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विभिन्न दलों के चुनावी वादे और उन पर खरा उतरने की उनकी संकल्प शक्ति...

Posted On: 16 Feb, 2012 में

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चुनावों से पूर्व होने वाले वालों और बाद मे उनके पूरा न होने से बरबस ही एक गीत याद आ जाता है की…..
कसमें वादे प्यार वफा सब बाते हैं बातों का क्या….
.

चुनावी वादों का साधारण सा गणित चुनावों मे लाभ कमाना है… इसके अतिरिक्त इन वादों का कोई और महत्व नहीं है….. इसी लिए इन्हें चुनावी वादे कहा गया है… वास्तव मे चुनाव नेताओं के अभिनय कौशल व झूठ बोलने की परीक्षा है… यहाँ सभी चुनावी दल ये सिद्ध करने का प्रयास करते हैं की कौन कितना कुशल अभिनेता है और कितना झूठ बोल सकता है…. कौन कितने घड़ियाली आँसू बहा सकता है…… और कौन कितना जनता को भावुक कर सकता है….

पूर्व मे राजनीति मे अभिनेताओं को लाया जाता था……. किन्तु अब सभी राजनेता स्वयं अभिनय करना सीख गए हैं इसलिए इनकी आवश्यकता कम ही हो गई है…… कई बार ये वादे इस तरह की हो जाते हैं की जिनका पूर्ण होना संभव ही नहीं है……. कई बार स्टार प्रचारक एक विधानसभा प्रत्याशी की सभा मे ये घोषणा कर जाते हैं की यदि ये यहाँ से जीत गए तो इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे…… जबकि सब श्रोतागण विधायक प्रत्याशी की योग्यता से पूरी तरह अवगत हैं की उन्हें कोई पद भी मिल पाये तो गनीमत है…….

पर क्योंकि नेता ये जानते हैं की चुनावी वादों से केवल जनता को बहलाना ही तो है इस लिए वो कोई कमी नहीं करते…..
एक बार एक सज्जन ने मुझसे पूछा की क्या क्या वादे करूँ की वोट मिल जाए….. तो मैंने पूछा की जो जो पूरे करने की क्षमता है वो करो…… तो वो बोला वादे की बात कर रहा हूँ ….. काम तो बाद मे जो हो पाएगा वो ही तो करेंगे…. पर अभी तो वादे करने हैं…..

तो मैंने उनको राय दी की जब वादे करने है तो फिर घबराना कैसा…. धरती आकाश और पाताल को एक करने वाले वादे कर लो……… वो सज्जन थोड़ा घबराए…. तो मैंने स्पष्ट किया की इन मतदाताओ को वादे करो की 24 घंटे बिजली, 24 घंटे पानी, गर्मियों मे हफ्ते मे 2 बार बारिश ताकि तापमान अधिक न बढ़े…. जाड़ों मे महीने मे एक बार बर्फबारी का आनंद दिया जाएगा, और जब जब अधिक ठंड हो एक सूरज अतिरिक्त लगवाया जाएगा…

बरसातों मे आवश्यकता से अधिक पानी नहीं बरसने दिया जाएगा…. और अंत मे समूहिक आवेदन पर किसी क्षेत्र विशेष मे आवश्यकता होने पर वहाँ के लिए अतिरिक्त बारिश, बर्फ या सूरज का प्रबंध किया जा सकता है……

वो सज्जन झल्ला गए…… वो बोले की इनता झूठ ये तो जनता सीधे पकड़ लेगी…. तुम तो हरवा दोगे….. मैंने सज्जन से पूछा की क्या आपको आखिर पार्टी ने टिकट कैसे दिया तो वो सज्जन बोले की हमारी जात के वोट यहाँ निर्णायक है……. और फिर पार्टी को वोट देने वालों का समर्थन तो यों ही मिल जाता है….. उन्हें वादों की कोई जरूरत नहीं…….. तो मैंने उन्हें समझाया की क्या आपको ये नहीं लगता की ये जनता पहले ही ये सब जानती है की आपके वादे केवल चुनाव जीतने तक ही है……. उसके बाद आपको कुछ करना है नहीं……

तो फिर आप कुछ भी बोलें…… ये लोग जो जाति, धर्म या दल को देख कर मतदान करते हैं… वो इस सफ़ेद झूठ वादों के बाद भी आपको ही वोट देंगे…… जिन आँखों मे पर्दे पड़े होते हैं उन आँखों को झूठ और सच पहचानने की अगर समझ होती तो पार्टियां आप जैसे लोगों को भला टिकट क्यों देती……

—————- —————- —————- —————- —————- —————-

चलते चलते….. अंत मे ये कहना चाहता हूँ की…….

ये चुनाव आपके विवेक की परीक्षा लेने के लिए ही आयोजित होते हैं…….. और इन नेताओं ने आपको (मतदाताओं को) पहले ही विवेक शून्य घोषित कर दिया है….. उन्होने पहले से ही ये मान लिया है की आपका वोट किस तरह से वो ले सकते हैं…… किन वादों से आप को बहलाया जा सकता है….. अगर ये नेता वादे पूरे ही कर पाते तो आज तक हर चुनाव मे हुए वादों के अनुसार हम सबसे अधिक विकसित राष्ट्रों की पंक्ति मे सबसे आगे होते…….

इस लिए मतदाताओं से अनुरोध …….. वादों पर न जाओ अपनी अकल लड़ाओ…..

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Cheyanne के द्वारा
July 12, 2016

You’ve got to be kidding me-it’s so trtnsparenaly clear now!

chandanrai के द्वारा
March 15, 2012

आदरणीय साहब, आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 18, 2012

प्रिय पियूष भाई ….. सप्रेम नमस्कारम ! आजकल के जागरूक मतदाता सिर्फ खोखले वादों पर ही नहीं बल्कि कम्बल +साड़ी + शराब और नोटों पर भी बहक जाते है मुबारकबाद सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    Grizzly के द्वारा
    July 12, 2016

    Atter en dejlig kjole du har lavet. Jeg kan godt lide dine smÃ¥ detaljer rundt i kanterne. Hvor kan man købe mÃs¸rtenne henne ? Jeg har lige købt en Liberty bog og havde den aha oplevelse at man jo kan se forskel pÃ¥ kvaliten ved at læse navnet, sÃ¥ ved man hvad det kan bruges til. Det er bare sejt. Og jeg ved godt, at du ved det, men jeg har først lige lært det :D Kh. Lis

omdikshit के द्वारा
February 17, 2012

पन्त जी, नमस्कार. आज के नेता संभव को असंभव बना सकते है,असंभव को संभव नहीं.बहुत अच्छी चर्चा. .

shashibhushan1959 के द्वारा
February 17, 2012

आदरणीय पन्त जी, सादर ! “”वादों पर न जाओ अपनी अकल लड़ाओ…..”" सौ बात की एक बात !

chaatak के द्वारा
February 17, 2012

प्रिय पीयूष जी, सादर अभिवादन, सही कहा आपने लोगों को बिना जाति और धर्म का चश्मा लगाये कुछ दीखता ही नहीं है वाडे चाहे जितने कोरे हो अगर बात सजातीय कर रहा है तो वोट उसी को देंगे यही कारन है कि आज इस देश में हर तरह का इंसान मिलता है नहीं मिलता है तो सिर्फ एक हिन्दुस्तानी नहीं मिलता| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

akraktale के द्वारा
February 17, 2012

पियूष जी नमस्कार, पूर्व मे राजनीति मे अभिनेताओं को लाया जाता था……. किन्तु अब सभी राजनेता स्वयं अभिनय करना सीख गए हैं, अब एक चरण और बचा है शायद इसका भरपूर फायदा उठाकर अच्छे लोगों को ही विजयी बनाएं.सार्थक सन्देश देता आलेख.

jlsingh के द्वारा
February 17, 2012

आदरणीय पीयूष जी, नमस्कार! बहुत अच्छी रचना! व्यंग्य के साथ सीख का पिटारा भी आपने खोल दिया जिसे लेना हो ले, न लेना हो तो वादे को ही झेले. साधुवाद!

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 16, 2012

नमस्ते पीयूष जी, आपके विचार बिलकुल उपयुक्त हैं। हमें हमारा अमूल्य मत पूरी तरह से सोच समझ कर ही देना होगा। हमें मत का सदुपयोग करना है न कि मत का दान।  धन्यवाद,

Santosh Kumar के द्वारा
February 16, 2012

पियूष जी ,.सादर नमस्ते शुक्र है जिसको आप मिले वो थोडा अक्ल वाला था ,.अन्यथा वो वादे भी कर देता !…वादों के लिए संकल्प की नहीं कल्पना शक्ति का प्रयोग करते हैं …बहुत सार्थक बात कहती पोस्ट …

yogi sarswat के द्वारा
February 16, 2012

पन्त जी , अपनी बात इस तरह कहना चाहता हूँ चलता रहेगा ये कुर्सी का खेल ! फिर चाहे भारत लेने जाये तेल !!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 16, 2012

प्रिय पन्त जी, सस्नेह. अकल गयी तेल लेने साडी , कुरता , दारू पहले दो लेने वो हमें जानते हम उन्हें जानते दे दो उनका माफ़ी भागे भूत लंगोटी काफी धन्यवाद. वन्दे मातरम

nishamittal के द्वारा
February 16, 2012

बहुत सटीक आकलन राजनीतिक नेताओं के द्वारा मूर्ख बनाये जाने पर


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