परिवर्तन की ओर.......

बदलें खुद को....... और समाज को.......

117 Posts

24194 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1372 postid : 26

भारत महान देश था......

Posted On: 11 Aug, 2011 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेरे पास कुछ नया लिखने का समय नहीं है……. इस लिए अपने एक पुराने लेख को ही फिर पोस्ट कर रहा हूँ……. जो मैंने पिछले 15 अगस्त को छापा था ……

परिस्थितियाँ तब से कुछ भी अलग नहीं है…….. पर एक बदलाव की आहट जरूर सुनाई दे रही है………. जो शायद अगले 15 अगस्त को कुछ नया रूप दे सके …..


मेरा भारत महान……. एक ऐसा वाक्य जिसे हम भारतीय अक्सर कहते रहते है………… कहीं न कहीं ये हमारे अहं को तृप्त करने का एक तरीका है…………. भारत महान है तो इसका अर्थ ये हुआ की हर भारतीय महान है………….. ये वो देश है जहा माँ- बाप के लिए उसका बेटा सबसे अच्छा होता है…………… मगर कई बार बाकि लोग उनसे सहमत नहीं होते.
.
ऐसा ही हाल कुछ भारत का है हम अपने अन्दर इसको महान कहते कहते मर जाते है पर ऐसा कुछ नहीं करते की अन्य देश कहे की भारत महान है……..` मेरा भारत महान हर हिन्दुस्तानी ये शब्द कहते हुए एक अजीब सी गर्वानुभूति करता है…………….. उसके अन्दर कही ये भावना रहती है की भारत महान है क्योंकी वो यहाँ पैदा हुआ है………………

.

इस देश की खूबियाँ :
.

ये वो देश है जहाँ पिज्जा Ambulance और Police से जल्दी पहुच जाता है.
.
जहाँ कार लोन शिक्षा के लिए मिलने वाले लोने से सस्ता है.
.
जहा आटा चावल तेल चीनी गरीब की पहुच से दूर है लेकिन सिम कार्ड फ्री है.
.
जहाँ अरबपति लोग गरीबो के जीवन स्तर में सुधार हेतु दान देने की तुलना में क्रिकेट टीम खरीदते हैं.
.
जहाँ हम चाय की दुकान पर खड़े होकर बाल श्रम पर चर्चा करते है और यहाँ तक कह देते है की ऐसे लोगो को गोली मार देनी चाहिए जो बालश्रम करवाते है. और फिर आवाज लगाते है ओये छोटू साले कहा मर गया चाय कल लायेगा क्या……..

.

ये वो देश है जहाँ वतन पर मरने वालो को आतंकवादी करार दिया जाता है. ( मुम्बई मई ICSE 6th क्लास की Social Science की बुक के पेज ६४-६५ में भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को आतंकवादी बताया गया है.) और अफजल गुरु और कसाब जैसे लोगो को सरकारी खर्चे पर पाला जाता है.


जहा छोटी छोटी बात पर ठाकरे परिवार आन्दोलन कर देता है उस मुंबई में भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को आतंकवादी कहा गया है……….. और ठाकरे परिवार की और से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है क्यों की ये तीनो में से कोई भी मराठी मुद्दे पर वोट नहीं दिला सकता है ………. तो क्या अन्य राज्यों में शिवाजी जैसे राष्ट्र भक्त को आतंकवादी कहने पर ठाकरे परिवार की और से छुट है. राष्ट्र भक्त कभी सीमाओं के बंधन में नहीं रहते… आजाद, भगत सिंह, और अन्य लोगो का आन्दोलन अपने राज्यों को स्वतंत्र करने भर का नहीं था उनके लिए केवल एक देश था जो टुकडो में नहीं बटा था….

.

फिर भी लोग कहते है की मेरा भारत महान…………….. उस से ये पूछा जाये की आखिर भारत क्यों महान है……………. तो जवाब में आने वाले उत्तर ये होते है…………….. किन्तु अगर भारत को महान कहने से आपका अपने अहं को तृप्त करना ही लक्ष्य है तो ठीक है ………….. अन्यथा अगर आप अपने अहं से ऊपर उठ कर सोचे तो आपका हर उत्तर जो भारत की महानता की व्याख्या कर रहा है वो एक नए प्रश्न को जन्म देगा…………….. आपके साधारणतः दिए जाने वाले जवाब जो शायद मेरे भी है ……………… पर मेरे पास उनके लिए नए प्रश्न भी है……. वो इस प्रकार है……
.
भारत महान है क्योकि ये वो देश है………………..

.
उत्तर:१. जहाँ गंगा बहती है.
प्रश्न: किन्तु नदियाँ सभी देशों में बहती हैं और वो सभी बिलकुल साफ़ हैं……. और ये तो अपमान की बात है की जिस गंगा को आप अपने देश में बहना गौरव का विषय मानते हों उसी गंगा में न जाने कितना कूड़ा कितने नालो का पानी रोज डाला जाता है…….

.
उत्तर:2. जहाँ कण कण में भगवान है.
प्रश्न: किन्तु जो लोग यहाँ कण कण में भगवान को देखने में सक्षम है…….. क्या उन्हें दुनिया के किसी अन्य कोने में ये अनुभूति नहीं होगी. क्या केवल सीमा परिवर्तन (सीमा जोकी मानव की बनायीं है) से भगवान की कणों में वियाप्ता समाप्त हो जाती है. यदि हाँ तो क्या भगवान भी मानव द्वारा निर्मित सीमाओ को मानता है……………. क्या राम की महिमा लंका मे कम हो गयी थी……… क्या हनुमान की शक्ति लंका मे क्षीण हो गयी थी…….. या क्या विभीषण को लंका मे राम नाम से ही हनुमान नहीं मिले………….. .


उत्तर:3. जहाँ संस्कारो को प्राथमिकता दी जाती है.
प्रश्न: क्या यही वो देश नहीं जहाँ संस्कारो को छोड़ने के लिए लोग छटपटा रहे है………… क्या माता पिता गुरु देवता वाले संस्कार अभी भी है…. क्या अभी भी लज्जा नारी का सोंदर्य है……………. या नारी का सोंदर्य (वेश भूषा) देख कर दर्शक को लज्जा की अनुभूति हो रही है.


उत्तर:4. भारत ने अपने 10 हजार साल के इतिहास मे कभी किसी अन्य देश पर आक्रमण नही किया…………….. भारत पर अनेकों आक्रमण हुए हैं और भारत ने अपनी आधी से अधिक भूमि खो दी है…………….. लेकिन इस देश ने कभी किसी देश पर हमला नही किया………………..
प्रश्न: क्या ये गर्व का विषय है, वो देश जहाँ गीता जैसा महाज्ञान युद्ध के  मैदान मे दिया जाता है…………….. जहाँ अधर्म का नाश करने की शिक्षा दी जाती है… वो आक्रमणों के बाद या अपनी ही कमजोरी से अपनी जमीं से हाथ धो देता है……….. और हम कहते है ये हमारी महानता है.. क्या कमजोर की कमजोरी कभी उसकी महानता हुई है……………… क्या अंधे का अँधा होना महानता है. हमारे देश के जयचंदों ने इस देश को डुबाया है और हम इनको महानता मानते है…………..


उत्तर.5. दूनिया की प्रथम विश्वविद्यालय तक्षशिला में ईसा पूर्व 700 मे स्थापित की गई थी. वहाँ दूनिया भर से आए 10 हजार से अधिक छात्र पढते थे. इसके अलावा भारत में नालंदा जैसी अति आधुनिक विश्वविद्यालय भी थी.
प्रश्न: वर्तमान में भारत में शिक्षा का स्तर क्या है. भारतीय लोग बाहर देशो के विश्वविद्यालयों में पढने जा रहे है. लाखो / करोडो लोग ऐसे है जो प्राथमिक शिक्षा से आगे नहीं पढ़ पाते है…… स्कूल है शिक्षक नहीं…….


उत्तर.6. संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है………. सभी यूरोपीय भाषायें संस्कृत पर आधारित मानी जाती है….. फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार कम्प्यूटर से लिए सबसे उपयुक्त भाषा भी संस्कृत ही है…………
प्रश्न: आज भारत में कितने लोग ऐसे है जो इस भाषा को जानते है. जिस भाषा पर हम गर्व करने की बात कर रहे है उसको वास्तव में हम खुद प्रयोग नहीं कर रहे. तो क्या वो वास्तु जिसे हमने कही एक कोने में फेक दिया है उसपर गर्व कर सकते है.


उत्तर:7 : बेतार सूचना माध्यम की खोज जगदीश बोस ने की थी, हालांकि उनकी खोज सुर्खियों मे नही आ पाई और इस खोज का श्रेय मारकोनी को मिला.
प्रश्न: परिस्थितिया आज भी नहीं बदली हैं. आज भी कई भारतीय कई क्षेत्रो में नयी नयी खोज कर रहे है………….. पर सरकार के पास उनके लिए कुछ नहीं है………….. अपनी जमा पूजी लगा कर खोज कर रहे लोगो को भी सरकार कोई सम्मान नहीं दे रही. प्रतिभा का कोई सम्मान नहीं है………… ये क्या गर्व की बात है?


उत्तर:8: शतरंज अथवा अष्टपद की खोज भारत मे हुई थी.
प्रश्न: लेकिन क्या एक दो बड़े नामो को छोड़ कर हमारे पास कोई खिलाडी है…………… जिस खेल की खोज भारत में हुई वो भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं है. जो लोग इस खेल को अपना कैरिअर बनाने की सोचते है उनको भी अपना भविष्य का पता नहीं है…………… यहाँ क्रिकेट के अतिरिक्त अन्य किसी खेल में सम्मान नहीं दिया जाता………… जहाँ खेल प्रतिभाओं में भेदभाव हो उस देश को महान कैसे कहा जाये.

.

उत्तर:9: भारत दूनिया के उन गिने चुने देशों मे से एक है जिसने अपनी स्वतंत्रता अहिंसक आंदोलन चला कर प्राप्त की……….
प्रश्न: मगर उस आन्दोलन की धुरी बन चुके महात्मा गाँधी को इस भारत के ही एक सपूत ने मार दिया. और आज भी गाँधी को कोसने वाले लोगो की कमी नहीं.

.

उत्तर:10: दूनिया मे वैज्ञानिको और इंजीनियरों की संख्या के मामले मे भारत दूसरा सबसे बडा देश है……….
प्रश्न: तो विश्व के सबसे आधुनिकतम देशो में भारत का नाम क्यों नहीं है. क्यों अन्य देशो की तुलना में यहाँ नयी खोज कम हो रही है. क्यों ये देश अभी भी बिजली पानी सड़क जैसे मुलभुत सुविधाओं से दूर है.

.

उत्तर:11: भारत जैसी धर्मनिरपेक्षता अन्य किसी देश मे नही देखी जा सकती है. भारत मे जन्मे चार धर्म हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख को दूनिया की एक चौथाई आबादी मानती है. भारत मे 3 लाख मस्जिदें है, इतनी तो किसी भी मुस्लिम देश मे भी नही है. यहूदी और ईसाई धर्म के अनुयायी भारत मे ईसा पूर्व 250 और 50 साल पहले आए थे और यही बस गए थे.

प्रश्न: जहाँ मंदिरों मस्जिदों को आग लगाने या तोड़ कर गिरा देने में लोग पीछे नहीं रहते. ईसाई मिशनरिया धर्म परिवर्तन के लिए लालच देती है, ओर सरकारें उनको प्रोत्साहन ……….. जहां अपने ही एक राज्य मे झण्डा फहराना एक चुनौती सा लगने  लगता है…….. राजनेता इसमे धार्मिक उन्माद की आशंका जाता देते हैं………… यहाँ सरकार तक धर्म और जात के आधार पर बन जाती है. इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुए दंगो में जिस तरह एक समुदाय विशेष के लोगो के संग हिंसा हुई. वो सभी जानते है…………. क्या ऐसे देश को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं. कोई राष्ट्र धर्मनिरपेक्ष तब कहा जा सकता है जब वह सभी धर्मावलम्बी एक दुसरे धर्म का सम्मान करते हुए परस्पर भाई चारे कर साथ रहे…………… जितनी राष्ट्रीय संपत्ति सांप्रदायिक दंगो के समय नष्ट होती है. उतनी राष्ट्र निर्माण में लग कर राष्ट्र उन्नति में लग सकती है…………. .


ये देश पूर्व में महान था किन्तु हमने इस देश को उस मुकाम पर पंहुचा दिया है जहा मुह से तो ये गर्वोक्ति की जा सकती है की मेरा भारत महान लेकिन ये बात दिल से नहीं कही जा सकती है. और सबसे अफ़सोस की बात ये है की युवा वर्ग भी इस और से मुह फेरे है की कैसे इस देश को इसका खोया हुआ मुकाम दिलाया जाये…………………



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (20 votes, average: 4.45 out of 5)
Loading ... Loading ...

57 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
August 13, 2011

बहुत दिन बाद आपका लेख पढ़ा, पहले नहीं पढ़ा था, आप उन लेखको में से हो, जिनकी वजह से मई मंच पर आता था, और तारीफ नहीं करूंगा…

Santosh Kumar के द्वारा
August 12, 2011

पियूष जी ,..बहुत यथार्थ ,सटीक आलेख ,बधाई ..यदि हमें पहले वाली महानता फिरसे पानी है तो उन्ही मूल्यों से जुड़ना होगा ,..

Ramesh Bajpai के द्वारा
August 12, 2011

क्या यही वो देश नहीं जहाँ संस्कारो को छोड़ने के लिए लोग छटपटा रहे है………… क्या माता पिता गुरु देवता वाले संस्कार अभी भी है…. प्रिय श्री पियूष जी बहुत ही सटीक ढंग से से आपने अपनी बात कही है | बधाई

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 6, 2011

    मित्र आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 6, 2011

    आपने मेरे शायद पूरे लेख नहीं पढे ……. मैं कई बार ये कह चुका हूँ की हमारे यहाँ अपने विचार उड़ेलने से कुछ नहीं होने वाला जब तक की हम आगे बढ़कर बदलाव के लिए प्रयास न करें……… किसी ओर से उम्मीद करना व्यर्थ है हमें खुद ही कदम उठाने होंगे………

Aditya Baranwal के द्वारा
February 5, 2011

पीयूषजी आपने भारत का बहुत अच्छा चित्रण लिखा है

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 6, 2011

    अदित्य जी…. ये भारत का ही नहीं हम भारतियों का भी चित्रण है….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

dr.manoj rastogi के द्वारा
February 3, 2011

बहुत सही लिखा है आपने ,बधाई

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 6, 2011

    डॉ साहब…….. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 6, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

January 28, 2011

पियूष जी लेख भले ही पुराना हो पर कुछ बातें तो सर्वकालिक होती हैं और ऐसा ही यह लेख भी है. सुन्दर विचार….

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    January 29, 2011

    आपने सच कहा भईया

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    रतुड़ी जी……. बदले हुए नाम को देख कर आश्चर्य हुआ…….

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    वाहिद जी…… आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

NAVEEN KUMAR SHARMA के द्वारा
January 28, 2011

पीयूष जी इस देश की महानता का बहुत ही अच्छा चित्रण किया है सही मायनों में हमारा देश अब महान नहीं है जो कि पहले था आज हमारे देश को कलमाड़ी, ऐ. राजा जैसे देश के गद्दारों ने बेचकर खा लिया है जब तक हमारे देश में ऐसे नेता रहेंगे तब तक हमारा देश महान नहीं हो सकता और हम आज भी कहते फिरते हैं कि हमारा देश महान है नवीन कुमार शर्मा बहजोई ( मुरादाबाद ) उ. प्र. मोबाइल नंबर – 09719390576

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    हमें ये स्वीकार करना ही होगा की हमारे इस महान देश को नेताओं ने गर्त मे धकेल दिया है……. ओर इसको ऊपर भी नेता ही ले जा सकते हैं……. तो ये हमारा दायित्व है की हम अच्छे लोगों को नेता चुने…….. ओर ऐसे लोगों का हाथ मजबूत करें………

Preeti Mishra के द्वारा
January 28, 2011

इस महान भारत का बहुत अच्छा चित्रण किया है पीयूषजी आपने. बहुत अच्छी रचना. बधाई.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया…

s.p.singh के द्वारा
January 27, 2011

प्रिय पियूष जी हमेशा की तरह एक सारगर्भित लेख की लिए बधाई . आपके पुरे ग्यारह प्रश्नों का एक ही उत्तर है की इन सब की जिम्मेदारी लुटिया चोर प्रोफेसनल ( जिनकी जीविका साधन ही राजनीती है ) नेताओं की हैं — क्या इस बात का कोई उत्तर है की जो पार्टी सरकार चला रही हो वह सडकों पर उतर कर पुरे प्रदेश में बंद करवाए और पार्टी के कार्यकर्ता सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दे. इसमें कौन सी देश भक्ति पैदा होती है या दिखती है

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    आदरणीय सिंह साहब…… जो पार्टी सरकार चला रही हो वह सडकों पर उतर कर पुरे प्रदेश में बंद करवाए और पार्टी के कार्यकर्ता सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दे. इसमें कोई देशभक्ति नहीं है…. अपितु ये राष्ट्रद्रोह के समान घटना है…….. कोई भी दल चाहे वो सत्ताधारी हो या विपक्षी …… अगर वो इस तरह का कृत्य करता है तो ये देशद्रोह माना जाना चाहिए………. आम जन की कमाई को सरकारी संपत्ति मे लगाया जाता है….. उसको आग लगाने वालों को कठोर सजा मिलनी चाहिए……..

deepak pandey के द्वारा
January 27, 2011

पियूष जी आपने बहुत ही प्रासंगिक लेख लिखा है . सभी मुद्दे विचारणीय हैं. अच्छे लेख के लिए धन्यवाद्.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    भाई दीपक जी….. . आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….

vinita shukla के द्वारा
January 27, 2011

पीयूष जी , हमारा देश एक तरफ तो जाति, भाषा, मजहब आदि के नाम पर कितने ही खेमों में बंटा है और दूसरी तरफ ग़रीब और अमीर के बीच की खाई बढ़ती ही जा रही है. निजी स्वार्थ के चलते मुफ्तखोरी तथा रिश्वतखोरी को बढ़ावा मिल रहा है. ऐसे में इस देश के भविष्य का तो भगवान ही मालिक है. अधोगति को प्राप्त होती हुई व्यवस्था का, प्रभावी ढंग से बखान करने के लिए आपको बहुत बहुत बधाई.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    आपकी सभी बातें बिलकुल सही हैं…………… आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….

aksaditya के द्वारा
January 27, 2011

पीयूष जी , बहुत दिन बाद घर लौटा |पहली मुलाक़ात आपसे ही हुई है |तबियत खुश हो गई | ओल्ड इज गोल्ड की तर्ज पर पुराना पर हमेशा प्रासंगिक और यथार्थ का दर्शन कराने वाला लेख | बधाई |

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    एक बार फिर आपको यहाँ देख कर अच्छा लगा……… आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….

naturecure के द्वारा
January 26, 2011

पियूष जी प्रत्येक सवाल का व्यंग्यपूर्ण परन्तु सटीक उत्तर दिया है आपने | एक यथार्थवादी रचना के लिए बधाई ! डॉ.कैलाश द्विवेदी

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    कैलाश जी…….. आपकी उत्साहवर्धक प्रतिकृया के लिए शुक्रिया…………

roshni के द्वारा
January 26, 2011

पियूष जी , हर जवाब का सवाल , हर सवाल का जवाब ……… ज्यदा क्या कहू…… बहुत अच्छा लिखा आपने… गणतंत्र दिवस की शुभ कामनाएं

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….

alka singh के द्वारा
January 26, 2011

पियूष जी देशबासियों को अपने बारे में सोचने से फुर्सत मिले तब देश और देश की महानता के विषय में सोचा जाए ,दूध में ज़हर है ,सब्जियों और फलों में जहर है .राह चलते जरा -जरा सी बात पर लोग जान लेने पर उतारू हो जाते है ,नेताओं को जेबे भरने से फुर्सत नहीं है , शिक्षक कक्षा में नहीं घर पर ज्ञान बाँट रहे हैं .मीडिया भी निष्पक्ष नहीं ,न्यायपालिका भी दागदार ,अब सेना में भी भ्रष्टाचार ,लेकिन फिर भी चंद लोग बचते हैं देश और देशबासियों के बारे में सोचने के लिए उन्ही के भरोसे देश चल भी रहा है और चलता भी रहेगा .

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    आपने सही कहा की …………. चंद लोग बचते हैं देश और देशबासियों के बारे में सोचने के लिए उन्ही के भरोसे देश चल भी रहा है और चलता भी रहेगा…………. पर हमें यहाँ बस इतना ध्यान देना होगा की अगर हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम ऐसे लोगों का हौसला बढ़ाने ओर इनको मजबूत बनाने का प्रयास हमको करना पड़ेगा…………

    rajkamal के द्वारा
    January 26, 2011

    प्रिय पियूष भाई ..आदाब ! और जय हिंद एक आदमी को राह में लुटेरों ने लुट लिया ….. बाद में किसी ने उसका हाल चाल पूछा और देखा तो उसके तन पर सिर्फ एक मात्र लंगोट ही बचा था … पूछने वाले ने हमदर्दी जताते हुए पूछा की क्या कुछ बचा भी है की सब ले गए …. उस आदमी ने बड़े ही गर्व से अपने लंगोट में दे पिस्टल निकल कर दिखाई की यह मैंने उनको नही ले जाने दी , इसको अपनी हुशिआरी से बचा लिया है ….. तो भारत की हालत भी कमोबेश ऐसी ही है …..पास में हथिआर होते हुए भी उसका इस्तेमाल करना गवारा नही है ….. सुंदर विचारणीय लेख और हर तरह से परिपूर्ण लेख पर बधाई

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 29, 2011

    राजकमल भाई……. सही बयान की इस देश की हालत ………. सब कुछ है फिर भी बेचारे……. बने हैं………

abodhbaalak के द्वारा
January 26, 2011

पियूष जी प्रयास कर रहा हूँ की किस तरह इस लेख पर कुछ लिख सकूं पर …… अदभुत…. शब्द मिले जायेंगे तो सम्भाव्तव एक बार फिर से…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    भाई अबोध जी…… इस तरह की प्रतिक्रिया एक संसय पैदा कर देती है…… आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया….

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
January 26, 2011

पियूष जी, सोयी चेतना को झकझोर कर रख देने वाले प्रश्न उठाये हैं आपने, हमें वास्तविकता के धरातल पर आकर आत्म मूल्यांकन करना होगा अन्यथा हम अपने कमियों को दूर नहीं कर पायेंगे न ही विकास कर पायेंगे. वास्तविक गणतंत्र अभी प्राप्त करने के लिए प्रयाश करने होने

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    भाई शैलेश जी……. पिछली बार भी इस लेख पर आपने खूबसूरत प्रतिक्रिया दी थी …….. इस बार कुछ बदलाव के साथ इसको छापा …… ताकि आपकी पिछली प्रतिक्रिया का भी कोई सदुपयोग हो सके……..

aditya के द्वारा
January 26, 2011

पीयूष भाई, नमस्कार अच्छा ही हुआ की अपने ये पोस्ट फिर से पोस्ट की………… पहले मैंने ये शायद कभी नहीं पडी….. पड़ने से भारत के कुछ शानदार चमकदार पहलुओं से परिचित हुआ…………… धन्यवाद………………… आदित्य http://www.aditya.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    यकीन मानिए……….. अदित्य भाई….. ये देश वास्तव मे बहुत महान देश रहा है……. गरिमामय इतिहास रहा है इस देश का……….. हमे इस बात का गर्व होना चाहिए….. की हमें इस देश मे जन्म लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ … पर साथ ही ये ज़िम्मेदारी का आभास भी होना चाहिए की इसके गौरवमय अतीत की ओर इसको हमें ही ले जाना होगा……… तभी इस धरा पर हमारा जीवन सफल है……

January 26, 2011

पियूष जी, यह तो मेरा सॊभाग्य हॆ कि-आपने नया लेख न लिखकर,पहले लिखे लेख को पोस्ट किया वर्ना मॆं तो इस सम-सामयिक महत्वपूर्ण लेख को पढने से वंचित रह जाता.आपने इस लेख में जो मुद्दे उठाये हॆं-वह अभी भी शाश्वत हॆ.आपने अपने देश के अतीत से माहनता के जो उदाहरण दिये-एक दम ठीक हें.यह बात ठीक हॆ कि हमारा अतीत गॊरवशाली रहा हॆ,जिसके लिए हमारे बुजुर्गों ने काफी श्रम किया.आखिर अपने गॊवरशाली अतीत के मद में चूर होकर-हम, अपने वर्तमान नेतिक पतन से मुंह कॆसे मोड सकते हॆ? गाणतंत्र दिवस के अवसर पर बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल उठाये हॆं-आपने.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    विनोद जी……. आपकी उत्साहवर्धक प्रतिकृया के लिए शुक्रिया……….

Deepak Sahu के द्वारा
January 26, 2011

पीयूष जी! कोई भी देश तभी महान बन सकता है जब उसके देशवाशी महान बने! अतः देश को बदलने के लिए हमे खुद को बदलना होगा! कितना दुर्भाग्य पूर्ण है की आज हमारे देश मे ऐसे घटिया कार्य हो रहे हैं जो आपने “इस देश की खूबियाँ” मे बताया है! अच्छा लेख आपका! बधाई! http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/ दीपक

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    दीपक जी…….. सबसे जरूरी बात ये है की कोई भी बदलाव कागजों मे न हो……… अगर आप ओर मैं बदलाव की बात करें….. तो केवल यहाँ लेखों ओर प्रतिकृया मे ही नहीं…….. बल्कि धरातल पर भी कुछ करें…………

NIKHIL PANDEY के द्वारा
January 26, 2011

पियूष जी …. इन प्रश्नोत्तरो के माध्यम से आपने वास्तविक स्थिति पर करार व्यंग किया है .. सब कुछ दुखद लेकिन सत्य है … कितना दुर्भाग्यपूर्ण हास्य है ……..जहाँ पिज्जा Ambulance और Police से जल्दी पहुच जाता है …. और हम इस दुर्भाग्य पर हस कर टालने को मजबूर है… क्योकि जिम्मेदार नहीं है एक बार फिर से हम लुटेरो के राज्यं में जी रहे है पर ये लुटेरे अन्दर के ही है ये 40 चोर हमारे देश का धन परदेसी गुफाओं में जम कर रहे है और हमें फिर से कंगाल बना रहे है … अलीबाबा हम सबको बनना पड़ेगा… बढ़िया लेख है .. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये..

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    निखिल जी……. सही कहा आपने इन चोरों की गुफा का नाम ही स्विस बैंक है……… . …….

Alka Gupta के द्वारा
January 26, 2011

पीयूष जी . अपने तार्किक उत्तरों के साथ आपकी यह प्रस्तुति निश्चित ही सराहनीय है इस लेख को पढ़ कर हम सभी भारतीय नागरिकों की आँखों पर बंधी पट्टी खुल जानी चाहिए और अब एक जुट होकर प्रयत्न करना चाहिए जिससे हमें सोने की चिड़िया कहलाने वाला देश पुनः मिल सके इसके लिए अपने हृदयों में राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव व देश प्रेम की भावना जाग्रत करना है तभी संभव है !ऐसी प्रस्तुति के लिए बधाई ! आपको गणतंत्र की शुभकामनाएं !

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    अल्का जी …… ये बड़ी त्रासदी है की हम सभी इस सत्य से परिचित हैं फिर भी कोई बदलाव नहीं है………. अगर हम सभी ऐसा ही चाहते हैं तो ऐसा क्यों नहीं हो रहा है………. कहीं ऐसा तो नहीं की हम खुद से ही झूठ बोलने के आदि हो गए है…….. जिस तरह हम गंगा मे डुबकी लगा कर अपने सारे पाप धोने के आदि है…….. उसी तरह कहीं हमें समाज मे बदलाव की बात करके आत्म संतुष्टि की आदत भी तो नहीं हो गयी…….. आपको भी गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें……………

rahulpriyadarshi के द्वारा
January 26, 2011

खद्दर की लंगोटी,चांदी की पीकदान; सौ में अस्सी बेईमान,फिर भी मेरा देश महान. महोदय जब निर्णय लेने का अधिकार किसी अंधे को दिया जाए फिर राह तो भटकना ही था. बिलकुल सही कहा है आपने.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    वास्तव में इस देश में सबसे बड़ा अँधा कोई है तो वो कुछ मतदाता……. जो 5 साल तक सरकार को कोसते हैं और फिर शराब की एक बोतल या चंद रुपयों के लिए वोट बेच देते हैं……. जो धर्म, जाति, संप्रदाय को देश से ऊपर रखकर वोट देते हैं……….. ….

nishamittal के द्वारा
January 26, 2011

पहले मैंने आपका ये लेख नहीं पढ़ा पीयूष जी,परन्तु आज पढ़ा तो आँखें खुली.अपने स्वर्णिम पर अतीत पर गर्व करना गुनाह नहीं परन्तु केवल उसकी प्रशस्तिगान से तो समस्याओं का समाधान नहीं होता .आज देश की इन समस्याओं को जो आपके मेरे लेख में वर्णित हैं उनको दूर करना और देशप्रेम स्वदेशवासियों को हृदय में जगाना प्राथमिकता होनी चाहिए.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 26, 2011

    मैं  भी इसी बात को कहना चाहता हूँ…. की अगर हम अपनी किसी उपलब्धि को आगे नहीं ले जा सकते तो कम से कम उसको गिराएँ तो नहीं……. ये लगभग नामुमकिन है की भारत एक बार फिर से पहले की तरह सोने की चिड़िया ओर संस्कृति का देश हो जाए …….. पर हमें अभी जो उसकी दुर्दशा है कम से कम उसको तो सुधारना ही होगा…….

ashutosh के द्वारा
November 5, 2010

kai dino ke bad pahali fursat me aapka lekh pada.shayad hum ab kamjor hote ja rahe hai bahut si arngerl chijo ko andekha karana hi hame ab aasan rasta lagta hai.aap jaise sadev jagruk bhartiy ko meri bhadai.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    November 6, 2010

    sir आपकी टिपण्णी ने उत्साह का संचार किया है………… प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद………..


topic of the week



latest from jagran