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भारतीय राजनीति में सुधार.....

Posted On: 7 Feb, 2012 में

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वर्तमान दौर भारतीय राजनीति के पतन का दौर है। भारतीय राजनीति अपने निम्नतम स्तर पर पहुँच चुकी है। अफसोस इस बात का है की हम सभी इस बात को उद्घोषित तो करते हैं और राजनैतिक स्तर पर इसमे सुधार की बात भी करते हैं पर अपने स्तर पर ही कोई बदलाव के लिए तैयार नहीं हैं।

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इस देश मे एक वर्ग ऐसा भी है जो केवल ये कह कर ही आत्म संतुष्टि कर लेता है की राजनीति मे सभी लोग अपराधी है, तो किसी को भी जीता कर या हरा कर कोई लाभ नहीं। ये वो वर्ग है जो हर बार हर सरकार के प्रति नाखुश है। जो नाखुशी मे ही अपना बड़प्पन समझता है। जो प्रत्याशी को परखे बिना उसके प्रति इस लिए दुर्भावना पाल लेता है क्योकी वोट देना उसे समय की बरबादी लगती है। और यही वर्ग हर बात पर लोकतन्त्र की दुहाई भी देता पाया जाता है।

भारतीय राजनीति अगर सुधारों की प्रक्रिया से दूर हट गई है तो इसका कारण कहीं न कहीं हम मतदाता हैं। जो आज भी किसी परिवार या किसी दल विशेष के सम्मुख झुकने मे ही सहज महसूस करते हैं।

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आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने कहा है की जैसी जनता , वैसा राजा । प्रजातन्त्र का यही तकाजा।

तो अगर हमारे नेता अपराधी है तो हम भी अपराधी हैं. क्योकि हम ही उस नेता को चुनने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अंग हैं। कई बार हम चाह कर भी किसी उम्मीदवार को वोट इस लिए नहीं दे पाते क्योकि हम उसका या उसके दल के पूर्व मे विरोधी रहे होते हैं… और अब हमें ये लगता है की इसका समर्थन करना शायद खुद को गलत साबित करना सिद्ध हो… तब हमारी बुद्धि पर अहंकार का पर्दा पड़ जाता है जो ये भी याद नहीं रखता की खुद को मतदान करते हुए केवल आप ही देख रहे होते हैं….. और अपनी नज़रों मे गिरकर किसी की नज़रों मे ऊंचा उठना सबसे बड़ा पतन है…. गलती करना सबसे आसान कार्य है और उसको स्वीकार करना सबसे साहसिक प्रयास…

और हम साहस नहीं कर पाते हैं किसी एक योग्य नेतृत्व को चुनने का ……

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भारतीय राजनीति मे तब तक कोई सुधार नहीं हो पाएगा जब तक की हम लोग निजी हित को राष्ट्र हित से ऊपर रखेंगे… जब तक हम पैसे, शराब या कंबल के बदले वोट देंगे…. जब तक हम अपना आक्रोश ईवीएम के बटन दबाकर नहीं अपितु नेताओं पर जूते या थप्पड़ मार कर उतारेंगे….. हमारा लोकतन्त्र एक ऐसे लोकतंत्र मे बदल रहा है, जहाँ धनवान, नियम पर शासन करते हैं और नियम, निर्धनों पर… क्योंकि हम इन धनवानों को अपना वोट सहजता से बेच कर प्रसन्न हैं…..

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राजनीति मे सुधार के लिए जनमानस की सोच मे सुधार की आवश्यकता है….. हमें ये समझना होगा की सरहद पर सिपाही खून जमा देने वाली ठंड और सूखा देने वाली गर्मी मे निरंतर हमारे लिए खड़ा है… हम वहाँ जा कर अपने देश के लिए खड़े नहीं हो सकते पर हम यहाँ इस ओर खड़े होकर एक सक्षम या योग्य नेतृत्व को चुन कर देश सेवा कर सकते हैं…. हम प्रण करें की हमारा वोट जाति, धर्म, धन आदि के नाम पर न बिक कर राष्ट्र के नाम पर दिया जाएगा… और जिस दें हम केवल राष्ट्र हित को सर्वोपरि बना लेंगे उसदिन राजनीति अपने से खुद सुधर जाएगी….

क्योकि हम तब वैसा ही प्रतिनिधि चुनेंगे जैसे की हम खुद हैं…………

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जागिए लोकतन्त्र की रक्षा के लिए आगे आयें………

आँखों का खुलना ही जागना नहीं होता.…. इसलिए अपने विवेक के स्तर से जागिए…..

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

February 8, 2012

आपके एक-एक शब्द ने प्रभाव छोड़ा..! एक जगह ऐसा भी लगा,की मेरे ही मन की बातें शब्दित हो गयी! काफी समय से कुछ कहने की चाह थी अपने देश के फौजियों के लिए. पर समय-या मनस्थिति ने वैसा अवसर नहीं दिया. यहाँ पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई. इसके अलावा, ये फहराता तिरंगा देखकर बहुत हर्ष हुआ. यह बिलकुल ऊपर होता, तो और भी प्रसन्नता होती. हम सब को एक महान राष्ट्र-निर्माण हेतु शुभ-कामनाएं, जय भारत.

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 8, 2012

आदरणीय श्री पियूष पन्त जी, आपकी लेखनी में साफ़-साफ़ दिखता है की आप एक जिम्मेदार युवा नागरिक है और मतदान के दिन सुबह उठकर सबसे पहला काम वोट डालने का करेंगे..लेकिन उनका क्या करे जो आपको वोट डालने जानते समय देखकर हसेंगे और कहेंगे..की ये बदलेंगे देश की तस्वीर…भाई साहब इस देश के लोग बहुत कायर और कामचोर हो चुके है..इन्हें सिर्फ अपनी समस्या ही समस्या नजर आती है..देश की समस्या इन्हें समझ में नहीं आती…बहुत दुःख होता है ऐसे लोगो को देखकर… बहुत ही शानदार और जानदार लेख…….. आपका आकाश तिवारी

yogi sarswat के द्वारा
February 8, 2012

पन्त साब , लोकतंत्र की असली परिभाषा और इसका महत्व ज्यादातर भारतवासी न तो समझ पाया है और न ही समझना चाहता है ! बस भेद बकरियों की तरह अपने वोट को बर्बाद करते हैं हम ! बढ़िया लेख ! हमें भी अपना आशीर्वाद दीजियेगा ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/07

Rajesh Dubey के द्वारा
February 8, 2012

जनता के जागरूक हुए बिना अन्ना का भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहीम सफल नहीं होगा.अब राज्यों के चुनाव में जरुरत है कि जनता अपनी ताकत दिखा दे और भ्रष्टाचारियों को सबक सिखा दे.

akraktale के द्वारा
February 7, 2012

पियूष जी, आपने पूर्वाग्रह वाली जो बात कही है वही आज सबसे बड़ा कारक है चुनाव में गलत व्यक्तियों को विजयी बनाने का. इतना ही मतदाता समझ जाए तो बदलाव निश्चित है.

    Marylouise के द्वारा
    July 12, 2016

    Among the worst dilemma spots over a gentleman body would be the “love ha;1des&#822ln. Enjoy handles are parts of fat deposits that build up close to a man belly. Probably the man spouse of girlfriend may possibly joke about the love handles them getting lovable, nevertheless permit us encounter the truth, they would prefer you to get rid of individuals excess fat deposits.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 7, 2012

आपका कहना सर्वथा उचित है पीयूष भाई। पांच सालों तक कोसने के बावजूद जब हमारे हाथों में सही-ग़लत का फ़ैसला करने की ताक़त आती है तो हम जाति, धर्म, धन आदि मुद्दों के मकड़जाल में फंस कर अपना विवेक खो बैठते हैं। काश आपकी और मेरी तरह हर कोई ऐसा सोचता और करता। सार्थक विषय पर जागरूकता लाने का आपका यह प्रयास निश्चित ही सराहनीय है। साभार,


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