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राजनीति में जातिवाद........

Posted On: 9 Feb, 2012 में

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किसी भी लोकतन्त्र मे मतदान अन्य किसी भी दान से महान है… भारतीय संस्कृति मे कन्यादान को महादान कहा जाता है… पर मतदान इस से भी बड़ा दान है… जहां एक ओर कन्यादान मे पिता अपनी कन्या को किसी नए परिवार के साथ जोड़ कर उसको एक नए जीवन से परिचित करवाता है…. वहीं लोकतन्त्र मे एक मतदाता अपने मत से अपनी मातृभूमि अपने राष्ट्र के लिए नीति निर्धारकों का चयन करता है…

पिता अपनी पुत्री के विवाह के लिए सदैव लड़के के चयन से पूर्व पूरी तरह स्वयं को आश्वस्त कर लेता है की वास्तव मे ये लड़का उनकी पुत्री के लिए योग्य है… तभी वह अपनी पुत्री का हाथ उस व्यक्ति के हाथों मे सौपता है….. उसी तरह एक मतदाता को भी अपना मत दान करने से पूर्व अपने प्रत्याशी के बारे मे पूरी तरह पड़ताल करनी चाहिए…. कही सुनी बातों पर विश्वास न करते हुए… अपने विवेक से काम लेना चाहिए…

योग्य वर के मूल्यांकन के लिए हर पिता के कुछ मापदंड हैं… कभी जाति, कभी गोत्र, तो कभी कभी लड़के का परिवार उनके मूल्यांकन का आधार होते है… उसी तरह मतदाता को भी अपने मापदंड तय करने चाहिए… और वो विकास, स्वच्छ छवि, ईमानदार व्यक्तित्व व प्रत्याशी की वैचारिक क्षमता आदि होने चाहिए… क्योकि इस देश की मिट्टी से हम सभी ने जन्म लिया है… तो इस धरा के लिए हम एक समान है…. हमारी धर्म, जाति व गोत्र भले ही हमारे व्यक्तिगत जीवन कितना भी बड़ा मूल्य क्यों न रखते हों तो भी ये हमारे लिए राष्ट्र से बड़े नहीं हो सकते… ये धर्म, जाति, गोत्र आदि व्यवस्थाएं हम इन्सानो ने बनाई हैं… हमारी इस मातृ भूमि ने नहीं… इसी कारण जब बात राष्ट्र हित की हुई है हर बार सारा राष्ट्र सामाजिक भेदभाव मिटा कर एक साथ खड़ा हुआ है……

हमारी ये मातृ भूमि जितना एक हिन्दू को देती है उतना ही किसी भी अन्य धर्म को भी…… जितना एक ब्राह्मण को देती है उतना ही किसी अन्य जाति को भी देती है… इस भूमि ने हमें नहीं बाटा है अपितु हमने ही इसे कई भागों मे बाट दिया है… इस धरा पर सबका समान अधिकार है… और इसका उत्थान हमारे लिए महत्वपूर्ण होना चाहिए…. कोई फर्क नहीं पड़ता की तिरंगे की शान कोई हिन्दू बचाता है या कोई मुस्लिम …. विषय तिरंगे की शान बचाने का है…

सरहद पर मातृभूमि के लिए लड़ने वालों की जाति का कोई महत्व नहीं होता है…… महत्व उनकी निष्ठा, देश के प्रति समर्पण का होता है…. शहीद की कोई जाति कोई मजहब नहीं होता ….. तो फिर देश के विकास के लिए काम करने वालों की जाति व धर्म क्यों महत्वपूर्ण है…..

जिस अच्छे मृदुभाषी पिता के अयोग्य पुत्र के हाथों मे कन्या का पिता अपनी पुत्री का हाथ नहीं देता… वहीं अनाथ किन्तु योग्य व्यक्ति के हाथों मे अपनी पुत्री का हाथ सौपने मे पिता को कोई एतराज नहीं होता है…… उसी तरह किसी अच्छे से अच्छे दल के दबंग व्यक्ति को वोट देने की तुलना मे कई बेहतर किसी ईमानदार निर्दलीय व्यक्ति को वोट देना है…. कोई फर्क नहीं पड़ता की वो जीतेगा भी की नहीं…. पर जरूरी ये है की इन दलों तक ये सबक पहुंचे की ईमानदार छवि वाले व्यक्तियों की अब भी जनता कदर करती है….. और इस तरह के व्यक्तियों को टिकट देना उनके लिए मजबूरी बन जाए…

अंत मे एक आवश्यक बात…….
युवा इसे अपने लिए समझे और जो इस अवस्था से पार है वे अपने बच्चों (छोटों) के लिए पढ़ें … कि
ये बड़ा विचित्र प्रश्न है……
की जब आपकी परीक्षा मे केवल आपको ही जाना होता है…
और आपके इंटरव्यू मे केवल आप ही अपनी बात रख सकते हैं …..
तो फिर वोटिंग के लिए स्टार प्रचारकों पर निर्भर नेता हमारे प्रतिनिधि क्यों हैं….

जो अपनी बात पुरजोर तरीके से खूद जनता को नहीं समझा सकते वो आपका प्रदेश कैसे चलाएँगे…….
विधानसभाओं मे आपके विधायक महोदय ही होंगे जिन्हें आपकी आवाज़ सदन मे रखनी हैं…….. सोनिया गांधी, राहुल गांधी, नितिन गडकरी, लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, हेमा मालनी, मायावती या अन्य कोई भी स्टार प्रचारक उनकी बात सदन मे नहीं रख सकता…….

तो परखिये अपने नेता को की क्या वो अपने स्तर पर भी कुछ ज्ञान रखता है….. या एक वैचारिक पंगु को आप अपना प्रतिनिधि चुन रहे हैं…..

आपका सही वोट ही भ्रष्ट नेताओं के लिए तमाचा बन सकता है………

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santosh Kumar के द्वारा
February 12, 2012

पियूष भाई जी ,.सदर नमस्ते बहुत ही सार्थक पोस्ट ,.कन्यादान से बड़ा मतदान !.जात न पूछो साधू की !..स्थितिया बदल रही हैं ,.परिवर्तन अब दूर नहीं !…साभार

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 12, 2012

सुन्दर एवं सारगर्भित आलेख.यदि राजनीति से जातिवाद हट जाये तो राजनीति का चेहरा ही बदल जाये.फिर किसी सैम पित्रोदा को उनके तकनीकी ज्ञान एवं योग्यता के कारण ही पहचाना जायेगा न की राहुल बाबा के द्वारा उनकी जाति बताये जाने के कारण. आज एक मतदाता उम्मीदवार की योग्यता एवं कार्यकुशलता को देखता ही कहाँ है?बिलकुल उसी तरह जिस तरह कुछ समय पहले टी.वी पर एक चाय के विज्ञापन में अपने दरवाजे पर वोट मांगने आने वाले नेताजी से व्यक्ति सवाल करता है कि आपकी क्वालिफिकेशन क्या है?

abodhbaalak के द्वारा
February 12, 2012

पियूष भाई सबसे पहले आपसे माफ़ी चौंगा की देर से आपकी पोस्ट पर आया, आप भी जानते हैं की आप उन लेखको में से हैं जिन को मई सबसे अधिक ……… और इसी कारण आपसे यहाँ से बात भी की, पर फिर भी ………. आपने जिस तरह से विवाह और चुनाव के लिए चयन की बात की है वो सच में ……… पर काश हम ऐसे होते, काश …… प्रयास रहेगा की आपकी पोस्ट पर हाजिरी लगाने में देर न लगे पर अगर ऐसा हो जाये तो माफ़ी एडवांस में ….. :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 11, 2012

प्रिय पियूष भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! स्टार प्रचारक लोगों की भीड़ को इकठ्ठा कटके खीचनें के लिए होते है जनता की समस्याओं से उनका कोई लेना देना नहीं होता पंजाब में तो ड्रीम गर्ल अपनी सहयोगी पार्टी का नाम तक भूल गई थी जिनको यह नहीं पता होता की वोह किसके लिए प्रचार करने आए है उनके वादे का क्या ऐतबार करना हाँ लालू जी का जरूर कर सकते है जिन्होंने उनके गालो के जैसी मुलायम सड़के बनाने की बात कही थी हा हा हा हा हा हा हा हा

shashibhushan1959 के द्वारा
February 11, 2012

मान्यवर पियूष जी, सादर ! जातिवाद के नशे का खुमार अब उतार पर है. बिहार इसका ज्वलंत उदाहरण है. परन्तु अभी भी इसकी खुमारी बची है, हमारी सावधानी ही इसका उपाय है. सामयिक एवं संतुलित रचना के लिए साधुवाद !

rahulpriyadarshi के द्वारा
February 11, 2012

नमस्ते पियूष जी,बहुत ही उत्तम आलेख और इसके माध्यम से दिया गया सन्देश…लोकतंत्र में मतदान के द्वारा ही हम अपनी जिम्मेदारी का कुछ हद तक निर्वहन कर सकते हैं,अतः इसके लिए पर्याप्त ध्यान रखने की आवश्यकता है.मैं आपके इस आलेख का स्वागत करता हूँ. :)

Amita Srivastava के द्वारा
February 11, 2012

पियूष जी शायद आज तक मतदाता अपनी वोट की अहमियत नही समझ पाया था किन्तु इस बार जागरूकता आई है और उसका असर अवश्य दिखाई देगा . मतदान व कन्यादान का तुलनात्मक विवरण सराहनीय .

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 11, 2012

आदरणीय पन्त जी, सादर अभिवादन ये बड़ा विचित्र प्रश्न है…… की जब आपकी परीक्षा मे केवल आपको ही जाना होता है… और आपके इंटरव्यू मे केवल आप ही अपनी बात रख सकते हैं ….. तो फिर वोटिंग के लिए स्टार प्रचारकों पर निर्भर नेता हमारे प्रतिनिधि क्यों हैं…. जो अपनी बात पुरजोर तरीके से खूद जनता को नहीं समझा सकते वो आपका प्रदेश कैसे चलाएँगे……. विधानसभाओं मे आपके विधायक महोदय ही होंगे जिन्हें आपकी आवाज़ सदन मे रखनी हैं…….. सोनिया गांधी, राहुल गांधी, नितिन गडकरी, लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, हेमा मालनी, मायावती या अन्य कोई भी स्टार प्रचारक उनकी बात सदन मे नहीं रख सकता……. तो परखिये अपने नेता को की क्या वो अपने स्तर पर भी कुछ ज्ञान रखता है….. या एक वैचारिक पंगु को आप अपना प्रतिनिधि चुन रहे हैं….. आपका सही वोट ही भ्रष्ट नेताओं के लिए तमाचा बन सकता है… सुन्दर प्रस्तुति. बधाई.

vikasmehta के द्वारा
February 11, 2012

piyush ji aankhe kholne vala lekh mai samjhta hoo is lekh ko danik jagran ke akhbaar ke kolm vale pez par chapna chahiye jisse aam aadmi jo internet se door hai vah bhi padh sake dhanyvad

chaatak के द्वारा
February 11, 2012

प्रिय पीयूष जी, जातिवाद का ये जहर तो मानो जड़ों में घुस गया है जबतक इस मनोविकार की उचित दावा नहीं होगी ये ऐसे ही बना रहेगा शुरुआत अच्छी है और कुछ तमाचे पड़ने शुरू हो गए है अब इन तमाचों की संख्या अधिकतम करने की और सभी को कदम बढाने होंगे| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

आर.एन. शाही के द्वारा
February 11, 2012

मतदान और कन्यादान को एक जैसा महत्वपूर्ण मानते हुए काफ़ी रोचक विचार दिये हैं पियूष जी … साधुवाद !

yogi sarswat के द्वारा
February 11, 2012

पन्त जी , सही सवाल उठाया है आपने ! जब हमें अपना विधायक चुनना है तो उसकी ही योग्यता का आंकलन करना चाहिए ! बेहतर लेख ! अबकी बार न जाने क्यों मुझे मेरे लेख पर आपके विचार नहीं मिले ! थोडा समय दीजियेगा ! धन्यवाद ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/07

Rajesh Dubey के द्वारा
February 11, 2012

मतदान की महत्ता को समझे बिना दान देना,मत का अपमान है.कुपात्र को दान बर्जित है.इस लिए सोच समझ कर दान करना चाहिए जिससे पछतान की नौबत नहीं आये. सामयिक लेख. बधाई.

akraktale के द्वारा
February 10, 2012

पियूष जी नमस्कार, बहुत सुन्दर आलेख रिश्ता सोच समझ कर करने की सलाह मन को भा गयी. किन्तु रिश्ते की बात चलाने आये बुजुर्गों को आपने घर के बाहर रहें की सलाह क्यों दे डाली. उनकी भी अपनी भूमिका है.उनके बिना बात आगे नहीं बढ़ सकती. बधाई.

nasir ali tyagi के द्वारा
February 10, 2012

आपका लेख पढ़कर मज़ा आया बहुत सही कहा आपने जब हम अपनी लड़की के लिए अच्छे घर अच्छे खानदान के लडके तलाश करते है तो अच्छा नेता कियूँ नहीं चुनते बस ये देखते है की हमारे शहर का है तो अच्छा ही होगा या फिर पार्टी अच्छी होगी लेकिन जब हम अपनी लड़की की शादी अच्छे घर में करते है की उसका भविष्य अच्छा रहे तो फिर हम अपनी बस्ती,अपना शहर,अपना प्रदेश या आपने देश का भविष्य इन भ्रष्ट लोंगो के हाथ में क्यों देते है ये वाकई हमारी गलती है हमें इसे सुधारना चाहिए ………………धन्यवाद

minujha के द्वारा
February 10, 2012

सरल तर्कों के माध्यम से आपने जो बात कही है,अक्षरश सही है,हमें इन सारी बातों को मतदान के समय याद रखना चाहिए,अच्छा आलेख

Deepak Sahu के द्वारा
February 10, 2012

पीयूष जी नमस्कार! एक सुंदर विषय पर सुंदर ब्लॉग प्रस्तुत किया आपने ! बधाई , , http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/2012/02/04/%E0%A4%85%E0%A4%96%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%9F/


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