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क्या सत्यमेव जयते…….. ?

Posted On 7 May, 2012 Others में

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बड़े पर्दे के कई सितारे छोटे पर्दे पर आए और इस पर्दे को रोशन किया….. अमिताभ बच्चन की बड़ी सफलता से प्रभावित होकर शाहरुख खान, गोविंदा, सलमान खान, संजय दत्त, माधुरी दीक्षित सहित कई बड़े सितारे इस छोटे से पर्दे पर उतरे….


पर एक बार फिर आमिर खान ने साबित कर दिया की हर बार वो आम आदमी की नब्ज पकड़ कर अपने लिए सफलता खोज लेते हैं……

जो लोग आमिर खान की फिल्में देखते हैं वो निश्चित ही ये समझते हैं की हमेशा वो एक संदेशात्मक फिल्म मे अभिनय करते हैं…… एक छोटे से ईशान की कहानी तारे जमीन पर न जाने कितने ऐसे लोगों को आईना दिखा गई जिनके बच्चे कहीं न कहीं उस ईशान जैसे ही थे….. इंजीनियरिंग के छात्रों पर बनी फिल्म (बल्कि छात्रों पर बनी फिल्म जिन्हें कई बार माँ बाप की इच्छा के कारण इंजीनियरिंग करनी पड़ती है…..) 3 इडियट ने उन छात्रों का पक्ष रखा जो कई बार दबाव मे आत्महत्या कर लेते हैं….. या फिर कई बार बेमन से पढ़ाई करते हैं….. रंग दे बसंती ने भ्रष्टाचार के खिलाफ चंद उन युवाओं की कहानी दिखाई जिनहे कभी सामाजिक विषयों से कोई सरोकार ही नहीं था…… पर वो जब व्यवस्था के खिलाफ खड़े हुए तो फिर अपनी जान की बाज़ी लगा दी…..

इसी तरह छोटे पर्दे पर आमिर खान आए उनके कार्यक्रम सत्यमेव जयते के साथ…… इस कार्यक्रम ने पहले प्रसारण से पूर्व ही कई कीर्तिमान बना दिये जैसे ट्विटर, फेसबुक व कई अन्य सामाजिक साइट्स पर यह कार्यक्रम रिकॉर्ड चर्चा ले गया व प्रसारण के पहले ही दिन इस कार्यक्रम ने सफलता के कीर्तिमान बना दिये….. सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले इस कार्यक्रम का पहला दिन कन्या भ्रूण हत्या के नाम रहा….

इस कार्यक्रम के बाद कई लोग जिन्हें शायद ये कार्यक्रम पसंद नहीं आया…. वो आमिर के इस कार्यक्रम के खिलाफ आगे आए…. क्योंकि इस कार्यक्रम के खिलाफ कुछ भी लिखना कहीं न कहीं लिखने वाले को भ्रूण हत्या का समर्थक साबित कर सकता था इसलिए लोगों ने इसके खिलाफ परोक्ष रूप से लिखा….. लोगों ने आमिर की नियत पर सवाल उठाए…..

कुछ ज्ञानियों ने इसे आंसुओं के सहारे टीआरपी जुटाने का नाटक करार दिया……. तो कुछ ने इस कार्यक्रम के लिए आमिर द्वारा ली जा रही फीस को मुद्दा बनाया….. तो कई लोगों ने आमिर के अपनी पहली पत्नी को छोडने को मुद्दा बनाया…..

मुझे इन ज्ञानियों और दिग्विजय सिंह मे कुछ ज्यादा फर्क नहीं लगता …… जो अन्ना के आंदोलन पर कहते हैं की अन्ना खुद भ्रष्ट हैं…… या रामदेव पर कहते हैं की रामदेव ठग हैं….. बालकृष्ण का पासपोर्ट नकली है… पर क्या इन तर्कों से भ्रष्टाचार की लड़ाई को व्यर्थ साबित किया जा सकता है…….. उसी तरह इस कार्यक्रम सत्यमेव जयते के खिलाफ न बोलकर आमिर के विरोध से इन मुद्दों को झुठलाया जा सकता है……

मुझे उन लोगों की सोच पर तरस आता है जो इस कार्यक्रम को आंसुओं के सहारे टीआरपी जुटाने का नाटक कह रहे हैं….. वो भूल जाते हैं की जब संजय दत्त, सलमान खान एक पॉर्न स्टार को आपके घर तक पहुँचते हैं तब आपको उनमें कोई बुराई नज़र नहीं आती…… जब टीआरपी के लिए सास और बहू के बीच कई ऐसे घटनाचक्र बनाए जाते हैं जो घरों को तोड़ते हैं तब कोई बुराई नज़र नहीं आती है……. जब पारिवारिक धारावाहिक कहते कहते कार्यक्रमों मे अश्लीलता को परोसा जाता है तब किसी को कोई बुराई नज़र नहीं आती……..

जब फिल्मों मे नग्नता लिए सुपर स्टार आते हैं….. तब उनका कोई विरोध नहीं…… फिर इस बात पर आमिर का विरोध क्यों….. जब लोग नग्नता दिखाने के लिए पैसा ले रहे हैं तो फिर कोई आईना दिखाने के लिए पैसे ले तो क्या ऐतराज…… और जहां तक बात आमिर और उनकी पहली बीबी के संबंध मे है….. तो हमें इस बात पर भी विचार करना चाहिए की जब हम अपने ऑफिस मे अपनी पत्नी के साथ हो रहे झगड़े की सफाई नहीं देते तो फिर क्यों आमिर अपनी व्यक्तिगत जीवन के लिए अपनी व्यावसायिक जीवन को हानी पहुंचाए……. फिर घर के विषय ऐसे नहीं होते की किसी के घर की घटना को आप समझ सके …… किसी के अपने पत्नी/पति के साथ कैसे संबंध हैं ये उनका घरेलू विषय है…….. जब हम नहीं जानते की उनके इन सम्बन्धों मे किसका कितना दोष है तो हमें उसपर टिप्पणी का कोई हक नहीं है……..

रामायण का लेखक वाल्मीकि पूर्व मे एक डाकू था…… तो क्या इससे रामायण की महत्ता पर कोई फर्क पड़ता है… वाल्मीकि के अंतरतम मे जो क्रांति घटी उसे केवल वाल्मीकि ही समझ सकता था….. ऐसा ही कुछ अंगुलीमाल के जीवन मे भी घटा…….. हम उनको स्वीकार कर लेते हैं क्योंकि उनके होने से हमारे आज पर कोई आंच नहीं आती हैं…… पर जो हमें आज आईना दिखाएगा हम उसका विरोध ही करेंगे……

एक डॉ. जब मरीज को शराब छोडने को कहता है तो उसके ये कहने से की डॉ. साहब खुद शराब पीते हैं….. तो मैं क्यों छोडू…… क्या इसे तर्क संगत माना जाएगा…….

वास्तव मे ये हमारी बेईमानी की परकस्ठा है की हम हर उस बात मे कमी निकालने लगते हैं जो हमारे लिए अपनाना भरी पड़े…. जब बात भ्रष्ट नेताओं की होती है तो हम अन्ना के साथ खड़े होते हैं……. पर जब आंच सरकारी बाबुओं / प्राइवेट संस्थाओं पर आने लगती है तो हम कहते है की टीम अन्ना भटक गई है……

हमें सोचना होगा की क्या हम सत्य के साथ हैं भी……. क्या कहीं हम ही तो सत्य को पराजित  नहीं कर रहे…… अगर ये देश हमारे लिए बड़ा है तो फिर हमें अपने से पहले इसके लिए सोचना होगा…… अन्यथा बड़े बड़े शब्द ही अगर बोलने हैं तो मित्रो इसके लिए हमारे पास बहुत नेता पड़े हैं……… उनको ही ये कर लेने दो……..

कम से कम कल को कोई तो होगा जिसपर हर सारे इल्ज़ाम थोप सकें……..

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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Indian के द्वारा
July 11, 2016

Ab fab my goldoy man.

yamunapathak के द्वारा
May 16, 2012

बहुत ही संतुलित विचार व्यक्त किये हैं आपने.सहमत हूँ.

munish के द्वारा
May 9, 2012

पन्त जी, आपके द्वारा उठाये इस प्रश्न को मैंने जागरण पर ही उन लोगों से पूछा जिन्होंने अन्ना या रामदेव के ऊपर ऊँगली उठायी और मजेदार बात ये है की रामायण का उदहारण भी दिया…….. परन्तु वही ढ़ाक के तीन पात और आपके कथनानुसार उन लोगों की बेईमानी की पराकाष्ठ ……. आपने मुद्दे को बहुत ही जोरदार ढंग से रखा इसके लिए बधाई ……. कृपया एस पी सिंह जी और तमन्ना जी लेख पर गौर फरमाएं…………..!

akraktale के द्वारा
May 9, 2012

पियूष जी नमस्कार, आपका आक्रोश बिलकुल सही है जो लोग आमिर के टीवी शो की मुखालफत कर रहे हैं वे या तो लड़कियों के कातिल हैं या फिर कांग्रेस के सर्व विदित महामंत्री के हम राह हैं. जिनकी आदत सिर्फ और सिर्फ किसी की प्रसिद्धि से परेशान होकर उसकी आलोचना करना हो. आमिर के कार्यक्रम की मै सराहना करता हूँ. उसने भी एक अच्छे मकसद के लिए सरकार को आइना दिखाने का ही कार्य किया है.

    Kaleigh के द्वारा
    July 12, 2016

    Thanks for fighting the fight Father Andrew. Our Children are bomarded daily with TV shows depicting sex as something you just &#2d20;8o” without implication.ie Jersey Shore and 16 and pregnant. Our society most definately needs a return to morals and respect!

jlsingh के द्वारा
May 9, 2012

पीयूष जी, सादर अभिवादन! आपके विचारों का मैं समर्थन करता हूँ! लोगों की आदत हो गयी है नकारात्मक सोच की ! हम स्वयम नहीं बदलना चाहते इसीलिये यह सब करते हैं. मेरा मानना है कि आमिर का यह शो सही वक्त पर उठाया गया सराहनीय कदम है! अच्छी प्रस्तुति के लिए बधाई!

abhilasha shivhare gupta के द्वारा
May 9, 2012

पियूष जी..बहुत सार्थक लेख के लिए बधाई….. मै आपके विचारो से सहमत हूँ… ये सोचने वाले की सोची समझी मार्केटिंग थी, यह क्यों नहीं सोचते की …. यदि थी भी मार्केटिंग तो क्या हुआ… समाज को सन्देश तो दे गयी न…. आम खाने से मतलब है गुठाली गिनने से….,,, मेरे विचार से यदि मार्केटिंग नहीं होती तो यह सच पूरे देश में फैलता कैसे…. हम भारतियों के अन्दर यही तो बात है, की यदि हम कहे की MBA करो, तो शायद लड़का नहीं करेगा…लेकिन जब यह बात जग व्यापक हो जाये की आज-काल हर कोई MBA कर रहा है…तो सारी की सारे भीड़ MBA करने चल पड़ेगी…. इसलिए यही तरीका उचित है लोगो को जागरुक करने का…इसमें कोई खामी नहीं है…..

vivek1959 के द्वारा
May 8, 2012

दोपहर साढ़े बारह बजे शो खत्म होता है और शाम ५ बजे जयपुर में मेडिकल कालेज के छात्र छात्रायें छपे हुये बैनर लेकर रैली निकालते हैं , जाहिर है यह सब सोची समझी मार्केटिंग थी ….

    Piyush Pant के द्वारा
    May 8, 2012

    पर सवाल अभी भी अपनी जगह ही है…….भले ही ये सोची समझी मार्केटिंग थी पर क्या ये मुद्दा गलत था…….. ? मैं कहता हूँ की लाख अन्ना भ्रष्ट हों……. भले बाबा रामदेव के पास काला धन हो पर क्या ये मुद्दा गलत है…… अगर आपको या हमें लगता है की मुद्दा सही है बस इसे उठाने वाला गलत है तो आगे आयें और खुद उठाएँ इस मुद्दे को…….. जब हम घर पर बैठ कर व्यर्थ समालोचना करने के आदि हो चुके हैं तो फिर हमें कोई अधिकार नहीं है की किसी की सार्थक पहल पर आघात करने का…….. हम खुद कुछ करना नहीं चाहते पर जब कोई समाज को आईना दिखाता हैं तो हम उसको दूसरा आईना दिखाने लगते हैं… यदि हम ईमानदार है इस देश के प्रति तो हमें खुद आगे बढ़कर परिवर्तन के प्रयास करने चाहिए…… हम में खुद ये कहने का साहस होना चाहिए की अन्ना (या बाबा या आमिर या कोई भी अन्य जिससे किसी को आपत्ति हो।) आप इस आंदोलन को करने के योग्य नहीं है……… आप जाएँ ये आंदोलन हम करेंगे…….. क्योंकि हम स्वच्छ हैं……. हमने कोई पाप नहीं किया….. पर नहीं हम सब जानते हैं की हमारी नैतिकता केवल हमारे शब्दों तक ही रह गई है……. हम उस मक्खी के समान हो गए हैं जो इंसान के सुंदर शरीर पर भी केवल घाव को खोज कर उसपर ही बैठती है……..

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 9, 2012

    बहुत सही कहा पियूष जी….. पूर्ण सहमति….. यदि अच्छे कार्यो की शुरुवात करने वाला जिन लोगो को गलत लगता है…तो उन्हें सही ढंग शुरुवात करने आगे आना चाहिए ….. अन्ना के आन्दोलन की आलोचना करने वालो से पूछती हूँ, उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कदम उठाए?????….. आमिर जी के शो की आलोचना करने वालो से पूछती हूँ की,,, उन्होंने समाज उत्थान, व कुरीतियों के नाश के लिए क्या कदम उठाए…??? जब हम खुद समाज के लिए कुछ नहीं कर सकते तो हमें करने वालो की आलोचना का कोई हक नहीं…..

    dineshaastik के द्वारा
    May 9, 2012

    मुझे लगता है कि हम  भारतीयों की यह  विशेषता है कि दूसरों की 100 अच्छाईयाँ न देख कर उसकी एक  बुराई पकड़कर बैठ  जायेंगे। और अपनी 100 बुराईयों एक  अच्छाई  से पूरी तरह ढ़क  देगें। आमिर  किस तरह कर  रहा है, यह न देख  कर यदि हम  उसका उद्देश्य  देखें तो समाज  और  देश  के लिये लाभप्रद  होगा। मैं पंत जी और अभिलाषा जी के विचारों से सहमत  हूँ।

    abhilasha shivhare gupta के द्वारा
    May 9, 2012

    कारन जो भी हो…. तरीका जो भी हो…सन्देश तो समाज को मिल गया न…. भारत तो जाग गया न….. हमें आम खाने से मतलब है या गुठलियाँ गिनने से….. हमें हर अच्छी शुरुवात की सराहना करनी चाहिए… वैसे हे हम भारतीय आसानी से नहीं जागते… हमें ढोल नगाड़े, बजा कर…. ही जगाया जा सकता है…

yogi sarswat के द्वारा
May 8, 2012

श्री पन्त साब नमस्कार ! आमिर खान का कार्यक्रम हो या उनकी फिल्म हो , एक कोतुहल तो पैदा करती ही हैं ! अब जब उन्होंने सत्यमेव जयते , को दिखने का फैसला लिए हैं तब भी ! लेकिन कितने लोग हैं जो व्यावसायिकता के साथ साथ समाज की भलाई की बात करते हैं ? मुझे लगता है आमिर खान का ये कार्यक्रम ज्यादा नहीं तो कुछ तो असर जरूर दिखायेगा ! अच्छा लेख

    Jayden के द्वारा
    July 12, 2016

    Articles like this really grease the shafts of knodelwge.

priyasingh के द्वारा
May 8, 2012

घर में अचानक गेस्ट के आ जाने से मै ये प्रोग्राम तो नहीं देख पायी पर सबसे इतनी तारीफे सुनी की अफ़सोस तो बहुत है न देख पाने का और आज आपका ये लेख पढ़ कर अफ़सोस बढ़ ही गया है ……………कन्या भ्रुड हत्या जैसा मुद्दा बहुत ही बड़ा है हर शहर में कई सोनोग्राफी सेंटर है जो ये काम मामूली से पैसे लेकर कर देते है …………..पर बात वही है की उन सेंटरों को कोसने से ज्यादा हमें अपने अंतर्मन में ही झांकना होगा क्योंकि जो पैसे कमाने बैठा है वो तो पैसा कमाएगा ही बस हम उन्हें मौका न दे ………अब अगले रविवार का इंतज़ार है…………….

    Piyush Pant के द्वारा
    May 8, 2012

    इसे आप यूट्यूब पर अभी भी देख सकते हैं………

rahulpriyadarshi के द्वारा
May 8, 2012

पियूष भाई नमस्कार,एक सार्थक उद्देश्य के लिए लिखे गए लेख पर आपको बधाई,यह बात पूरी तरह सही है की अच्छी बातें जहां से भी मिले ग्रहण करना चाहिए,लेख में कुछ तथ्य ऐसे हैं जिनपर पुनर्विचार किया जा सकता है,जैसे बहुत बड़े सितारे अमिताभ जी की सफलता से प्रभावित होकर छोटे परदे पर उतरे,लेकिन उनमें शाहरुख़ खान का नाम भी है,लेकिन शाहरुख़ ने तो अपना कैरियर ही छोटे परदे से शुरू किया था,फौजी,सर्कस और दिल दरया धारावाहिकों में उनके काम ने उन्हें बड़े परदे पर जगह दिलाई थी. जब आमिर खान की फिल्म ‘फना’ आनेवाली थी,उस समय उन्होंने नर्मदा बचाओ आन्दोलन और किसान के मुद्दों को भी उठाया था,जिसे शायद बाद में वो भूल गए और अब उस बारे में कही कुछ नहीं कहते हैं. जिस प्रकार कुछ सांसदों को गलत कहने का अर्थ संसद को झूठा कहना नहीं होता,उसी प्रकार आमिर खान के विरोध को ‘सत्यमेव जयते’ कार्यक्रम का विरोध नहीं मानना चाहिए.यह सही है की अंगुलिमाल डाकू भी वाल्मीकि बनकर रामायण की रचना कर सकने में सक्षम हुए थे,लेकिन इसके लिए उन्होंने अपनी पुरानी जिंदगी का पूरी तरह परित्याग कर दिया था. आमिर ने अपनी पहली पत्नी को किसी मनमुटाव के चलते नहीं छोड़ा,बल्कि लगान की शूटिंग के दौरान किरण राव उनके ज्यादा करीब आ गयी थी,इसलिए उन्होंने सद्भावपूर्ण माहौल में अपनी पहली पत्नी रीना से अलग होने का फैसला लिया.यदि कोई आम मुसलमान ऐसा करता तो लोग ‘लव जिहाद’ और जाने कितने प्रकार के आरोप लगाते.लेकिन चूँकि आमिर सामजिक सरोकारों से जुड़े अभिनता-निर्माता हैं,इसलिए यह सहज स्वीकार्य है.इन तथ्यों से सत्यमेव जयते कार्यक्रम के उद्देश्यों का किसी तरह से विरोध नहीं होता लेकिन निश्चित रूप से अगर कोई समाज में सकारात्मक बदलाव चाहता है,चरित्र निर्माण का जिम्मा लेता है तो उसका चरित्र भी शीशे की तरह साफ़ होना चाहिए,जैसे कि बाबा रामदेव,अन्ना हजारे या फिर बालकृष्ण पर आरोप लगाकर उन्हें गलत साबित नहीं किया जा सकता,क्यूंकि उनपर लगाये आरोप मिथ्या और बेबुनियाद हैं,अगर उनलोगों में थोड़ी भी कमी होती तो आज उनके साथ इतना बड़ा जनसमर्थन कभी नहीं होता.किन्तु आमिर खान के साथ ऐसा नहीं है,उनके साथ कमियों के बावजूद भी बहुत समर्थन है.खैर कमियां अपनी जगह है,किन्तु सार्थक उद्देश्य से जुड़ा हुआ यह शो समाज में सार्थक सकारात्मक बदलाव ले आने की दिशा में अपनी तरह का पहला प्रयास है,मैं इसकी धरातल पर सफलता की कामना करता हूँ.

    Piyush Pant के द्वारा
    May 8, 2012

    भाई राहुल जी…. जहां तक आपका कथन है की शाहरुख छोटे पर्दे से बड़े पर्दे पर गए… पर फिर वो फिल्मों मे ही रहे छोटे पर्दे से उन्होने अलविदा कह दिया था। यहाँ पर इसका जिक्र इसलिए है की अमिताभ ने अपने व्यक्तित्व से छोटे पर्दे पर केबीसी से को न केवल एक मशहूर कार्यक्रम बनाया अपितु छोटे पर्दे से बड़ा पैसा कमाये जा सकने का संकेत भी दिया… तब फिर कई बड़े सितारे पैसे और शोहरत के लिए यहाँ वापस आए…. जहां तक बात आमिर के नर्मदा आंदोलन या किसान आंदोलन से जुडने की और उसे भूल जाने की है तो मेरा सीधा सीधा मानना है की ये देश जितना अन्ना का है या रामदेव का है या आमिर खान का है उतना ही एक साधारण आदमी का है…… हम खुद घरों मे छुपे बैठे हैं… पर कोई थोड़ा सा भी कुछ कोशिश करे तो हम चाहते हैं की वो उसे अंजाम तक भी पहुंचाए… जबकि ये बात भी हम जानते हैं की इन कलाकारों का इस तरह के आंदोलनों से जुड़ना उनके लिए घातक है… जब ओमपुरी अन्ना के अनशन मे बोलकर आए तो उनको सरकार ने घेरा… पर कोई आवाज़ उनके समर्थन मे नहीं उठी…. फिर क्यों कोई हमारे लिए लड़े…. किसी के घर के क्या हालत रहे … पति पत्नी के बीच किस तरह के सबंध है और क्यों हैं….. कई बार अपने संबंधों पर खुद पति पत्नी ही नहीं कुछ बोल पाते……. इनपर किसी भी तरह की कोई चर्चा का महत्व नहीं है….. जहां तक सत्यमेव जयते कार्यक्रम के उद्देश्यों के विरोध न होने की बात है तो सीधा प्रश्न ये उठता है की तब आमिर के खिलाफ कुछ लिखा या बोला नहीं गया जब की आमिर ने किरण राव से शादी की……. पर जब सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध कुछ कहा तो फिर विरोध शुरू हो गया…. शाहरुख न जाने कितनी बार खुद को मुस्लिम बता कर चर्चा लेने का प्रयास करते हैं कभी एयरपोर्ट पर तो कभी कहीं और…. पर इनकी ओर से कभी कोई सामाजिक प्रयास होते नहीं दिखे…. भले ही वो मुस्लिम उत्थान के लिए हुए होते …. अगर मुस्लिम परेशान है तो उनके लिए क्या कुछ इनहोने किया हम नहीं पूछते….. पर कल को शाहरुख हमारे समाज को आईना दिखाएगे तो उनपर उंगली शायद हम तब ही उठाएंगे…….

nishamittal के द्वारा
May 8, 2012

पीयूष जी,बहुत अच्छे उदाहरणों के साथ आपने ये  बताया कि सद्प्रयास की सराहना करनी चाहिए.क्योंकि कम से कम  सार्थक उद्देश्य के लिए है.


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