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बाबा तुम अपराधी हो....

Posted On: 5 Jun, 2011 Others में

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बाबा रामदेव एक आंदोलन चलाने के लिए रामलीला मैदान पहुंचे……… आंदोलन का एक मात्र उद्देश्य राष्ट्रहित के कुछ मुद्दों पर सरकार को नियम बनाने के लिए मजबूर करना था… सरकार ने इसे एक प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था….

क्योकि आखिर कैसे एक साधारण सा सन्यासी और उसके अनुयायी इटली मे पली बढ़ी सोनिया जी द्वारा चलाई जा रही कांग्रेस सरकार को झुकने के लिए मजबूर कर सकता हैं… भारतीय संस्कृति का ये सबसे दुखद पक्ष ये ही रहा है की देश विदेशों से लोग यहाँ इन संतों से ज्ञान लेने आते रहे हैं …. और हम भारतीय लोग इन्हें बाबा (ढोंगी) जैसे अलंकारों से इनकी उपेक्षा करते रहे हैं……..
बाबा की विरोधियों के लिए कुछ कहना ठीक नहीं है….. क्योकि विरोध करने वाला ये वर्ग तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग है….. जो कोट पैंट पहने लोगों द्वारा ठगे जाने पर खुश है पर एक भगवा धोती धारण करने वाले की बात सुनने से भी इंकार करना चाहता है…. जो महंगे अस्पतालों मे इलाज करा कर खुद को सम्मानित महसूस करता है पर योग से बीमारी भागना उसकी शान के खिलाफ है…
बाबा रामदेव का विरोध कोई नया नहीं है… पूर्व मे भी सरकारें उनके पतंजलि योगपीठ पर कई आरोप लगा चुकी है… वास्तव मे सरकारें संतों को निर्णायक भूमिका मे देखना नहीं चाहती है….. और हमारा इतिहास भी उनको ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है ….. जहां चाणक्य जैसा ब्राह्मण एक साधारण से बालक को चन्द्रगुप्त मौर्य बना कर एक महान नन्द वंश का अंत कर देता है……
पर यहाँ पर भारतीय जनता का भी उल्लेख करना अनिवार्य है….. जनता दो खेमों मे बटी थी कुछ लोग भीड़ के रूप मे बाबा रामदेव के साथ मौजूद थे तो कुछ लोग बाबा के इस आंदोलन की आलोचना मे व्यस्त थे….. ये हमारे देश का सौभाग्य है की वे लोग जो बाबा के अभियान के खिलाफ है वो आज़ादी से पूर्व पैदा नही हुए थे….. अन्यथा इस देश को आजाद होने मे कई और वर्ष लगते…. क्योकि ये लोग बाबा के मुद्दों के आधार पर उनका समर्थन करने के स्थान पर पर नहीं बाबा के प्रति अपने दुराग्रह के चलते इस राष्ट्रहित के मुद्दे को ही गलत बता रहे हैं……
द्रोणाचार्य ने अर्जुन की प्रतिभा का अंदाज़ उसके उस वक्तव्य से लगा लिया था जिसमे उसने चिड़िया की आँख ही दिखाई देने की बात कही थी…. पर ये जनता जो रामदेव का विरोध कर रही है उसकी नज़र चिड़िया की आँख पर नहीं अपितु धनुष के निर्माण मे प्रयुक्त सामग्री पर है…. वो उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयुक्त होने वाले साधनो के कारण उससे दूर है…. ये बात ही स्पष्ट कर देती है की उनके लिए अपने देश से बड़ा उनका व्यक्तिगत अहं है…..
इस मुहिम के विरोध के पीछे एक और कारण ये भी हो सकता है की अब तक सुविधा शुल्क देकर अथवा लेकर अपने काम करने और करवाने की अपनी आदत के चलते भ्रष्टाचार रहित समाज की कल्पना से ही कुछ लोग भयभीत हो रहे हों……
एक शांति पूर्ण आंदोलन कर रहे एक साधू को जिस तरह से खदेड़ा जाता है वो वास्तव मे इस देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है….. संतों की संस्कृति वाले इस देश मे संत का इस तरह से अपमान निंदनीय है…….
इस पर काँग्रेस प्रवक्ता दिग्विजय सिंह का कथन है की बाबा ने जनता से धोखा किया है इस लिए इस ठगी के आंदोलन को समाप्त किया गया…. अब यहाँ पर कॉंग्रेस की नियत पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है……. की यदि धोखा बाबा रामदेव ने किया और अपने उन अनुयायियों के साथ किया जो उस सभा मे थे … तो फिर उस जनता जोकि पहले ही बाबा रामदेव के द्वारा ठगी जा चुकी थी उसपर लाठी बरसने की क्या जरूरुत थी…. वो भी तब जब की उसमे सर्वाधिक लोग बुजुर्ग और महिलाएं थी……

इस लिए बाबा राम देव को ये समझना चाहिए की उन्होने एक जघन्य अपराध किया है। और उस अपराध की सजा उनको मिलनी ही चाहिए… ये मालूम होने के बाद भी की इस देश मे मूर्ति और पुतलों की पुजा की प्रथा है … ये जानते हुए भी की यहाँ जनता बातों से ही खुश होती है …….. और नारों मे ही देश भक्ति उसको पसंद है…….
जहां हर दूसरा आदमी तथाकथित बुद्धिजीवियों की सभा मे ये कहते हुए नहीं चूकता है की इस देश मे आर्मी शासन लगा देना चाहिए …… तभी कुछ हो सकता है ……. जबकि वो खुद अंदर से ऐसा नहीं चाहता ……. क्योकि अनुशासन मे वो भी नहीं रह सकता है…… ये जान कर भी बाबा ने इतना बड़ा आंदोलन चलाया…. ये अपराध है… और वो भी कम से कम ऐसे देश मे तो है ही जहां बुद्ध और महावीर जीते जी इस उपेक्षित रहे…. (अन्यथा इन संप्रदायों के लोगो की देश मे संख्या सर्वाधिक होती……. ) किन्तु मृत्यु के बाद इनके लिए राष्ट्रीय अवकाश की व्यवस्था की गई….
ये वही देश है जहां विवेकानंद ने कहा था की तुम मुझे 50 लोग दो तो मैं राष्ट्र बदल सकता हूँ… और विवेकानंद जी के पीछे कितने लोग गए वो सर्वविदित है….. और आज हर कोई ये कहता है की काश मे विवेकानंद के समय होता तो मैं उनके साथ जाता … शायद कल को यही हमारी पीढ़ी भी कहे की काश मैं बाबा रामदेव के समय मे होता तो भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम मे उनके साथ होता…….. क्योकि जिंदा क्रांतिकारी विचारों से भरे लोगो के साथ न हमारे पूर्वज रहे और न हम रहने को तैयार है…….
मुर्दों के साथ चलने मे एक विशेष सुविधा होती है…. उनकी कही बातों को अपनी सुविधा के अनुसार प्रयोग किया जा सकता है ……. पर जिंदा आदमी गलत व्याख्या होने पर टोक सकता है… तो बाबा तुम केवल योग ही करो…. तुम्हारा योग शरीर को तो ठीक कर सकता है पर यहाँ लोगों का जमीर ही बीमार है….. और आपका योग जमीर को नहीं ठीक कर सकता …….. पर फिर भी मुझे यकीन है की बदलाव होके रहेगा…….

रावी की रवानी बदलेगी,
सतलुज का मुहाना बदलेगा
गर शौक में तेरे जोश रहा,
तस्वीर का जामा बदलेगा,
बेज़ार न हो, बेज़ार न हो,
सारा फसाना बदलेगा
कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदलें,
तब तो यह ज़माना बदलेगा।

तो अगर आप सच्चे राष्ट्रभक्त हैं और बाबा रामदेव के इस आंदोलन से आपको परहेज है तो एक बार अपनी राष्ट्रभक्ति का आत्ममूल्यांकन अवश्य करें…….

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaxon के द्वारा
July 12, 2016

Planche moyenne.. Aurait-elle été spécialement conçue pour accompagner la pub Volkswagen qui l&prsuo;accomqagne à droite ? (passer la souris sur ladite pub pour comprendre).

maninder के द्वारा
June 13, 2011

pata nahi log kyon ye khate ha ki baba ramdev bhajpa or rss ke ajent hai iska to ye matlab hua ki jo bhi bhustachar ke khilaf bolega to vo bajpa ya rss se juda hoga sarkar ke mantri khe rahe hai ki baba ramdev yog rishi hai unhe rajniti mein nahi ana chiye to koi batye ki ye rajneta kya bhgwan se rajniti or bhustachar karne ka licence banva kar aaye hai? agar ye baat hai to sarkar ke kiye mantrio ko mantri pad chodna padega kyonki koi vakil hai to kisi ka koi or pesha hai kya baba ramdev desh ke nagrik nahi ki vo rajniti mein na aye or na hi bhustachar ke virudh andolan kare.

    Kaylie के द्वारा
    July 12, 2016

    Lool so you reckon that it could be a case of love on the fea8&el#m217;s behalf if there’s a lack of communication between not regularly occurring hook-ups over a long period of time? Maybe I’m just in denial =[

shailandra singh के द्वारा
June 8, 2011

पीयूस जी अभिवादन आपका लेख पडा बदिया लगा और देश भक्ति की परिभाषा भी जच गयी पर हर कोई आपसे सहमत हो यह जरुरी नहीं तो रामदेव के आन्दोलन को कोई भी नकार नहीं सकता क्यों की यह जनता के लिए था पर कुछ तो बात रही होंगी जिनसे उनकी वह इमेज नहीं बन पाई जो अन्ना की थी पर बाद में जो हुआ वह और निदनीय रहा जिसकी हर बर्ग ने आलोचना की है उसी का परिणाम है की अन्ना आज राजघाट पर बेठे है और सफल सञ्चालन चल रहा है रामदेव बाबा को आत्म्लोकन करने दीजिये मीडिया और बुद्धिजीवी बर्ग उनके बिश्लेषण में लगा है क्यों उनके पास साक्ष है देश में दो बर्ग चल रहे है एक कोंग्रेस और दूसरा भा जा पा तीसरा बर्ग है आप जैसे लोगो का जो अपनी बात पूर्ण विश्वाश से कह सकता है बाकी मीडिया भी एक पार्ट है जो सच दिखने का दंभ भरती है सच क्या है वह समय पर छोड़ दीजिये किसी पर हम अपने विचार थोप नहीं सकते है यह ही तो लोकतंत्र है बदिया है बधाई हो.

allrounder के द्वारा
June 7, 2011

पियूष जी एक सार्थक आलेख पर हार्दिक बधाई !

    Damedame के द्वारा
    November 30, 2013

    Articles like this really grease the shafts of knleeodgw.

    Marlee के द्वारा
    July 12, 2016

    Once you’ve negotiated the terms with the seller’s mortgage company you should have 30 days to close. SYou can close any time during that 30-day period so long as your loan and inspections are doecnRefere.ens : Real estate agent in South Carolina Was this answer helpful?

raj kushwaha के द्वारा
June 7, 2011

पियूष जी , आपके विचार बहुत अच्छे हैं, परन्तु आप मुर्दों को आवाज क्यों दे रहे हैं? इनकी बीवी पराये मर्दों संग पायी जाए तो भी ये शरीफ लोग उन्हें भाई बहन ही समझेंगे जबकि हकीकत कुछ और होगी। अभी भी कुछ मुर्दे रामदेव के सराहनीय कार्य को हरकत कह रहे हैं। ऐसे देश के नागरिकों से देश को भगवान ही बचाए। इन मुर्दों का दिमाग बस एक ही जगह सेट है की राजनीति सिर्फ राजपरिवार के लोग या इनसे जुड़े लोग ही कर सकते हैं और किसी का इसपर खासकर साधुओं संतों का कोई अधिकार नहीं. राजपरिवारों के पास अधिक संपत्ति हो तो वह वैध, यदि किसी संत ने जड़ी बूटी बेच कर, प्रवचन दे कर दक्षिणा प्राप्त किया तो वह अवैध। उनके कई ऐसे अनुयायी हैं जो उन्हें लाखों करोड़ों रूपये दान में देते है। शायद इन मुर्दों को ये नहीं पता की रामदेव बाबा जैसे संत इन्ही पैसों से गरीब बच्चों को शिक्षा दिला रहे है, इन्ही के औषधालय के द्वारा बेरोजगार युवा अपने परिवार का पेट पाल रहा है। इन मुर्दों से मेरा निवेदन है की रामदेव जैसे संतों पर आरोप मढने से बाज आयें अन्यथा भूत भगाने के सटीक मंत्र हमें भी आते हैं। खैर इन लोगों से उम्मीद भी क्या की जा सकती है इन लोगों को क्रिकेट, रोमांटिक फ़िल्में, डिस्को, गर्लफ्रेंड से फुर्सत कहाँ?

aksaditya के द्वारा
June 7, 2011

हाँ मैंने अपनी पोस्ट पर आपका कमेन्ट पढ़ा , धन्यवाद | मैने एक जबाब आदरणीय डा. शंकर सिंह जी के कमेन्ट के जबाब में लिखा है , उसे पढ़ लें तो आपका आभारी हूँगा |

aksaditya के द्वारा
June 7, 2011

पीयूष भाई , रामदेव बाबा के आंदोलन से शायद ही कोई प्रारंभ होने के बाद भी असहमत हुआ होगा | असहमती तो उनके बाद के कारनामों से पैदा हुई है | पर, राष्ट्र्भक्ति की आपकी परिभाषा बहुत ही अजीबोगरीब है | यह अजीब बात है कि रामदेव की हरकतों से सहमत हो , नहीं तो राष्ट्रभक्त नहीं | खैर , आपकी मर्जी |

rajeevdubey के द्वारा
June 6, 2011

पियूष जी, एक लम्बे अरसे के बाद लिखने को मजबूर हो उठी लेखनी… आपके लेख पर साधुवाद, इस बर्बर अनैतिक कार्यवाही के विरुद्ध आवाज़ अवश्य उठाई जायेगी…

jai के द्वारा
June 5, 2011

बहुत पीड़ादायक हो रहा है ये सब …………परन्तु हम सब देशवासी साथ साथ हैं ……

Alka Singh के द्वारा
June 5, 2011

पियूष जी नमस्कार कल रात जो भी हुआ है एक सच्चे भारतीय के लिए बहुत ही दुखद और निंदनीय है .जिन लोगों ने आजादी की जंग नहीं देखी तब की बर्बरता का अंदाजा अब आसानी से लगाया जा सकता है .आपका हर शब्द सच्चाई से ओतप्रोत और आत्मा को झकझोरने वाला है .लेकिन इस देश के लोगों का जमीर मर चुका है और जिनका जिन्दा है भी उनका हश्र हम देख ही रहे हैं . निराला जी की चंद पंक्तियाँ याद आ रहीं हैं – डरो नहीं चूहे आखिर चूहे ही हैं ,जीवन की महिमा नष्ट नहीं कर पाएंगे . हर दौर कभी तो खत्म हुआ करता है .जब हम इतने लाख बर्ष चल कर आये हैं तो आगे भी चल कर ही जायेंगे ,आयेंगे ,उजले दिन जरूर आयेंगे .

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 5, 2011

प्रिय पियूष भाई ….नमस्कार ! बाबा जी की मांगे उचित है लेकिन उनकी नियत और तौर तरीको पर कुछ भी संदेह करना जल्बाजी होगी इसलिए इस मामले में वक्त ही बताएगा

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    June 5, 2011

    भाई राजकमल जी……. वास्तव मे इस देश का दुर्भाग्य है की यहाँ किसी व्यक्ति विशेष की पोशाक, और उसकी वेषभूषा राष्ट्रहित से अधिक मूल्यवान है…. कई लोगों का इस आंदोलन से विरोध का कारण इसकी अगुवाई बाबा रामदेव के द्वारा किया जाना है…. कई लोग इस लिए नहीं जुड़ना चाहते की खुद बाबा रामदेव एक योगपीठ चला रहे हैं जिसकी कमाई का कोई हिसाब नहीं है…. और ये वो लोग है जो भ्रष्टाचार के विषय पर बोलते समय भ्रष्ट लोगों को फांसी देने की बात तक कर जाते हैं ….. क्योकि वो जानते हैं ऐसा कोई कानून नहीं बनने वाला ….. और अगर बना तो वो खुद भी उसके फेर मे आ सकते हैं….. तो बाबा ऐसे मे काले धन और भ्रष्टाचार के मामलों मे दोषी पाये जाने वालों के लिए मौत की सजा मांग रहे हैं तो इसमे विरोध क्यों…. अगर बाबा रामदेव के पास काला धन है तो वो भी दोषी होंगे…. और मौत की सजा उनको भी दी जाएगी… बाबा ने कहीं ये नहीं कहा की संतों को इस कानून से बाहर रखा जाए… जब तक हम लोग कभी वस्त्रों के रंग को देख कर … कभी आदमी के स्वरूप को देख कर …. कभी उसकी प्रष्टभूमि को देख कर ऐसे आंदोलनो से खुद को दूर रखेंगे … ये नेता इसी तरह बहला फुसला कर असली मुद्दों से ध्यान हटा देंगे….. क्या होता अगर आज़ादी के लिए लड़ने वालों ने देश से ऊपर अपने धर्म को रखा होता….. या अपने निजी हितों को रखा होता….. भगत सिंह ने सिक्ख होने के बाद भी अपने केश कटवा दिये… जो देश के लिए शीश कटवाने के लिए तैयार हों उनके लिए केश बहुत छोटी बात है……. तो जाने दें बाबा की नियत को हम बस अपनी नियत साफ रखें और अपने अपने दम पर आंदोलनो को खड़ा करने के योग्य बने …….. अन्यथा जब कोई सार्थक आंदोलन हो उसमे सहभागी बने…….

nishamittal के द्वारा
June 5, 2011

बहुत सटीक विचार पियूष जी,असलियत में स्वयं सरकार को तो खतरा ये है कि उसको अपनी गाड्डी डोलती दिख रही है,तो बौखलाना स्वाभाविक है ,कलई खुलने के भयसे भी येन केन प्रकारेण सत्ता आन्दोलन को कुचलना चाहती है, शेष विरोध करने वाले जैसा कि आपने कहा एक अजीब मानसिकता से ग्रस्त हैं.इसीलिये कहा जा रहा है कि बाबा को राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.सन्यासी का धर्म क्या राष्ट्र के प्रति नहीं होता?योग से व आयुर्वेदिक दवाओं से पैसा एकत्र करने का आरोप भी लगाया जा रहा है,aisa होना बौखलाहट में आश्चर्यजनक नहीं.दवाओं के निर्माण में लगने वाला धन कहाँ से आएगा ये बात लोगों की समझ में नहीं आती.बहुत अच्छा लेख.बधाई.

Suraj Agrawal के द्वारा
June 5, 2011

बेहतरीन लेख के लिए बधाई

    kanchan chhatrashali के द्वारा
    June 6, 2011

    पन्त जी अछे लेख के लिए शुम्कम्नाये ……………. जयादा कुछा न बोला कर केवल इतना बोलना चाहती हु की बाबा जी का आन्दोलन ठीक है लेकिन सरकार को आधयात्म पर भी एक टेक्स लगाने की जरूरत है अपनी इस post क लिए में छमा पार्थी हु धन्यवाद


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