेम का रंग ऐसा चड़ा था की कोई ओर रंग नहीं दिखा… प्रेम ने राष्ट्रभक्ति ओर संस्कारों की बात को भी ढक दिया….. इन विषयों पर कई अच्छे लेख आए और चले गए…. प्रेम पर लिखते लिखते भी कई जगह मतभेद के स्थान पर मनभेद होते हुए भी दिखाई दिये…….
अब हालत बदलें ओर फिर सभी अपने आपसी मतभेद ओर मनभेदों को दर किनार करते हुए……. एक बार फिर पहले की तरह अपने खुद की कल्पना या सामाजिक हालातों के आधार पर लेख लिखें…. JJ की मर्जी पर नहीं….. इसी आशा के साथ…….. आप सभी को प्रेम के इस महापर्व की बधाई…… प्रेम को कहीं खोजे नहीं…… अपने घर पर अपने आस पास …… प्रकृति को … प्राणियों को सभी को इस एक दिन आप कोई कष्ट न पहुंचाए और न ही किसी का दिल दुखाएं……… तो यदि किसी लेख से असहमत भी हों तो शब्दों मे प्रेम रखकर प्रतिक्रिया दें….. और यदि ये संभव न हो पाये तो एक दिन का इंतज़ार कर लें….. (मज़ाक है…… अन्यथा न लें…) :-)
.
एक अंत मे वर्तमान तथाकथित प्रेमियों के लिए कुछ पंक्तियाँ ….
.
जिधर देखो इश्क़ के बीमार बैठे हैं….. हजारों मर गए लाखों तैयार बैठे हैं…..
बरबाद होते हैं पहले लड़कियों के पीछे… फिर कहते हैं हम अभी तक बेरोजगार बैठे हैं……..

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37 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Amit Dehati के द्वारा
February 16, 2011

आदरणीय पियूष जी प्रणाम !!!!! आपके इस अदा पे आपको एक नाम देने की गुस्ताखी कर रहां हूँ …… नाम …….आदरणीय “डिस्कवरी मैन” ….. धन्यवाद . क्षमा करें अपनी राय जरुर दें !

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 20, 2011

    अमित जी……… “डिस्कवरी मैन” बनने के लिए कुछ डिस्कवरी भी तो करवाते…:-)….. बस यूँ ही नाम दे दिया…….. भारत में एक प्रथा ये भी बुरी है …….. की नाम देने में बड़ी जल्दी करते है……… एक साल सरकार चलती है और मुख्यमंत्री को विकास पुरुष का नाम दे देते हैं………. और अगले ही साल उसी मुख्यमंत्री को हटा कर बाहर कर दिया जाता है….. :-)… . आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

HIMANSHU BHATT के द्वारा
February 16, 2011

बहुत सुंदर पियूष भाई….. प्रेम को समझाने में…. सफल रहे हैं आप.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 16, 2011

    हिमांशु जी…….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……..

abodhbaalak के द्वारा
February 15, 2011

is lekh par to kuchh nahi kahoonga, keval itna hi ke aap ka abhari hoon ki aapne in mahan hastioyon ke dwara prem ko …. aur kya kahoon? :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    एक लम्बे समय के बाद आपको पुन: देख कर (आभासी रूप में) अच्छा लगा…… प्रेम के इस महा कुम्भ में आपकी कमी बहुत खली……….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

nishamittal के द्वारा
February 15, 2011

अतीव सुंदर संकलन पीयूष जी,संग्रहनीय लेख है आपका.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय निशा जी…….. आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

rajeev dubey के द्वारा
February 14, 2011

यह तो बड़ा अच्छा किया आपने पियूष जी, संकलन सुन्दर बन पड़ा है , बधाई.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    राजीव जी…….. आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

Amit Dehati के द्वारा
February 14, 2011

वाह क्या बात है ……बहुत सुन्दर रचना ! आदरणीय भ्राता श्री प्रणाम ! आपका यह पोस्ट पढके मैंने दो गुस्ताखी कर डाली …… १- मैंने इसे कॉपी किया और इसे आपने मेमोरी में सुरक्षित रख लिया …की जब जी करेगा प्रेम के बारे में कुछ पढने की तो इसे ही पढ़ लिया करूँगा ! २-शायद मैं गलत हो सकता हूँ ……..,जनाब ग़ालिब और जनाब जिगर मुरादाबादी की निचे वाली पंक्ति शायद एक ही है, या दिनों की थिंकिंग एक ही होगी ! वैसे सभी एक से बढ़ के एक हैं ,,,,,,…लेकिन सबसे सुन्दर पंक्ति ……….खुसरो की लगी …. खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वाकी धार, जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार…. http://amitdehati.jagranjunction.com/2011/02/09/%E0%A4%87%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B8-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE/

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    भाई अमित जी…….. थोडा चकित मैं भी था…. पर फिर लगा की जो समझ गए प्रेम को उनके विचार एक ही होंगे…….. जब आपकी समझ में कोई भाव आ गया तो फिर दुसरे की समझ में आने की बात है …… भाव तो वही रहेगा…….. हां कुछ शब्द बदल सकते हैं………. ये भी संभव है की कुछ गलत डाटा मिला हो…….. यदि आपकी कहीं उपलब्ध हो कभी भी तो मुझे जरुर दें………. और बाकि जहा तक बात है इसको कॉपी करने की गुस्ताखी की तो यहाँ आप स्वतंत्र हैं……. इन महापुरुषों के विचार आप अपने स्तर पर भी फैलाएं……… कोई शिकायत नहीं है………..

    Amit Dehati के द्वारा
    February 16, 2011

    आदरणीय पियूष जी प्रणाम !!!!! बिलकुल मैं आपसे सहमत हूँ ….. आपके इस अदा पे आपको एक नाम देने की गुस्ताखी कर रहां हूँ …… नाम …….आदरणीय “डिस्कवरी मैन” ….. धन्यवाद . क्षमा करें अपनी राय जरुर दें !

February 14, 2011

पियूष जी, प्रेम के संबंध में,प्राचीन कवियों से लेकर पाश्चात्य विद्वानों तक के विचार-वो भी एक ही जगह-ऎसे श्रम-साध्य महत्वपूर्ण कार्य के लिए बंधाई.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय विनोद जी……. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 14, 2011

श्री पियूष जी, बहुत खोजू है आप…कहा-कहा से खोज कर इतने महान विचार रख्खे है आपने….क्या अच्छा लगा तो सुनिए… जिधर देखो इश्क़ के बीमार बैठे हैं….. हजारों मर गए लाखों तैयार बैठे हैं….. बरबाद होते हैं पहले लड़कियों के पीछे… फिर कहते हैं हम अभी तक बेरोजगार बैठे हैं…….. आकाश तिवारी

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    भाई आकाश जी…………आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 14, 2011

पियूष जी नमश्कार .. सबसे पहले तो आपके इस वक्तव्यों के संग्रह के लिए धन्यवाद ..और साथ में वही प्रश्न जो दीपक जी ने पूछा है की अंतिम वचन किस महापुरुष का है……………? जिधर देखो इश्क़ के बीमार बैठे हैं….. हजारों मर गए लाखों तैयार बैठे हैं….. बरबाद होते हैं पहले लड़कियों के पीछे… फिर कहते हैं हम अभी तक बेरोजगार बैठे हैं……

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया… बाकि आपका उत्तर भी उस प्रतिक्रिया में ही है……

deepak pandey के द्वारा
February 14, 2011

बहुत से महापुरुषों की वाणी एक लेख में समाहित कर दिया आपने . वैसे अंतिम वाणी किस महापुरुष की है ..

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    क्या लाभ है इन महापुरुष के बारे मे जानकार… अच्छे भले आदमी के कई आशिक दुश्मन बन जाएंगे……….. जिनको जानना जरूरी था…. उनपर प्रकाश डाल दिया……. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया…

vinitashukla के द्वारा
February 14, 2011

कई विचारधाराओं को समाहित करता हुआ सुन्दर लेख. बधाई.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…

Bhagwan Babu के द्वारा
February 14, 2011

इतने सारे महापुरूषो के वक्तव्य आपने एक ही लेख मे देकर इस लेख को महान बना दिया है आपका बहुत बहुत धन्यवाद http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/13/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%88-%e2%80%93-valentine-contest/#comment-1205

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    महान और साधारण तो वचन होते है…… बाकि किसी के कहे वचन केवल बोलने से ही कोई महान नहीं हो जाता……… उस पर अमल करो तभी ये वचन सार्थक हों…………. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया…

priyasingh के द्वारा
February 13, 2011

जिगर मुरादाबादी और ग़ालिब जी के विचार प्रेम के बारे में एक समान थे….. इन महापुरुषों की उक्तिया किताबो में पढ़ी थी आज आपके ब्लॉग में भी पढ़ ली …पर लेख का अंत पढ़कर मज़ा आ गया…..अछि प्रस्तुति……

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    अकसर ज्ञानियों के विचार सामान हो ही जाते है……. चाहे तो आप बुद्ध, महावीर, नानक, कबीर किसी भी महापुरुष को पढ़ लें……. विचार कहने का तरीका अलग हो सकता है पर सार एक ही है……..

rajkamal के द्वारा
February 13, 2011

प्रिय पियूष भाई …. नमस्कार ! इस प्रतियोगिता के आखरी दिन इतनी बेहतरीन रचना की आशा सभी ब्लोगरो समेत जागरण जंक्शन वालों ने भी नहीं रखी होगी ….. बाकि सभी को गोली मारिये प्रेमी लोग तो सिर्फ और सिर्फ चाचा ग़ालिब और जिगर मुरादाबादी का ही किया अनुसरण करते है ….. और मर्द लोग पूजनीय आमिर खुसरो जैसे रब के बन्दों की बातों पर क्या खाक अम्ल करेंगे ? इस लेख का अंत भी आपने एक ज़ोरदार + मज़ेदार शेयर से किया है ….. इस सब के लिए आपका आभार

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    राजकमल भाई……. आपकी ये प्रतिक्रिया ही इस ब्लॉग का सबसे आकर्षक भाग है…. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया………..

Preeti Mishra के द्वारा
February 13, 2011

किसी ज्ञानी ने ये भी कहा है……. प्यार अंधा होता है पर शादी आंखे खोल देती है…… इस ज्ञानी को मै महाज्ञानी कहूंगी क्यूँकी उसने बिल्कुल सही लिखा है. अच्छा लेख. शुभकामनाएं.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    इस सम्बन्ध में मेरा मानना है की वास्तव में जिस ज्ञानी ने ये कहा होगा …….. उस ने आजकल के प्रेम पर कहा होगा……… अन्यथा सच्चा प्रेम अंधों को भी आँख दे देता है ……….

आर.एन. शाही के द्वारा
February 13, 2011

पियूष जी, प्रेम पर अमर उक्तियों के साथ आपका यह उपसंहार लेख बहुत अच्छा लगा । बधाई ।

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    आदरणीय शाही जी……. आपकी इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया…….

alkargupta1 के द्वारा
February 13, 2011

पीयूष जी, इतने महान पुरुषों के विचारों को मंच पर प्रस्तुत करके बहुत महान कार्य किया है ! शुभकामनाएं !

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….. महान कार्य तो उनका है जो ये कह गए……….

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 13, 2011

पियूष भाई, बहुत धन्यवाद इतने महान लोगों के वचन प्रस्तुत करने के लिए और साथ ही बाद वाला भाग भी बहुत बढ़िया है जिसमें आपकी नेक सलाह है| पुनश्च धन्यवाद|

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 15, 2011

    वाहिद भाई …… इस स्नेह भरी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………….


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