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आँखों देखि कानो सुनी सब झूठी... (एक मार्मिक कथा)

Posted On: 21 Feb, 2011 Others में

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इससे पूर्व भी मैं एक कहानी मासूम को सजा पोस्ट कर चूका हूँ. जैसे ये कहानी मुझे मिली वैसे ही एक और कहानी आज और मुझे मिली जो मैं आप सब के साथ बांटना चाहता हूँ………

वास्तव में चाहे कहानी मासूम को सजा हो या ये कहानी इनका एक मात्र लक्ष्य कुछ बातों को सामने रखना है जिनको हम छोटी बात सोच कर टाल देतें हैं…

एक ट्रेन में एक महिला, पुरुष और उनका लगभग 24 -25 साल का लड़का बैठे थे…. वो लड़का खिड़की की और बैठा था…. हर किसी चीज़ को देखने का उस लड़के का नजरिया कुछ और ही था वो हर चीज़ को ऐसे घूर रहा था जैसे कभी उसने उन्हें या उस तरह की कोई चीज़ देखी ही ना हो…..
थोड़ी देर बाद उस परिवार के सामने वाली सीट पर एक नवयुवक व एक नवयुवती आकर बैठ गए . दोनों आपस में कुछ बात कर रहे थे ……. तभी उनकी नज़र उस लड़के पर पड़ी ……. उस लड़के की हरकतें उनको बड़ी अजीब सी लगी ……… पर वो कुछ बोले नहीं……..

फिर थोड़ी देर में ही ट्रेन चल पड़ी…. अब वो लड़का चिल्लाने लगा माँ वो देखो खम्भा चलने लगा है…… वो फिर चिल्लाया माँ वो पेड़ चल रहे हैं………. ये सुनकर उसकी माँ कहती हां बेटा तुने ठीक कहा………… सामने बैठे नवयुवक को बड़ा गुस्सा आया की ये लड़का किस तरह की मुर्खता भरी बातें कर रहा है. और उसकी माँ उसको समझाने के स्थान पर उसको और बढ़ावा दे रही हैं…….. पर नवयुवती द्वारा रोके जाने पर वो नवयुवक शांत बैठा रहा……..
तभी लड़का फिर जोर जोर से चिल्लाया वो देखो बादल वो भी अब चलने लगा…….. है न माँ…….. और उसकी माँ बोली हां बेटा तुने ठीक कहा……… और वो लड़का जोर जोर से हसने लगा………
अब उस नवयुवक से चुप न रहा गया……….. वो उस महिला से बोले आपका बेटा उतनी देर से मुर्खता पूर्ण हरकतें कर रहा है और आप उसको समझाने के स्थान पर उसकी इन मूर्खतापूर्ण हरकतों पर उसका साथ दे रही है. मुझे लगता है की आपका बेटा मानसिक रूप से बीमार है और आपको किसी अच्छे डॉक्टर से उसका इलाज करना चाहिए.
अब तक चुपचाप बैठे ये सब देख रहा उस लड़के का पिता बोला………… तुमने बिलकुल ठीक कहा …….. ये सब डॉक्टर के कारन ही हुआ है………… हम डॉक्टर के पास से ही आ रहे हैं ……….. मेरा ये बेटा जन्म से देखने में असमर्थ था. आज इसका ऑपरेशन हुआ और हम अब इसको घर ले जा रहे है….. ये सब जिनको देखकर ये इस प्रकार की प्रतिक्रिया दे रहा है.. वो इसलिए क्योकि वास्तव में ये उनको पहली बार देख रहा है….. आज पहली बार इसने देखा की पेड़ होता कैसा है…… बादल क्या हैं ……. और फिर जैसे ही ट्रेन चली तो इसको वो हर चीज़ भागती लगी तो इसमें इसके मानसिक रूप से कमजोर होने का कोई प्रश्न ही नहीं है……………
अब उस नवयुवक की आँखों में पानी था….उसका सर झुक गया था …………. उसके होंठ कंपकपा रहे थे.. जैसे वो कुछ कहना चाहता हो पर उसको शब्द नहीं मिल पा रहे हों………..
ग्लानी से भरा वो युवक जब अपने गंतव्य पर उतरने लगा तो उसने पैर छूकर उस महिला और पुरुष से माफ़ी मांगी और बोला की आज मेरी समझ में एक बात आ गयी………

कि कई बार आँखों देखी और कानो सुनी बात भी गलत हो सकती है………….
और किसी भी घटना को देखकर उसपर अपनी राय बनाना गलत है……………

यही दो सन्देश मैं आपकी और से सभी को देना चाहता हूँ ………… मैं चाहता हूँ आप इस कहानी को सुना कर ये सन्देश सभी को दें…… और मासूम को सजा कहानी सुना कर रफ़्तार को पसंद करने वाले बच्चों को उस रफ़्तार के कारण लोगो के जीवन पर होने वाले बुरे असर का सन्देश दें…….

धन्यवाद………………..
आपके अमूल्य राय के इंतजार में …………..
पियूष कुमार पन्त………………………………..



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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 11, 2011

बहुत ही रोचक एवं मार्मीक कहानी . इसका सन्देश जन जन तक पहुंचे.

rajkamal के द्वारा
October 1, 2010

सुपरफास्ट हल्द्वानी एक्सप्रेस ….. कश्मीर से कन्याकुमारी … बहुत ही बढिया कहानी पियूष भाई … बधाई

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    राजकमल भाई ……… आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

rita singh 'sarjana' के द्वारा
September 29, 2010

पियूष जी , बिलकुल आपका यह सन्देश अवश्य ही सबको सुनाउंगी l ज्ञानवर्धक लेख के लिए शुक्रिया और बधाई l

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    मैं यहi चाहता हूँ की ये कहानी लोगों तक पहुचे ताकि ऐसे हादसों पर कुछ रोक लग सके…….. आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
September 28, 2010

अच्छी सीख देती सुन्दर कहानी कहानी के बहुत बहुत बधाई …

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    October 1, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए बहुत शुक्रिया शैलेश भाई……..

roshni के द्वारा
September 28, 2010

पन्त जी बहुत ही सुन्दर सन्देश देती कहानी … अप कहाँ से इतनी अच्छी अच्छी कहनियाँ लेकर आत्ते है … बधाई सहित

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    रौशनी जी, इन कहानियों को प्रस्तुत करने के पीछे मेरा उद्देश्य कुछ बातों की और आप सबका ध्यान केन्द्रित करना है…………… उम्मीद है आप लोग इनको समाज पायें…………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

guddu के द्वारा
September 28, 2010

प्रेरक कहानी अच्छी लगी प्रयास कामयाब होते है और बधाई हो. कल से सोच रहा था की आप की रचना देखने को मिले पर आज सफल हो गया धन्यबाद. शैलन्द्र सिंह

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    शैलन्द्र जी …………जान कर अच्छा लगा की आप प्रतीक्षा में थे…………..प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

abodhbaalak के द्वारा
September 28, 2010

पियुश्जी, क्या कहें, मुझे लगता है की आपको मनोविज्ञान में महारत हासिल है, जो लिखते हैं, आदमी उसपर भावुक होने पर विवश हो जाता है, इस रचना के द्वारा आपने एक ज्ञान दिया है लोगों को “कि कई बार आँखों देखी और कानो सुनी बात भी गलत हो सकती है…………. और किसी भी घटना को देखकर उसपर अपनी राय बनाना गलत है. अति सुन्दर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई हो, http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    मित्र आपने अपने नाम पर पर्दा डाल रखा है………. और किसी को अबोध कहना गलत है……. इसलिए आपको मित्र कह कर संबोधित कर रहा हूँ…….. तो मित्र मैं मनोविज्ञान का म भी नहीं जनता पर मानवता का ज्ञान जानने के लिए तत्पर रहता हूँ………… प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

nishamittal के द्वारा
September 28, 2010

आपकी प्रस्तुति वास्तव में सदा सन्देश लिए होती हैसन्देश ग्रहण कर समाज का कल्याण हो ऐसी ही कामना है.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    लोग इन संदेशों को अपना लें ये मेरा प्रयास है…………….प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

Aakash Tiwaari के द्वारा
September 28, 2010

पियूष जी कमल की रचनाएं डालते है आप ब्लॉग पर ….आज मुझे ऐसे लेख को पढ़कर फक्र है की आप जैसी सोच वाले लोग अभी भी हैं..और जागरण मंच पर आकर मैंने कोई गलती नहीं की…..ढेर सारी बधाई….

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    आकाश जी ……………. मेरा मानना है की हमारे ब्लॉग समाज को बदलने में हमारी भूमिका सुनिश्चित करें …………. तो हमेशा कुछ ऐसा लिखा जाये की जो आप चाहते है की समाज अनुसरण करे………… प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

priyasingh के द्वारा
September 28, 2010

मासूम को सजा कथा तो मैंने पढ़ी नहीं पर इस कहानी में तो आपने मेरी भी आँखे खोल दी वास्तविकता से अनजान हम कभी कभी लोगो के बारे में कोई भी राय कायम कर लेते है ………….. जबकि उसके पीछे कोई और ही कहानी होती है ……….. बिना पूरी बात जाने कुछ भी सोचना मुर्खेता ही कहलाएगी ………… मैंने पहले भी कहा की आपकी कथाये सच में लाज़वाब होती है …………….

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    जल्द ही मासूम को सजा भी फिर पोस्ट होगी………… प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

s.p.singh के द्वारा
September 28, 2010

कृपया “कमल” को कमाल पढ़े. धन्यवाद

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    यूँ फ़िक्र न किया करें यहाँ सब लोग भावनाएं समझ जाते हैं………….

s.p.singh के द्वारा
September 28, 2010

प्रिय पन्त जी आपको बहुत बहुत आशीर्वाद( क्योंकि बधाई शब्द एक ओपचारिकता का सन्देश देता) आपकी शैली बहुत सरल व् सुंदर है एक छोटी सी बात को कैसे व्यापक स्वरूप में प्रस्तुत किया कमल है अगर आप का प्रयास इसी प्रकार से जरी रहा तो आप बहुत दूर तक जायेंगे ऐसा मेरा विश्वास है तथा इश्वर से यही कमाना भी करता हूँ \

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    आपके स्नेह भरे आशीर्वाद के लिए हार्दिक शुक्रिया………..

Piyush Pant के द्वारा
September 2, 2010

मनीष जी, ये आपके देखने का नजरिया भर है की आपको ये ब्लॉग खूबसूरत लगा……….. वास्तव में आपने इसको कही गहरे तक पढ़ा इसलिए इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया आई है…… और जहाँ तक आपके नवागंतुक होने की बात है………… तो याद रखे की नया ही नए विचारों से पुरानों को कुछ सिखा सकता है…………. अच्छी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

Manish के द्वारा
September 2, 2010

मैं इस जंक्शन का नवान्तुक हूँ, और आते ही इस तरह की ख़ूबसूरत ब्लॉग की मैंने आशा ही नहीं की थी. आपकी प्रस्तुति के लिए मैं अपनी राय देने मैं खुद असमर्थ महसूस कर रहा हूँ. जहाँ पर आप जैसे फनकार मौजूद हों, वहां पर ब्लोगिंग करना व्यर्थ नहीं जायेगा…

Raj के द्वारा
September 1, 2010

डियर पियूष जी, पिछली कहानी की तरह ये कहानी भी बहुत अच्छी लगी. कहानी का सार बहुत अच्छा है “कभी-कभी हम जो आँखों से देखते हैं वो भी सच नहीं होता. इसलिए फैसले सोच समझ कर ही लेने चाहिए.” राज

    Piyush Pant के द्वारा
    September 1, 2010

    यही बिंदु आप लोगो की नज़रों में लाना चाहता था…… आपतक मेरी बात पहुची जान कर अच्छा लगा..

Ali के द्वारा
August 31, 2010

पाल जी की प्रतिक्रिया का पिछा करते हुए यहाँ आया. कहानी पड़ी शयद वो गाड़ी वाली कहानी की प्रतिक्रिया यहाँ दे रहे हैं. पर ये भी सुन्दर कहानी कही.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    कैसे भी आप पहुंचे आप पहुंचे इसके लिए शुक्रिया………….. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

Ajay Pal के द्वारा
August 31, 2010

मिश्रित भाव है . दुःख बी और क्रोध बी की हम छोटे बचो को गाड़ी दे देते है. बिना सोचे की इस का फल क्या होगा.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    September 28, 2010

    सही कहा आपने………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……………

Rakesh के द्वारा
August 28, 2010

piyush ji koi nayi marmik katha ho to wo bhi jaldi den.

    Piyush Pant के द्वारा
    August 29, 2010

    अगर कोई होती तो आप तक जरूर पहुच जाती………. शायद आपका इंतजार शीघ्र ख़त्म हो जाये…………….

shikha के द्वारा
August 27, 2010

वैसे ज्यादातर ऐसा ही होता है.. हम सब आँखों देखी और कानो सुनी बात पर बहुत जल्दी यकीन कर लेते है.. अपनी धारणाओं को हम इन्ही आखों देखी और कानो सुनी का जामा पहना देते है.. आपकी कहानी ने एक अनमोल शिक्षा दी है.. कोशिश रहेगी की आखों देखी, कानो सुनी के साथ हम सोच और वक़्त को भी अहमियत दे.. कुछ बातें सिर्फ वक़्त गुजरने के साथ ही समझ आती है.. यकीनन एक अनमोल कृति.. :-) लिखते रहिएगा..

    Piyush Pant के द्वारा
    August 27, 2010

    शिखा जी, आपको इस कहानी का सार समझ में आया ………. जान कर बहुत अच्छा लगा ………… आशा है ये सन्देश आप ओरों तक भी पंहुचाएंगी ………… बहुत धन्यवाद…………….

Abuzar osmani के द्वारा
August 25, 2010

पियूष भाई आपके इस पोस्ट को पढ़ कर एक अजीब सा असर हुआ,अजीब सा इसलिए क्यूंकि मैं उसको लफ़्ज़ों में अदा नहीं कर सकता,कुछ कमेन्ट करने को समझ नहीं आ रहा…..लफ्ज़ कहीं खो गए शायद…..शुक्रिया

    Piyush Pant के द्वारा
    August 25, 2010

    इतनी खुबसूरत तारीफ की आशा नहीं थी …………. बहुत शुक्रिया………..

Dheeraj के द्वारा
August 24, 2010

आपका हर लेख आपकी सोच को प्रदर्शित कर रहा है. उन ही लिखते रहें.

    Piyush Pant के द्वारा
    August 25, 2010

    इस तारीफ के लिए धन्यवाद…….

Ramesh bajpai के द्वारा
August 19, 2010

पियूष जी बिलकुल सही …..कई बार आँखों देखी और कानो सुनी बात भी गलत हो सकती है………

    Piyush Pant के द्वारा
    August 19, 2010

    श्रीमान बाजपेयी जी, आपका कहना बिलकुल सही है पर हम अक्सर इस बात को भूल जाते हैं……… धन्यवाद ……………

HIMANSHU BHATT के द्वारा
August 19, 2010

VERY GOOD. YOU HAVE DONE A REMARKABLE PRESENTATION. KEEP IT UP. CONGRATULATIONS FOR YOUR EFFORT. MAZA AA GAYA……….REALLY.

    Piyush Pant के द्वारा
    August 19, 2010

    Thanks Sir…………..

आर.एन. शाही के द्वारा
August 19, 2010

आपकी अभिव्यक्ति की धार पैनी होती जा रही है … बधाई ।

    Piyush Pant के द्वारा
    August 19, 2010

    शाही सर ………….तारीफ के लिए शुक्रिया……….. आशा करता हूँ की गलतियों पर भी पूरा ध्यान दिलाएंगे……..

R K KHURANA के द्वारा
August 19, 2010

प्रिय पियूष जी, अच्छी कहानी है ! बिना सोचे समझे किसी भी बात को अपने अनुमान से ही सही मान लेना गलत है ! राम कृष्ण खुराना

    Pawan Pant के द्वारा
    August 19, 2010

    खुराना जी की बात से मैं पूरा समर्थन रखता हूँ. की बिना सोचे समझे किसी भी बात को अपने अनुमान से ही सही मान लेना गलत है और इस कहानी से प्रेरणा मिलती है………..


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