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जीवन बहती धारा सा है...

Posted On: 2 Sep, 2012 Others में

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जीवन बहती धारा सा है,

जो बीत गया,

लौटता फिर कहाँ है,

धारा ने कब सागर की सोची,

उसका काम तो बस बहना है,

छोटे छोटे पत्थरों से,

या फिर पर्वत चट्टानों से,

टकराकर अपनी राह बनाती,

धारा को तो बस चलना है,

धारा का कोई अतीत नहीं है,

न धारा को भविष्य पता है,

उसको तो अपनी राह बनाते,

कल-कल करते बस बहना है,

उसका न कोई सगा है अपना,

न ही कोई उसे पराया,

कभी किसी की प्यास बुझाई,

कभी किसी को पार उतारा,

लोगों के अवशिष्ट बहाकर,

अपने संग संग ले कर जाती,

नहीं शिकायत कभी किसी से,

धारा अविरल बहती जाती,

धारा को जीवन में अपनाकर,

हम भी यूं ही बहते जाएँ,

न क्रोध, बैर न घृणा किसी से,

सबको निर्मल करते जाएँ……..

.

.

~~ पियूष कुमार पन्त

- – - – - – - – - – - – - – - – - – -

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340 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Wind के द्वारा
July 12, 2016

Superb inoromatifn here, ol’e chap; keep burning the midnight oil.

alkargupta1 के द्वारा
September 5, 2012

श्रेष्ठ भावाभिव्यक्ति पियूष जी अंतिम पंक्तियों में बहुत ही अच्छा सन्देश है

vaidya surenderpal के द्वारा
September 5, 2012

पियूष जी नमस्कार, बहूत सुन्दर भावपूर्ण कविता । आभार ।

ashishgonda के द्वारा
September 5, 2012

मान्यवर, सच कहा अपने जीवन एक ऐसी धारा है जो प्रतिक्षण चलती ही रहती है, बहुत खूबसूरत कविता- http://ashishgonda.jagranjunction.com/2012/09/05/%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8/

jlsingh के द्वारा
September 3, 2012

पीयूष जी, नमस्कार! यह जीवन तो एक बहती हुई धारा है और आपने बहुत ही सुन्दर तरीके से इसे दर्शाया भी है! एक त्रुटि जो मुझे दिखाई दे रही है कृपया इसे संशोधित कर लेते तो सोने में सुहागा हो जाता. जीवन बहती धारा सी है, जो आगे बढ़ गयी, मिली कहाँ है, (लौटता फिर कहाँ है,) मेरा मतलब धारा को स्त्रीलिंग रूप में निरूपित करने से है, आगे आपने किया भी है. “धारा अविरल बहती जाती,” सुन्दर और यथार्थ धारा प्रवाह की तुलना आपने जीवन से जो की है, वह बिलकुल सही है! (कृपया इसे अन्यथा न लेंगे. मेरी भी कोई रचना में कहीं भी कोई त्रुटि/अशुद्धि हो तो अवश्य चिह्नित करें … कभी कभी गलती हो ही जाती है!) आभार और बधाई!

    Piyush Pant के द्वारा
    September 4, 2012

    आदरणीय सिंह साहब….. आपने त्रुटी की और ध्यानाकर्षित किया इसके लिए धन्यवाद.. पर यहाँ प्रथम पंक्ति पर जीवन को जो की पुर्लिंग है धारा सा बताया गया है…. बाकि आगे भी आप इसी तरह त्रुटियों की और ध्यान आकर्षित करवाएं ….. आपका आभार.,..

    Suevonne के द्वारा
    July 12, 2016

    what is the juiiiftcatson for selling this at a price much higher than the nexus 7?also why only a $100 subsidy from t-mobile?if the cost is this low unlocked t-mobile should give it away for free, and than it would move like crazy.

akraktale के द्वारा
September 2, 2012

पियूष जी              सादर, सही कहा आपने इंसान को अपने जीवन में नदी की धारा के सामान ही निश्छल और निर्मल रहना चाहिए फिर बाहरी तत्व उसे चाहे जितना मैला करें उसे बिना किसी भाव के बहते ही जाना चाहिए. सुन्दर रचना और उससे बढ़कर संदेश. बधाई.


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