परिवर्तन की ओर.......

बदलें खुद को....... और समाज को.......

117 Posts

24194 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1372 postid : 1392

ले मशालें चल पड़े है लोग हिंदुस्तान के............

Posted On: 21 Aug, 2011 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

ले मशालें चल पड़े है लोग हिंदुस्तान के
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग हिंदुस्तान के

कह रही है झोपड़ी और पूछते है खेत भी
कब तलक लुटते रहेंगे लोग हिंदुस्तान के

बिन लड़े कुछ भी नहीं मिलता यहाँ ये जानकर
अब लड़ाई लड़ रहे है लोग हिंदुस्तान के

चीखती है हर रुकावट ठोकरों की मार से
बेड़िया खनका रहे है लोग हिंदुस्तान के

लाल सूरज अब उगेगा देश के हर गांव में
अब इकटठे हो रहे है लोग हिंदुस्तान के

कफ़न बाँधे हैं सिरों पर हाथ में तलवार है
ढूँढने निकले हैं दुश्मन लोग हिंदुस्तान के

दे रहे हैं देख लो अब वो सदा -ए-इंक़लाब
हाथ में परचम लिए हैं लोग हिंदुस्तान के

एकता से बल मिला है झोपडी की साँस को
आँधियों से लड़ रहे हैं लोग हिंदुस्तान के

देख ‘बल्ली’जो सुबह फीकी दिखे है आजकल
लाल रंग उसमें भरेंगे लोग हिंदुस्तान के

ले मशालें चल पड़े है लोग हिंदुस्तान के
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग हिंदुस्तान के
—-

ले मशालें चल पड़ें है …लोग मेरे गाँव के …
कुछ इस तरह से थी बल्ली सिंह जी की ये रचना ….. किन्तु वर्तमान परिदृश्य के अनुसार मैंने इस मे मेरे गाँव के की जगह हिंदुस्तान के कर दिया है……..

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abodhbaalak के द्वारा
August 25, 2011

पियूष जी, सुन्दर कविता को हमसब के सामने रखने के लिए आपका धन्यवाद…. सटीक बैठती है …. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Klondike के द्वारा
    July 12, 2016

    duda es un día &#2es0;82pacial”, y es que como publican en algunos blog, ya está aquí la beta del WordPress 2.6. No obstante cuando fuí a la web de wordpress, había algo que no me cuadraba en la web, y era nada

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 22, 2011

पीयूष भाई, बहुत ही सार्थक, सामयिक एवं उम्दा प्रयास। आभार,

ashutoshda के द्वारा
August 22, 2011

पियूष जी नमस्कार ,रचना चाहे किसीकी भी हो प्रस्तुतीकरण अगर अच्छा नहीं हो तो अच्छी से अच्छी रचना भी बेकार लगती है और जिस तरह से आपने रचना की प्रस्तुति की है वाकई काबिले तारीफ है काफी दिनों बाद देश भक्ति की रचना पढ़कर अच्छा लगा आशुतोष दा

nishamittal के द्वारा
August 22, 2011

बधाई पियूष जी जोशीली रचना प्रस्तुत करने के लिए.

rajkamal के द्वारा
August 21, 2011

प्रिय पियूष जी ….नमस्कार । पहले पहल तो बेयकीनी से पढ़ा फिर खुशी हुई कि आपने इस कला में भी हाथ आजमाने का प्रयास किया है …… लेकिन फिल्म के अंत में सस्पेंस खुला कि यह समसामयिक रचना किसी और कि है खैर आज के माहौल में इस से बढ़िया रचना हो ही नहीं सकती धन्यवाद

आर.एन. शाही के द्वारा
August 21, 2011

बल्ली जी की कविता को नया स्वर दिया, इससे कविता की सार्थकता बढ़ी है पियूष जी । रचनाकार यूं ही कालान्तर में भी समाज के काम आते हैं । आपकी प्रस्तुति फ़ेसबुक पर भी टापरेटेड रही है । बधाई ।

surendra shukla Bhramar5 के द्वारा
August 21, 2011

पियूष पन्त जी सुन्दर सन्देश देती सार्थक रचना ..आप सब को श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएं -आइये प्रार्थना करें की आन्दोलन सफल हो ….. आभार आप का भ्रमर ५ दे रहे हैं देख लो अब वो सदा -ए-इंक़लाब हाथ में परचम लिए हैं लोग हिंदुस्तान के एकता से बल मिला है झोपडी की साँस को आँधियों से लड़ रहे हैं लोग हिंदुस्तान के

Alka Gupta के द्वारा
August 21, 2011

आज के परिदृश्य को देखते हुए सार्थक रचना पियूष जी !

Santosh Kumar के द्वारा
August 21, 2011

आदरणीय पियूष जी ,..क्रांतिकारी पोस्ट के लिए हार्दिक धन्यवाद वन्देमातरम


topic of the week



latest from jagran