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तेरा शुक्रिया..

Posted On: 2 Dec, 2011 Others में

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आज एक मित्र के सहयोग से एक कथा पढ़ने को मिली ……. जिसे आपके साथ बाटना चाहता हूँ….. ये कहानी एक यहूदी धनपति रथचाइल्‍ड के संबंध में है —


एक बार रथचाइल्‍ड एक भिखमँगे को अपनी ओर आते देख रहे थे ………  उसकी वेशभूषा दयनीय थी ………. उसको देख कर रथचाइल्‍ड ने मन मे कुछ सोचा और उस भिखारी को अपने पास पास बुलाया……….  भिखारी ने सोचा दाता खुद बुला रहा है तो जरूर कुछ अच्छा भीख में मिलेगा…………  रथचाइल्‍ड धन से ही नहीं अपितु दिल से भी बहुत अमीर था ………….  हजारों आदमीयों की मदद कर चुका था ओर अब भी करता था……….

उसने उस भिखमँगे को अपने बुलाया और अपना कार्ड जेब से निकाल कर कहा……………  ये मेरा कार्ड है………… जब भी जरूरत हो तुम मेरे दफ्तर आया करो……….. भिखारी बोला मालिक ये पेट हर रोज रोटी मांगता है………. तो रथचाइल्‍ड ने कहा ठीक है तुम हर महीने आ जाना …………  मैं हर महीने तुम्‍हें 100 डालर दिया करूंगा…….. तुम इस तरह भटकते हो तुम्हारी अवस्था इस योग्य नहीं की तुम दर दर भटक कर भीख मांगो ……………  भिखारी को तो विश्‍वास ही नहीं हुआ………..  उसे लगा ये आदमी या तो पागल है, या मेरा उपहास उड़ा रहा है…………….


भिखारी ने ये सोचा की जहां घर घर भटक कर भीख मांगता हूँ ………… तो एक बार इस दफ्तर मे जाकर भी देख लूँ क्या पता सच ही बोल रहा हो ………….  उसको रथचाइल्‍ड की बातों मे भरोसा नहीं था ……………………. लेकिन जब भिखारी रथचाइल्‍ड के दफ्तर पहुँचा तो सच ही उसे 100 डालर मिल गये…………….  अब तो वह हर महीने उसके ऑफिस जाता और अपने 100 डालर ऐसे लेता जैसे अपनी मेहनत का पैसा ले रहा हो……………

जैसे उसे उसके श्रम के फलस्वरूप ये वेतन मिल रहा हो …………  कभी अगर दो चार मिनट क्लर्क कुछ और काम में उलझ जाता……..  तो वह शोर मचाने लग जाता की उसे कितनी देर हो गई यहां पर आये हुए………………  कोई उस की और ध्‍यान नहीं देता है……………  वो कहता की जब तुम्‍हें पता है की आज पहली तारीख है………… ओर मैं पैसे लेने आऊँगा, तो सब बातों को इंतजाम पहले से ही क्‍यों नहीं करते…………….  कितना समय हमारा खराब होता है……….. मैं कोई फालतू तो नहीं हूँ……….. हमें भी बहुत काम करने होते है…………….  उसकी ये बाते सुनकर क्लर्क मन ही मन हंसता…………….


कोई 7-8 साल तक ऐसा चलता रहा………….  वह हर पहली तारीख को आता और अपने सौ डालर ले कर चला जाता…………. रथचाइल्‍ड ने बहुत धन बांटा, ऐसे और न जाने कितने ही भिखारी उसके यहां से यूं ही धन ले जाते थे…………. एक बार जब वह भिखारी आया तो क्‍लर्क ने कहा की इस महीने से तुम्‍हें पचास डालर ही मिलेंगे………….  क्‍योंकि मालिक को व्‍यवसाय कोई खास ठीक नहीं चल रहा है………….

तो उस भिखारी ने उस क्लर्क से पूछा ऐसा क्‍यों ? क्‍या तुम्‍हारी तनख्‍वाह में भी कुछ कमी हुई है…………. क्लर्क ने कहा नहीं…………. हमें तो पूरी ही मिलती है………….तब भिखारी ने उसकी और घूर कर देखा ………. तो ऐसा हमारे साथ ही क्‍यों हो रहा है…………. सालों से हमें सौ डालर मिल रहे है………….


क्‍लर्क ने कहां मालिक की लड़की की शादी है…………. उस में बहुत खर्च करना है…………. इस लिए उन्‍होंने दान को आधा कर दिया गया है…………. वह भिखारी तो एक दम आग बबूला हो गया और चिल्लाने लगा…………. उसने कहा बुलाओ मालिक को मैं बात करना चाहता हूं, मेरे पैसे को काट कर अपनी बेटी की शादी में लगाने वाला वह कौन होता है…………. एक गरीब आदमी के पैसे काटकर अपनी लड़की की शादी में मजे उड़ाने वाले गुलछर्रे उड़ाने वाला वह कौन होता है…………. बुलाओ, अपने मालिक को कहां है वो ?


रथचाइल्ड ने अपनी आत्‍म कथा में लिखा है, कि मैं गया और मुझे बड़ी हंसी आयी…………. लेकिन मुझे एक बात समझ में आयी कि यही तो हम परमात्मा के साथ करते है………….
यहीं तो हम सबने परमात्‍मा के साथ किया है। जो मिला है उसका धन्‍यवाद नहीं देते। उस भिखारी ने दस साल में कभी एक दिन भी रथचाइल्‍ड को धन्‍यवाद नहीं दिया। लेकिन पचास डालर कम हुए तो वह नाराज हो गया। शिकवा शिकायत की। आगबबूला हुआ। कि उसके पचास डालर क्‍यों काटे जा रहे है।

*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*

वास्तव मे यह बिलकुल सही है…. हम सब यही कर रहे है…. फिर चाहे वो अपने माता पिता के साथ हो या फिर देश के प्रति हम यूं ही व्यवहार कर रहे हैं…….
हम जब भी अपने माता पिता, सगे संबंधियों या देश से जब तक प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से कुछ पा रहे होते हैं हम धन्यवाद नहीं कहते … किन्तु जब किसी मजबूरी या किसी कारणवश ये हमें कुछ दे पाने मे असमर्थ होते हैं तो हम शिकायतों का ढेर लगा देते हैं…… यहाँ तक की हमने भगवान को तक अपने इस व्यापार का अंग बना लिया है … हम प्रसाद ओर भोग का लोभ देकर अपने हित साधना चाहते हैं… ओर जब ऐसा हो जाता है तो हम इसे कर्मों का फल बता कर भगवान को इस से अलग कर लेते हैं… किन्तु जब ये नहीं होता है तो हम भगवान को निष्ठुर ओर निर्दयी बता कर अपनी असफलता उसके सर थोप देते हैं………..


तो आइये मिलकर शुक्रिया अदा करें उस परमात्मा का जो कई बार हमें इतनी खुशी तो देता है की लगे की बस इस एक पल मे ही जीवन सफल हो गया…….. पर कभी भी इतना गम नहीं देता की लगे बस अब अंत आ गया……….. ये हमारे ही नज़र का फेर है की छोटी सी असफलता को कई बार हम अंत मान लेते हैं…… जबकि वो ही नई शुरूवात का केंद्र होती है………..


आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें……… नव वर्ष आप सभी के जीवन मे नया उत्सव नया प्रकाश लाये….. भारत वर्ष इस नूतन वर्ष मे उच्चतम शिखरों को प्राप्त करे………. इन ही कामनाओं के साथ…………



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72 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dinesh aastik के द्वारा
December 6, 2011

पंत जी, नमस्कार स्वीकार करें, मानव स्वभाव की सटीक प्रस्तुति के लिये बधाई, एवं प्रेरक प्रसंग से अवगत कराने लिये धन्यवाद।

akraktale के द्वारा
December 4, 2011

पियूष जी नमस्कार, बहुत सुन्दर कहानी आपने शेयर कि आपका हार्दिक अभिनन्दन.ऐसी ही कहानिया हमें झकझोर देती हैं. मैंने भी कभी जीवन में इश्वर को कभी कोसा हो तो मै इश्वर से क्षमा माँगता हूँ. एक बार पुनः अतिसुन्दर कहानी के लिए आभार.

December 3, 2011

बहुत सुंदर कहानी.. पर जहां तक मेरा सवाल है, मुझे तो अभी भी भगवान् से शिकायत है. उसे अपनी किसी बेटी की शादी करने के लिए मेरे हिस्से की ख़ुशी में कटौती लगानी पड़े, इतना मजबूर वो नहीं है. हाहा..! अन्यथा न लें, सुन्दर, अति सुन्दर प्रस्तुति. सादर शुभकामनाएं.

naturecure के द्वारा
December 3, 2011

आदरणीय पियुष जी सादर अभिवादन ! बहुत ही प्रेरणादायी प्रसंग ……………………………..बहुत-बहुत धन्यवाद |

nishamittal के द्वारा
December 3, 2011

पियूष जी मानव स्वभाव से जुडा ये प्रेरक प्रसंग उस यथार्थ को वर्णित करता है जब मानव केवल अपेक्षाएं बढ़ाता जाता है और धीरे धीरे उनको जन्म सिद्ध अधिकार मान लेता है.प्रेरक प्रसंग चाहे पढ़े हुए हों या नहीं सर्वदा प्रेरणा देते हैं.

sumandubey के द्वारा
December 3, 2011

पीयूष जी नमस्कार कहानी आज के समय पर बिलकुल सही है आपने सच लिखा यही मानव स्वभाव में हो गया है .

omdikshit के द्वारा
December 3, 2011

पन्त जी, नमस्कार. गनीमत है कि,सम्भवतःवहां, उस समय मानवाधिकार -आयोग ,नहीं था,अन्यथा भारत में होता,तो वह जरूर चला जाता.हमारे देश में तो आज -कल ,कुछ लोगो ने परिश्रम त्याग कर ,हाथ फ़ैलाने को अपना अधिकार मान लिया है. बहुत अच्छा विषय.

Amita Srivastava के द्वारा
December 3, 2011

पियूष जी नमस्कार सन्देश देती हुई अच्छी कहानी , मुझे लगता है मानव मन हमेशा पाना चाहता है ,जब तक मिलता रहा ,सब अच्छा, जहाँ मन का न हुआ सब बुरा ही बुरा | ये कहानी हम सबको बहुत कुछ सिखा जाती है | धन्यवाद

Abdul Rashid के द्वारा
December 3, 2011

आदरणीय पियूष जी सादर नमस्कार कुछ बाते है जो छू जाती है कुछ कहानियाँ है जो कह जाती है लेकिन जीवन को राह दिखा दे तो बड़ी बात सप्रेम अब्दुल रशीद

vinitashukla के द्वारा
December 2, 2011

इंसानी व्यवहार का गहराई से विश्लेष्ण करने वाली इस कहानी ने बहुत अच्छी सीख दी है. बधाई पीयूष जी.

Santosh Kumar के द्वारा
December 2, 2011

आदरणीय पियूष भाई जी ,.बहुत ही सुन्दर और शिक्षाप्रद कहानी ,.और आपके अनुकरणीय विचार ..हार्दिक आभार

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    December 2, 2011

    प्रिय संतोष जी ….सप्रेम नमस्कारम ! हमारे पियूष भाई की यह कहानी “सदाबहार” है ! प्रतिकिर्या के लिए आपको मेरी तरफ से आभार मुझको भी मेरी तरफ से धन्यवाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

shashibhushan1959 के द्वारा
December 2, 2011

मान्यवर पियूष जी, सादर. आज के परिप्रेक्ष्य में यह कहानी बिलकुल सटीक है.

krishnashri के द्वारा
December 2, 2011

महोदय , बहुत ही सुन्दर कहानी ,जीवन का सार समझाती हुई , मंच पर साझा करने के लिए आपका धन्यवाद .

allrounder के द्वारा
December 2, 2011

अच्छी और शिक्षाप्रद कहानी पियूष जी, और उस पर उत्तम विचारधारा ! आभार !

Tamanna के द्वारा
December 2, 2011

पीयूष जी, बहुत अच्छी रचना..हमें जो मिला है उसे से संतुष्ट रहने की कोशिश करनी चाहिए. लेकिन कभी किसी का दिया हुआ नहीं अपनी मेहनत से कमाए हुए धन और वस्तुओं का उपभोग करना चाहिए.

December 2, 2011

पीयूष भाई ॥एक सुंदर एवं संदेश प्रद कहानी मंच पर लाने लिए बधाई !!!मीनू जी के वक्तव्य से शत प्रतिशत सहमत हूँ….आदमी शिकायती होता है…..कुछ उदाहरण तो राज ही देखने को मिल जाते हैं…

minujha के द्वारा
December 2, 2011

बहुत अच्छा आलेख मैने कही पढा था कि इंसान ही ऐसा प्राणी है,जो शिकायत करता हुआ पैदा होता है,शिकायत करता हुआ जीता है और शिकायत ही करता हुआ मर जाता है,हम ये नहीं देखते कि हमने क्या पाया,पर जो नही मिला उसकी शिकायत हम करना नही भूलते,इतने अच्छे विषय पर लिखने के लिए आप बधाई के पात्र है.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
December 2, 2011

पीयूष जी बहुत सुन्दर ..सीख देता हुआ ..सटीक लेख …काश हम इन सब बातों से कुछ सीखें …. भ्रमर ५ हम जब भी अपने माता पिता, सगे संबंधियों या देश से जब तक प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से कुछ पा रहे होते हैं हम धन्यवाद नहीं कहते … किन्तु जब किसी मजबूरी या किसी कारणवश ये हमें कुछ दे पाने मे असमर्थ होते हैं तो हम शिकायतों का ढेर लगा देते हैं…… यहाँ तक की हमने भगवान को तक अपने इस व्यापार का अंग बना लिया है … हम प्रसाद ओर भोग का लोभ देकर अपने हित साधना चाहते हैं

    jlsingh के द्वारा
    December 2, 2011

    पीयूष जी, हार्दिक अभिवादन! बहुत सुन्दर कथा सुनाई(पढ़ाई) आपने! इसके लिए आपको अभिनन्दन! बाकी मैं भी उन्ही बातों का कायल हूँ जिसे आपने अंत में लिखा है और भ्रमर जी ने उद्धृत किया है! बहुत बहुत बधाई!- जवाहर!

ज्‍योति के द्वारा
January 14, 2011

अटुट सच्‍चाई से रूबरू कराना इसी को कहते है बहुत ही बेहतरीन लेख पंत जी

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 14, 2011

    आपके द्वारा उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया…………

वाहिद के द्वारा
January 4, 2011

सत्यवचन पीयूष जी! कितनी प्रेरणास्पद कथा है यह! बिना किये आदमी को कुछ मिल जाये तो वो उसका महत्व नहीं समझता| अथक परिश्रम और लंबे समय में प्राप्त उपलब्धि हमें अपनेआप से, अपनों से और अपनी जड़ों से जोड़े रखती है| साभार,

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 4, 2011

    वाहिद भाई आपकी इस खूबसूरत प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया….

syeds के द्वारा
January 4, 2011

पीयुष जी, वास्तव मे ऐसा ही होता है…खुदा हमे बेपनाह अता करता है और हम…. खूबसूरत लेख… http://syeds.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 4, 2011

    सही कहा आपने हम उस परमात्मा का शुर्किया अदा करने के स्थान पर एक और नयी मांग रख देते हैं……. आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया….

Aakash Tiwaari के द्वारा
January 3, 2011

पियूष जी, दिल से कहूं तो बहुत ही उम्दा कहानी….वाकई में इस कहानी ने सोचने पर मजबूर कर दिया… “आप हंसते रहे मुस्कुराते रहे, नया साल का हर दिन आपका जगमगाता रहे, खुशियाँ मिले इतनी की आप गिन न सको, दुनिया में आपके ही चर्चे होते रहे”… नववर्ष की आपको तथा आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाये.. http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आकाश जी……. हमारी भी ईश्वर से यही प्रार्थना है की ये वर्ष आपके जीवन मे ढेरों खुशिया लेकर आए…………

दीपक जोशी DEEPAK JOSHI के द्वारा
January 3, 2011

पीयूष जी, भई वास्‍तव में लेखन में आप मंझते हुए नजर आ रहे है। लगता है अगले हॉल आफ फेम की फेहरीस्‍त में आप को भी स्‍थन मिला समझो। बहुत ही सुंदर कहानी एक सत्‍य से परिचय करवाती हुई। बधाई। -दीपकजोशी63

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    उत्कृष्ट व्यंग……….. आदरणीय दीपक जी……. यहाँ फीचर्ड सूची मे टंगना दूभर है ओर आप …………………. इस स्नेह भरी प्रतिकृया के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया…………..

aditya के द्वारा
January 3, 2011

पन्त जी, नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये. उत्तम सन्देश देती हुई ये सुन्दर कहानी वास्तविकता के नज़दीक हैं. मैं पहले भी कह चूका हूँ कि आप ब्लॉग के विशेषज्ञ बन चुके हैं. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण है. धन्यवाद/ आदित्य http://www.aditya.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    किसी कहानी को अपने शब्दों मे कहना कुछ बड़ी बात नहीं है……… ये आपका  स्नेह है जो इस तरह की प्रतिक्रिया आपने दी………..

deepak kumar के द्वारा
January 3, 2011

जनाब ये कहानी आज के दौर में बहुत ही प्रासंगिक है जब किरोड़ी के भिखारी आरक्षण की मांग को लेकर आग बबूला हो रहे है.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    दीपक जी …… आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया….

nishamittal के द्वारा
January 3, 2011

सही कहा पियूष जी आपने कोई भी सुविधा मिलने पर हम उसको अपना अधिकार मानते हैं,चाहे वो ईश्वर के द्वारा प्रदत्त हो,माता-पिता ,देश या किसी आत्मीय के द्वारा.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आदरणीय निशा जी ……… आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया….

suryaprakashtiwadi के द्वारा
January 2, 2011

पियूष भाई,सुन्दर व प्रेरक रचना के लिए बधाई.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    भ्राता सूर्य प्रकाश जी ……… आपकी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया….

div81 के द्वारा
January 2, 2011

हम सदा ही ऊपर वाले से मांगते रहते है……… मगर कभी इस बात का शुक्रिया अदा नहीं किया की हमको इतना खुबसूरत जीवन दिया है | इस जीवन को सजना या बिगडना हमारे हाथ में | एक अच्छा सन्देश देती हुई कहानी के लिए आभार

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया………

danishmasood के द्वारा
January 2, 2011

सन्देश देती सुन्दर प्रस्तुति नव वर्ष मंगलमय हो

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आपकी प्रतिकृया के लिए हार्दिक शुक्रिया…………. आपको भी नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनायें……..

rajkamal के द्वारा
January 2, 2011

प्रिय पियूष भाई ….नमस्कार ! आप का ब्लाग पढ़ कर बचपन में सुनी हुई एक कहानी याद आ गई ….. शायद कभी जिंदा होकर लिख पाऊ …. आप कों सपरिवार नया वर्ष खुशहाली भरा और कल्याणकारी हो … इसी कामना के साथ

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    राजकमल भाई आपका शीघ्र ही पुनर्जन्म हो ….. और आप उस कहानी को हमारे साथ बांटे……… ऐसी हमारी प्रार्थना है……. आपकी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……….

Alka Gupta के द्वारा
January 2, 2011

पीयूषजी , बहुत ही अच्छा सन्देश देती हुई यह कहानी लोगों को कुछ सोचने के लिए विवश कर देती है … नव वर्ष पर सुन्दर प्रस्तुति | नए साल २०११ की सपरिवार आपको मेरी हार्दिक शुभकामनाएं !

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    अलका जी…. आपको भी पुरे परिवार के साथ नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

abodhbaalak के द्वारा
January 2, 2011

Piyush ji vaastv me aapki is रचना ने सोचने पर विवश कर dia ki ham daata ke kitne nashukre hain. wo kitna dayalu aur ham….. bahut hi sundar रचना…. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    भाई जी…. आपको नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

January 2, 2011

पियूष जी एक शिक्षाप्रद कहानी के माध्यम से आपने जो सन्देश दिया है वो काबिले तारीफ़ है. इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं. आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    भाई रतूड़ी जी…. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

RaJ के द्वारा
January 1, 2011

मनुष्य के व्यवहार की सटीक अभिव्यक्ति करती नववर्ष की प्रस्तुति पर बधाई व् नववर्ष की शुभकामनाये

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    राज जी…. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

allrounder के द्वारा
January 1, 2011

पियूष भाई एक अच्छे लेख के लिए बधाई, और नववर्ष के लिए शुभकामनाये !

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    भाई सचिन जी…. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

s.p.singh के द्वारा
January 1, 2011

प्रिय पियूष जी वर्ष पहली ही पोस्ट अति सुन्दर सम सब भी तो यही कर रहे मालिक का धन्यवाद करने के स्थान पर रोज ही उससे कुछ न कुछ मांगते ही रहते हैं.— धन्यवाद.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आदरणीय सिंह साहब…. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

HIMANSHU BHATT के द्वारा
January 1, 2011

piyush bhai….. thanks for presenting a very interesting story….. आपका प्रस्तुतीकरण लाजवाब है…. नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं…

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……सर .

rajkamal के द्वारा
January 1, 2011

प्रिय पियूष भाई …. नमस्कार आपकी कहानी अति उत्तम है ..इस मंच की कुछेक बेहतरीन रचनायों में से एक कही जा सकती है …. लेकिन मैं दूसरों की तरह बड़ी -२ बाते नही करूँगा ….. क्योंकि मुझे नही लगता की अभी के हालात में मेरे में कोई बदलाव आ सकता है …. आपको परिवार सहित नए वर्ष की मंगलकामनाए

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    भाई राजकमल जी…. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

rahulpriyadarshi के द्वारा
January 1, 2011

अति सुन्दर,प्रेरक और मार्गदर्शक सन्दर्भ दिया है आपने,सच्चाई का आइना है यह.

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक शुक्रिया…….

Ramesh bajpai के द्वारा
January 1, 2011

प्रिय पियूष जी नव वर्ष पर खूब सूरत उपहार सी यह पोस्ट | बधाई | हार्दिक मंगल कामनाओ सहित

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आदरणीय बाजपाई जी…. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

Deepak Sahu के द्वारा
January 1, 2011

पीयूष जी बहुत ही सुन्दर एवं शिक्षाप्रद कहानी है आपकी! नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं धन्यवाद दीपक http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    दीपक जी…. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

Rawal Kishore के द्वारा
January 1, 2011

वाह दोस्त क्या बात लिखी है सच में ही दिल में घर कर गयी ना चाहते हुए भी पढने को विवश हो गया और आपने आज हमें इस लेख को पढने का माध्यम बन कर खुद अपना जीवन भी सार्थक बना लिया है और हमें भी क्रतार्थ कर दिया धन्यववाद असल में यह हमें न्यू इयर का सबसे बेहतरीन तोहफा मिला है हमें आपकी तरफ से धन्यवाद अगले लेख का इंतज़ार रहेगा

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    रावल किशोर जी…. आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

ashvinikumar के द्वारा
January 1, 2011

पियूष भाई नव वर्ष की हार्दिक शुभकामना,,बहुत दिनों के बाद आत्ममंथन करने योग्य लेख /कथा मंच पर प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक धन्यवाद …..जय भारत

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    भाई अश्विनी जी…. आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं………. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया……

roshni के द्वारा
January 1, 2011

पियूष जी बहुत ही शिक्षाप्रद कहानी आपको भी नव वर्ष की शुभकामनाएं । आगामी वर्ष अपने आगमन् के साथ आपके जीवन में खुशियों की बहार लाएं और सम्पूर्ण वर्ष आप व आपके परिवार के लिए मंगलकारी हो। रौशनी

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    January 3, 2011

    आपको और आपके परिवार को भी इस नए वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं ……….. प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया…….


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