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सरकारें.........

Posted On: 11 Aug, 2012 Others में

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सरकारें सोती रहती हैं जब……
जंतर मंतर पर धरने होते हैं….
ये अक्सर सोई रहती हैं जब….
घोटाले घपले होते हैं…..
जब बात राष्ट्र के हित की होती है……
बड़ी गहरी नींद ये सरकारें सोती हैं…
जब आम जन की आवाज़ें नारों में गुंजा करती हैं….
तब ये सरकारें बस यूं ही सोया करती हैं….

ये सोती रहती हैं जब…
जब कालेधन और भ्रष्टाचार की बात चले……
बस सोई ही रहती हैं जब…..
शांति सद्भावना हेतु उपवास चले…..
ये सोती ही रहती हैं जब ……
अनाज गोदामों मे सड़ता हैं……
जब गरीब किसान आत्महत्या करता है…
तब अक्सर ये सोई ही होती हैं…….

जब बातें अहिंसा, अहिंसात्मक शब्दों से होती है…..
तब सरकारें बस सोती हैं……
जब वोट बैंक की बातें न हों…..
जब हिन्दू या मुस्लिम कह कर देश में बटवारे न हों…..
तब ये अक्सर सो जाती हैं..
जब तक कोई उत्पात न हो……

फिर सरकारें जग जाती हैं………
जब आतंकियों को बचाना हो……..
ये हरकत में आती हैं जब ……..
बांग्लादेशियों को बसाना हो……
ये छोड़ नींद जग आती हैं…..
जब चुनावों की सरगर्मी हो……….

इनकी नींद कहीं खो जाती हैं जब……
नोटों से जेबें भरनी हों……….
सरकारें हरकत में आती हैं जब …..
वोट के लिए मोबाइल देना हो…….
ये नए दांव चलती हैं जब …….
उसी मोबाइल के खर्चे को नए टैक्स से भरना हो……..

ये तुरंत बातचीत को आती हैं जब…….
रेल की पटरियाँ तोड़ी जाती है…….
गिर कर घुटनो पर मानती हैं…….
जब सरकारी संपत्ति फुकी जाती है….
सारी तंद्रा टूट जाती है जब …….
दंगों से वोट बनाने हों….
और आज्ञातवास मे रहतीं हैं जब…
बस दंगे भड़काने हों…..

वो गोरो की सरकारें थीं…….
जो अहिंसामय गांधी की बोली भी सुनती थी…. .
ये चोरों की सरकारें हैं……
बस गाली और गोली ही सुनती हैं……

गोरों की सरकारें थी जिसने …..
क्रांतिकारियों पर वार किये…..
ये चोरों की सरकारें हैं ….
ये आतंकवादियों से प्यार करें……
बटवारे तभी होते थे जब गोरों की सरकारें थीं……
अब लोग बांटे जाते हैं इन चोरों की सरकारों में……….

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1210 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Trish के द्वारा
July 12, 2016

Posts like this make the innertet such a treasure trove

Santosh Kumar के द्वारा
August 15, 2012

आदरणीय पीयूष भाई ,.सादर नमस्ते बहुत अच्छी यथार्थ रचना ,..सादर अभिनन्दन वन्देमातरम

rameshbajpai के द्वारा
August 15, 2012

प्रिय श्री पियूष जी ओजस्वी स्वरों का जादू नीद में खलल जरुर डालेगा | बधाई

    Artrell के द्वारा
    July 12, 2016

    Haha, kjenner meg blant annet igjen når det gjelder den Sill-spimsinga. Det er alltids like underholdende å være som en gud innimellom.

R K KHURANA के द्वारा
August 14, 2012

प्रिय पियूष जी, इन सोई हुई सरकारों को किसे शंखनाद की जरुरत है ! बहुत अच्छी रचना राम कृष्ण खुराना

ilaagupta के द्वारा
August 14, 2012

NICE POEM

chaatak के द्वारा
August 14, 2012

थोड़ी शर्म तो गोरों के अन्दर भी थी, ये काले तो बिलकुल चिकने घड़े हैं\ अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    Lyza के द्वारा
    July 12, 2016

    I never thought I would find such an everyday topic so enatrhlling!

Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" के द्वारा
August 14, 2012

पियूष भाई, उत्तम कोटि की रचना, वर्तमान भारतीय परिदृश्य पर बखूबी व्यंग्य है… बहुत अच्छी रचना, किन्तु दुखद स्थिति

    Issy के द्वारा
    July 12, 2016

    Good to find an expert who knows what he’s takilng about!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
August 14, 2012

गोरों की सरकारें थी जिसने ….. क्रांतिकारियों पर वार किये….. ये चोरों की सरकारें हैं …. ये आतंकवादियों से प्यार करें…… बटवारे तभी होते थे जब गोरों की सरकारें थीं…… अब लोग बांटे जाते हैं इन चोरों की सरकारों में………. आदरणीय पन्त जी, सादर बधाई.

Chandan rai के द्वारा
August 14, 2012

पन्त मित्रवर , सरकारें सोती रहती हैं जब…… जंतर मंतर पर धरने होते हैं…. ये अक्सर सोई रहती हैं जब…. घोटाले घपले होते हैं….. जब बात राष्ट्र के हित की होती है…… बड़ी गहरी नींद ये सरकारें सोती हैं… जब आम जन की आवाज़ें नारों में गुंजा करती हैं…. तब ये सरकारें बस यूं ही सोया करती हैं…. बहुत ही जबरदस्त कविता से कटाक्ष ! आपका रोष कविता में झलक रहा है !

vikramjitsingh के द्वारा
August 13, 2012

आपकी बातों से पूर्णतया सहमती…..पियूष जी….. सादर…

    Carley के द्वारा
    July 12, 2016

    Amazing giveaway.. I get all excited after seeing all the fun vendors and awesome gifts. Hope I win, everything would be helpful to me. Phptrgoaohy by Lindsey Reeves

akraktale के द्वारा
August 12, 2012

आदरणीय पन्त जी                     नमस्कार, बहुत सुन्दर  रचना. किन्तु आप जिसे सोना कर रहे हैं मुझे तो यह उस चौकीदार कि तरह लग रहा है जों चोर से कहे मैंने मुह फेर लिया है तू चोरी करले. 

dineshaastik के द्वारा
August 12, 2012

पियूष जी, आपकी बातों से सहमत… बहुत ही सटीक प्रहार करती हुई सराहनीय काव्यात्मक प्रस्तुति….. http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/08/07/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0/

jlsingh के द्वारा
August 11, 2012

MEREE RAAY ME NAKSALWAAD, ATANKWAAD KEE JANAK BHEE YE SARKAREN HEE HAIN. YAH NAHEE SABAK LETEE, JAB INDIRA AUR RAJEEV KEE BERAHAM HATYA HUI THEE ….. MAIN YAH NAHEE KAHATA KI AISA HEE HONA CHAHIYE, PAR PARISTHITIYAN WAISEE HEE BANTEE JAA RAHEE HAI … AKHIR AAM AADMEE KYA KARE!

nishamittal के द्वारा
August 11, 2012

सच में सरकारें ही नहीं जनता भी सोती ही रहती हैं,क्योंकि यदि जनता जागती हो तो सरकार की निंद्रा कुम्भ्करनी कदापि नहीं हो सकती पियूष जी.

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    August 12, 2012

    बहुमत सिर्फ जनता ही देती है और कोई नहीं… समस्त जागरण के लेखकों का आकाश तिवारी का नमस्कार… बहुत व्यस्तता होने के कारन सब छूट सा गया..बस याद आती रहती है… आकाश तिवारी

    Henrietta के द्वारा
    July 12, 2016

    Hey Nicole,Sorry for late reply,the plugin is working properly for you, please try to click on the Verify Cofougiratinn button 2-3 times.It should work. If you still face problem, then cross check for other activated plugins in your WordPress blog which may be conflicting with this plugin.Just a reminder do not deactivate it.


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